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प्रदेश के हर गाँव में जन अभियान परिषद् का काम दिखेगा : श्री राघवजी भाई
आने वाले पाँच वर्षों में प्रस्फुटन समिति के माध्यम से संपूर्ण प्रदेश परिषद् का कार्यस्थल बन जायेगा। मैदानी स्तर पर परिषद् के कार्यों की प्रमाणिकता इस बात से परिलक्षित होती है कि जिला कलेक्टर एवं कमिश्नर परिषद् द्वारा दी जानकारी को ज्यादा विह्णासनीय मानने लगे हैं। जल्द ही प्रदेश के हर गाँव में म.प्र. जन अभियान परिषद् का काम दिखने लगेगा।
मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् समाज में एक अलग पहचान वाली संस्था बने यही सबका लक्ष्य होना चाहिए। हर जिले में परिषद् प्रभावी ढंग से कार्य कर पाये इसलिए न्यूनतम आवश्यक मैदानी अमला खड़ा कर लिया जा चुका है जिसमें राज्य कार्यालय के साथ ही संभाग, जिला तथा विकासखण्ड समन्वयक एवं प्रतिवर्ष १० प्रस्फुटन ग्राम प्रति विकासखण्ड के हिसाब से ६२६० प्रस्फुटन समितियाँ सम्मिलित हैं। आने वाले पाँच वर्षों में प्रस्फुटन समिति के माध्यम से संपूर्ण प्रदेश परिषद् का कार्यस्थल बन जायेगा। मैदानी स्तर पर परिषद् के कार्यों की प्रमाणिकता इस बात से परिलक्षित होती है कि जिला कलेक्टर एवं कमिश्नर परिषद् द्वारा दी जानकारी को ज्यादा विह्णासनीय मानने लगे हैं। जल्द ही प्रदेश के हर गाँव में म.प्र. जन अभियान परिषद् का काम दिखने लगेगा। यह बात वित्त, योजना आर्थिक व सांख्यिकी मंत्री एवं म.प्र. जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष श्री राघव जी भाई ने म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन अवसर पर कही।
उन्होंने बताया कि राज्य में अंत्योदय मेले आरंभ किये गये हैं जिसमें जिले भर के हितग्राहियों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा अपने कार्यों को इतना व्यापक बनाया जावेगा कि भविष्य में राज्य शासन को इस प्रकार के अंत्योदय मेलों को आयोजित करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय चिन्तन में, रक्त में स्वैच्छिक जन भागीदारी की सोच व समझ है। आज आवश्यकता इस बात की है कि इन संस्कारों को पुनः जागृत किया जाये तथा लोगों को विकास कार्यों हेतु प्रेरित किया जाये। समाज में स्वैच्छिकता से विकास कार्य कर रहे स्वैच्छिक संगठनों तथा व्यक्तियों का चिन्हांकन कर उसकी क्षमता को बढ़ाना जन अभियान परिषद् का प्रमुख कार्य है। इसीलिए प्रदेश में जन अभियान परिषद् को स्वयंसेवी संगठनों का शीर्ष संगठन भी कहा जाता है। श्री राघवजी भाई ने जन अभियान परिषद् के कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, जन्म मृत्यु दर, कुपोषण की समस्या के निराकरण में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करें। बिजली चोरी रोकने, वृक्षारोपण करने, जैविक खेती को प्रोत्साहन देने तथा गौ वंश संरक्षण हेतु अग्रणी भूमिका निभायें। श्री राघवजी भाई ने बजट में घोषणा की है कि जिस गाँव में बिजली चोरी या अन्य कारणों से बिजली से होने वाला अपव्यय १० प्रतिशत से कम रहा तो उस गाँव को एक लाख का पुरूस्कार दिया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा ७ से ११ मार्च २०११ तक शारदा विहार, केरवा बांध मार्ग, भोपाल में संभाग एवं जिला समन्वयकों का पाँच दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण आयोजित किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को स्वैच्छिक संगठन के विज़न, मिशन, रणनीति तथा परिणाम आधारित मूल्यांकन, स्व प्रबंधन, संप्रेषण कौशल, नेतृत्व कौशल, परियोजना निर्माण एवं बजटिंग, संवाद संकलन की विधा, उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के आयाम, वित्तीय औचित्य के मानक सिद्घांत, भण्डार क्रय एवं प्रबंधन, लेखा संबंधी पंजियों का संधारण, मासिक व्यय पत्रक, यात्रा देयक नियम, ओँडिट तथा नस्ती संधारण एवं पत्राचार विषयों पर क्षमता वर्धन करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन म.प्र. जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष डॉ. जय शंकर मेहता तथा श्री प्रदीप पाण्डेय द्वारा किया गया।
शुभारंभ अवसर पर जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि म.प्र. जन अभियान परिषद् समाज के उत्थान हेतु कार्य कर रहा है तथा इसके कार्यकर्ता संस्था के माध्यम से समाज कार्य से जुड़े हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान विगत तीन वर्षों में किये गये कार्यों का सिंहावलोकन करें तथा यह विचार करें कि हम समाज की आशाओं पर खरे उतरे अथवा नहीं। आज हमारा कार्य लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अतः आवश्यकता इस बात की है कि हम हमारी सूझबूझ वाले कार्यकर्ता तैयार करें जिससे कार्य की जिम्मेदारी उनसे साझा की जा सके।
इस अवसर पर म.प्र. जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष डॉ. जय शंकर मेहता ने जन अभियान परिषद् के विजन, मिशन तथा रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विजन स्टेटमेंट की विशेषताओं, मिशन निर्धारण के तत्वों तथा रणनीति निर्धारण के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जन अभियान परिषद् द्वारा प्रस्फुटन समितियों के माध्यम से समाज को नेतृत्व देने का प्रयास किया जा रहा है। जिस कारण समाज में परिषद् के प्रति भावनात्मक लगाव उत्पन्न हुआ तथा समाज परिषद् से जुड़ गया है। अतः यह आवश्यक है कि हम कार्य के प्रति समर्पण रखे तथा प्रतिष्ठा पर ध्यान दें।
म.प्र. जन अभियान परिषद् के उप निदेशक श्री गिरीश जोशी ने परिणाम आधारित प्रबंधन एवं लॉजिकल फ्रेमवर्क अप्रोच विषय पर विचार रखे। शारदा विद्या मंदिर के प्रबंधक श्री विलास गोड़े ने कहा कि भारत में प्राचीन काल में देशी गायों की ६० प्रजातियाँ थी जो आज घट कर ३० की सीमा में आ गई हैं। यह अत्यन्त ही चिंता का विषय है।
कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रथम सत्र में डिबेट संस्था के श्री अमिताभ सिंह एवं सुश्री लीना सिंह ने अनुश्रवण मूल्यांकन एवं समंक विश्लेषण की अवधारणा एवं पद्घतियाँ विषय पर अपना प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि कार्यों के अनुश्रवण एवं मूल्यांकन से हमें अपने रास्ते को परखने का मौका मिलता है तथा यह जानने का अवसर मिलता है कि हम उस रास्ते पर ठीक ढंग से चल पा रहे हैं तथा संसाधनों का उचित उपयोग कर पा रहे हैं अथवा नहीं।
अतिथि वक्ता श्री प्रकाश सोलापुरकर ने कहा कि आज ग्रामीण समाज की यह प्रवत्ति बन गई है कि यदि कोई गाँव में आयेगा तो वह कुछ देकर जायेगा। अतः यह आवश्यक है कि जन अभियान परिषद् समाज की इस मानसिकता को बदलने हेतु व्यापक प्रयास करे। किसी भी संस्था को अनुशासित रहने के लिए समय का पालन करना आवश्यक है। प्रबंधन गुरु व चिंतक डॉ. विजय शंकर मेहता ने कहा कि जीवन का स्व प्रबंधन करने से अधिक श्रेष्ठ और कुछ भी नहीं। म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा समाज के मन में गौरव का भाव जागृत करने की आवश्यकता है।
