जन अभियान परिषद् एक परिचय

 

सम्पूर्ण विकास के लक्ष्य प्राप्ति हेतु स्वयंसेवी संस्थाओं और संगठनों को विकास की सशक्त इकाई के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता अनुभव की गई और एक जागरूक समाज के निर्माण के लिए स्वयंसेवी संगठनों और व्यवस्था के बीच सेतु के रूप में म.प्र. जन अभियान परिषद् की स्थापना की गई। विकास की अवधारणा की व्यापकता के लिये निर्मित म.प्र. जन अभियान परिषद् का पंजीयन म.प्र. सोसाइटी पंजीयन अधिनियम 1973 के अन्तर्गत दिनांक 04.07.1997 को किया गया। संस्था का पंजीयन क्र. 4964/97 है.

 

म.प्र. जन अभियान परिषद् एक उच्च स्तरीय निकाय द्वारा संचालित संस्था है। इसके पदेन अध्यक्ष म.प्र. के मुख्यमंत्री माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान हैं। परिषद् के उपाध्यक्ष वित्त, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री राघवजी हैं। परिषद् का संचालन दो निकायों शासी निकाय व कार्यकारिणी सभा द्वारा किया जाता है। शासी निकाय में विभिन्न विभागों के मंत्री तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के 15 नामांकित प्रतिनिधि सदस्य हैं। कार्यकारिणी सभा के सभापति म.प्र. शासन के मुख्य सचिव हैं व विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव व 5 नामांकित सदस्य शामिल हैं। पूर्णकालिक कार्यपालक निदेशक इन दोनों समितियों के सदस्य सचिव हैं।

 

समग्र विकास के लिए समान चेतना विकसित करने, उन्नति, वृद्धि एवं अटूट विश्वास का रंग भरने के लिए जन अभियान परिषद् प्रतिबद्ध है, यह शासन और स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच समन्वयक की भूमिका निर्वाह करता है। जन अभियान परिषद् का उद्देश्य जन चेतना का विकास करना है। यह एक ऐसे सूचना केन्द्र के रूप में कार्यरत है जो जन संगठनों को शासन की एवं शासन को जन संगठनों की जानकारी उपलब्ध करायेगी, ताकि विकसित समाज का निर्माण हो सके।

 

म.प्र. जन अभियान परिषद् स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच नेटवर्किंग क्षमता विकास और सशक्तिकरण के लिये कार्यरत है। परिषद् संस्थाओं को एक ही स्थान पर सहयोग, मार्गदर्शन एवं शासन की विभिन्न योजनाओं को उपलब्ध कराना, संस्थाओं का कार्यक्षेत्र एवं प्रभाव क्षेत्र के आधार पर उनका वर्गीकरण एवं मूल्यांकन कर सूची शासन को उपलब्ध कराना, शासन की विभिन्न योजनाओं में स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका को सुनिश्चित करने का प्रयास करना और स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक व्यक्ति को मिले तथा प्राकृतिक संपदा का दोहन बेहतर ढंग से किया जाए, इन उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु प्रयासरत है।

 

म.प्र. जन अभियान परिषद् ने कार्य के सुचारु संचालन व कार्ययोजना के संचालन हेतु संभाग समन्वयक एवं जिला समन्वयकों के लिए 28 मार्च 2007 से 02 अप्रेल 2007 तक पचमढी के न्यू होटल में प्रशिक्षण शिविर उदय का आयोजन किया। परिषद् ने प्रदेश के 7 संभागों ग्वालियर, उज्जैन, भोपाल, इन्दौर, सागर, जबलपुर और रीवा में जून-जुलाई 2007 में कार्यशालाओं का आयोजन किया। इन कार्यशालाओं में प्रदेश के संभाग, जिला समन्वयक एवं लगभग 1000 स्वयंसेवी संस्थाओं ने भाग लिया।

 

विकासात्मक गतिविधियों में स्वयंसेवी संस्थाओं की विशिष्ट भूमिका को देखते हुए राज्य स्तरीय नीति निर्माण को आकार देने का दायित्व म.प्र. जन अभियान परिषद् को सौंपा गया है। इसी तारतम्य में म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा 23 अगस्त 2007 को होटल जहाँनुमा पैलेस, भोपाल में ’’स्वयंसेवी संस्थाओं की प्रादेशिक नीति निर्माण कार्यशाला‘‘ का आयोजन किया गया। प्रादेशिक नीति निर्माण के लिए लक्ष्य समूह के बडे वर्ग की सक्रिय भागीदारी वाले आयोजन में समूह चर्चा के दौरान अनेक प्रमुख बिन्दु निकलकर सामने आए।

 

म.प्र. जन अभियान परिषद् के समन्वयक प्रदेश के सभी संभागों, जिलों व विकासखण्डों में मैदानी कार्य में संलग्न हैं। परिषद् द्वारा अब-तक 4997 स्वयंसेवी संस्थाओं से संपर्क,  3482 स्वयंसेवी संस्थाओं का पंजीयन और 1492 स्वयंसेवी संस्थाओं का मैदानी कार्य देखा जा चुका है। परिषद् में पंजीकृत 2479 स्वयंसेवी संगठनों की ई-डायरेक्ट्री इसी वेबसाईट पर उपलब्ध है। सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु जन अभियान परिषद् ने मई 2008 से मासिक पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया है। जन अभियान परिषद् की प्रमुख गतिविधियों में नवांकुर, प्रस्फुटन, सृजन, दृष्टि और संवाद शामिल हैं। म.प्र. जन अभियान परिषद् अपने संभागीय समन्वयक,  जिला समन्वयक एवं विकासखण्ड समन्वयकों के साथ प्रदेश के एक-एक गाँव तक अपने कार्यों को बढायेगा। जन विकास के इस अभियान में आप सब सहभागी बनें और विकास के लक्ष्य को पूर्ण करने के लिये साथ चलें साथ बढें।

 

  • म.प्र. जन अभियान परिषद् स्वयंसेवी संस्थाओं का संसार है।
  • समग्र विकास के लक्ष्य प्राप्ति हेतु स्वयंसेवी संस्थाओं और सामुदायिक संगठनों को विकास की सशक्त ईकाई के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से म.प्र. जन अभियान परिषद् का गठन किया गया है। परिषद् मध्य प्रदेश सोसायटी पंजीकरण के अधिनियम 1973 के अंतर्गत जुलाई 1997 में पंजीकृत की गयी इसका पंजीयन क्रमांक 4964/97 है। परिषद् एक उच्च स्तरीय निकाय द्वारा संचालित संस्था है। परिषद् के अध्यक्ष मध्यप्रदेश शासन के माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान एवं उपाध्यक्ष वित्त, योजना एवं आर्थिक मंत्री श्री राघवजी भाई और वरिष्ठ सामाजिक चिंतक व पर्यावरणविद्, श्री अनिल माधव दवे हैं। भौगौलिक, प्राकृतिक, सामाजिक, विविधता वाले म.प्र. के विकास के लिए मानव संसाधनों व सृजन का अधिकमत उपयोग करना परिषद् का उद्देश्य् है।
  • जन अभियान परिषद् स्वयंसेवी संस्थाओं और राज्य सरकार, केन्द्र सरकार तथा वित्त पोषण करने वाली राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करेगी। ताकि स्वयंसेवी संस्थाओं का सशक्तिकरण हो और वे समाज के समग्र विकास में सहभागी बनें।
  • परिषद् समाज और सरकार के बीच की वो कडी है जो सरकार, जनता और स्वयंसेवी संगठनों के बीच सेतु का काम करती है। यह शासन को सलाह देने, सामुदायिक भागीदारी प्रोत्साहित करने, स्वयंसेवी संस्थाओं से संबंधित जानकारी समेकित कर नीतियों के क्रियान्वयन के लिए एक समन्वयक अभिकरण के रूप में कार्यरत है।
  • जन अभियान परिषद् जन संगठनों का समन्वयक है, सहायक है, मार्गदर्शक है और प्रोत्साहक भी। परिषद् जन संगठनों को शासन की योजनाओं की जानकारी देती है। उनके क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण तथा साधनों को जुटाने में सहायता करती है। जिस तरह नदियों का संग्रहित जल एक महासागर का रूप ले लेता है उसी तरह प्रदेश भर में कार्यरत जनसंगठनों से मिलकर म.प्र. जन अभियान परिषद् जन विकास यज्ञ कर रहा है। परिषद् विकास के लिए जन संगठनों का एक ऐसा मंच है जो नए संगठनों को प्रोत्साहन व पुराने को विस्तार देता है।
  • म.प्र. जन अभियान परिषद् अपने सहयोगी संगठनों के माध्यम से संपूर्ण मध्यप्रदेश में अपना एक आधारभूत ढाँचा तैयार करेगी। जन अभियान परिषद् से जुडे संगठन स्थानीय संस्थाओं तथा अन्य शासकीय उपक्रमों से मिलकर विकास के प्रति सामाजिक जागरण का वातावरण निर्मित करेंगे ताकि आगामी वर्षो में मध्य प्रदेश का एक विकसित स्वरूप निखर कर सामने आ सके।