प्रशिक्षण के तीसरे दिन भारतीय सूचना सेवा के सेवानिवृत्त एडीशनल डायरेक्टर जनरल डॉ. विजय अग्रवाल ने संप्रेषण कौशल तथा नेतृत्व कौशल विकास पर अपने विचारों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विगत कुछ दिनों में मिस्त्र तथा टयूनिसिया जैसे राष्ट्रों में राजनैतिक परिवर्तन का आधार इंटरनेट के माध्यम से किया गया संप्रेषण ही है। संप्रेषण कौशल से बड़ी शक्ति इस धरा पर नहीं है। इसी दिन जन अभियान परिषद् की निदेशक परियोजना श्रीमती हेमलता सिंह ने प्रस्फुटन समितियों व नवांकुर संस्थाओं के परिप्रेक्ष्य में मूल्यांकन एवं मापदंड तैयार करने को लेकर जानकारी दी। निदेशक प्रशिक्षण श्रीमती सीमा दीपक ने प्रशिक्षण आयोजन को लेकर विस्तार में बताया।
वरिष्ठ पत्रकार श्री रमेश शर्मा ने संवाद संकलन की विधा तथा उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के आयाम विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संवाद की हमारी योग्यता तीन विषयों पर आधारित होती है जो कि शब्द, उसका अर्थ तथा उसका आशय समझने से संबद्घ होती है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता अपने क्षेत्र का गहन अध्ययन करें तभी उत्कृष्ट संवाद कर सकेंगे। यह आवश्यक है कि हम सिर्फ किताबों से ही नहीं अपितु अपने अनुभव से भी सीख लें। उन्होंने बताया कि एक अच्छा संवाद सकारात्मक एवं समीक्षात्मक होना चाहिए। उन्होंने परिषद् के कार्यकर्ताओं को उत्कृष्ट रिपोर्टिंग की विभिन्न विधाओं से विस्तार पूर्वक परिचित कराया।
प्रशिक्षण के चौथे दिन सेवा निवृत्त हृदय रोग शल्य चिकित्सक डॉ. माधव हरी कान्हरे ने आरोग्य विष पर कहा कि ग्रामवासियों ने ही भारत की संस्कृति की अब तक रक्षा की है। अब समय आ गया है कि ग्रामों के विकास पर भी ध्यान दिया जावे, जिससे देश का विकास सुनिश्चित हो सके। वाल्मी के एसोसिएट प्रोफेसर श्री राजेश पौराणिक तथा शोधार्थी श्री सुमित मेहता द्वारा परियोजना निर्माण एवं बजटिंग विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। उन्होंने कहा कि म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा विभिन्न दानदाता संस्थाओं तथा स्वैच्छिक संगठनों के मध्य सेतु की भूमिका का निर्वहन श्रेष्ठता से किया जा सकता है। उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण में संवाद के माध्यम, प्रतिवेदन के प्रकार, तकनीकी प्रतिवेदन लेखन तथा प्रोजेक्ट प्रपोजल आदि बिन्दुओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा की। श्री जे.एस. राय ने नस्ती संधारण एवं पत्रचार के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण के अंतिम दिन श्री जय चौबे ने वित्तीय औचित्य के मानक सिद्घांत तथा भण्डार क्रय प्रबंधन पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं श्री आर.सी. जैन ने लेखा संबंधी पंजियों का संधारण एवं मासिक व्यय पत्रक को लेकर प्रतिभागियों को अवगत कराया। इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी संभाग व जिला समन्वयकों ने भाग लिया।
नवीन शर्मा
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