 

जन अभियान परिषद् के उद्देश्य
  • स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए एक सूचना केन्द्र के रूप में कार्य करना। स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच नेटवर्किंग] क्षमता विकास और सशक्तिकरण का प्रयास करना । इसके लिए संस्थाओं की जानकारी एकत्रित करना ।
  • स्वयंसेवी संस्थाओं को एक ही स्थान पर आवश्यक सहयोग , मार्गदर्शन और परियोजनाओं, उनका क्रियान्वयन, प्रभाव मूल्यांकन आदि के संबंध में जानकारियाँ उपलब्ध कराना।
  • राज्य शासन एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के मध्य विकास के सभी क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करना तथा संबंधित विषयों पर शासन को सलाह देना ।
  • राज्य में स्वयंसेवी संस्थाओं की स्थापना तथा संचालन के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण तथा इसके लिए नीतियाँ तैयार करना ।
  • स्वयंसेवी संस्थाओं के ���ार्यक्षेत्र तथा प्रभाव क्षेत्र के आधार पर उनका वर्गीकरण एवं मूल्यांकन करना तथा उनकी सूची संधारित कर इच्छुक व्यक्तियों, संस्थाओं और शासन को उपलब्ध करवाना ।
  • राष्ट्रीय एवं अतंर्राष्ट्रीय संस्थाओं से समन्वय कर स्वयंसेवी संस्थाओं की गतिविधियों को बढाने के लिए जानकारी एकत्रित कर उपलब्ध करवाना ।
  • शासकीय विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी बढाने के लिए विभागीय कार्यक्रमों/नियमों में परिवर्तन करने में मद्द करना ।
  • स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा बहुउद्देशीय अभिनव परियोजनायें प्रारंभ करने हेतु शासन के विभिन्न विभागों के मध्य समन्वयक का कार्य करना।
  • स्वयंसेवी संस्थाओं , शासकीय विभागों , नगरीय, प्रशासन की संस्थाओं तथा पंचायत राज संस्थाओं प्रबंधन सहभागिता तथा संवाद की क्षमता को बढाने, विचारों तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा विकास के विभिन्न मुद्दों की समझ बढाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना ।
  • आर्थिक तथा सामाजिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण आदि के विशिष्ट कार्यक्रम एव योजनाओं का क्रियान्वयन स्वंयसेवी संस्थाओं के माध्यम से करने हेतु एक कोष की स्थापना कर अनुदान उपलब्ध करना।
  • उपयुक्त तकनीक समुदायिक नेतृत्व सहभागिता , प्रशिक्षण एवं विकास के क्षेत्र में अभिनवता को प्रोत्साहित करना ।
  • परिषद् में पंजीकृत संस्थाओं को राज्य, केन्द्र , व अन्य राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से अनुदान में आवश्यक सहयोग करना।
  • समाजिक-आर्थिक विकास से जुडी विभिन्न परियोजनाओं के प्रभाव एवं मूल्यांकन हेतु सर्वेक्षण तथा अध्ययन आयोजित करना।
  • विकास से जुडे मुद्दों पर सेमीनार , कार्यशाला और संगोष्ठियां आयोजित करना।

 

 
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