म.प्र. जन अभियान परिषद् की शासी निकाय की बैठक माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान की अध्यक्षता में दिनांक 29.03.2011 को सम्पन्न । • • • प्रदेश के स्वैच्छिक संगठनों की क्षमता वर्धन हेतु प्रत्येक जिले में से 25-25 स्वयंसेवी संगठनों का चयन किया जाकर प्रशिक्षण कार्यशालाएँ सम्पन्न |
 

मध्यप्रदेश स्वैच्छिक संगठनों हेतु राज्य की नीति ।



45 हजार 800 स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद।



सात संभागो भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, रीवा और जबलपुर में प्रस्फुटन समितियों के साथ संभाग स्तरीय सम्मलेन का आयोजन|

 

 
जल संरक्षण

जनभागीदारी से बनाई एक करोड़ रुपये की बावड़ी

नीमच जिले के जावद विकासखण्ड के ग्राम मौड़ी में महामाया माताजी को मंदिर का निर्माण किया गया। यह मंदिर पूर्ण जन सहयोग से बना है। यहीं पर एक बावड़ी का भी निर्माण किया गया है। बिना किसी शासन के सहयोग से इस बावड़ी को बनाने के लिए एक करोड़ रुपये एकत्र किए गए जिसमें ८० लाख रु. की राशि खर्च हो चुकी है एवं २० लाख रु. खर्च किये जाना प्रस्तावित है। यह बावड़ी ८ मंजिल की बनी है जिसमें ८०० सीढ़ियां हैं। यह बावड़ी १०० बाई १०० फीट चौड़ी एवं ९० फीट गहरी है। इस प्राचीन बावड़ी का नए सिरे से जीर्णोद्घार किया गया है।
जीर्णोद्घार के लिए जिले भर से जन सहयोग से एक करोड़ रु. एकत्रित किए गए। यह कार्य पिछले तीन साल से चल रहा था। बावड़ी का ५ मंजिल तक जीर्णोद्घार किया गया है। इस बावड़ी का निर्माण पूर्ण जन सहयोग, जन संग्रह और जन श्रमदान से किया गया है। इससे पहले भी बावड़ी निर्माण के लिये तीन बार प्रयास किया गया लेकिन वह प्रयास सफल रहा। अब यह बावड़ी नये स्वरूप में बनाई गई है। इसका उद्‌घाटन शीघ्र ही मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किया जाएगा। इस बावड़ी के पानी की विशेषता है कि इसमें गंधक की मात्रा सामान्य से अधिक है। यदि लकवा, चर्मरोग से ग्रसित व्यक्ति इस पानी में नहाते हैं तो उनकी यह बीमारियां ठीक हो सकती हैं।
नौग्रहों का मंदिर निर्माणाधीन : बावड़ी के जीर्णोद्घार के लावा यहीं एक नौ ग्रहों के मंदिर का निर्माण चल रहा है। यह निर्माण भी भव्य और आकर्षक है। यह कार्य भी पूर्ण जन सहयोग से हो रहा है। साथ ही यहां एक नक्षत्र वाटिका बनाने की भी योजना है।

सुरेश शास्त्री

ध्यक्ष, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति मौड़ी

जिला नीमच

जलाभिषेक अभियान का शुभारंभ प्रस्फुटन ग्राम बिंजाखेड़ी से

प्रस्फुटन समिति में भरपूर ऊर्जा है और इसका उपयोग गाँव की प्रगति में बेहतर रूप से किया जा सकता है। उस वक्त पानी की समस्या से जूझते गाँव में जल संरक्षण पर कार्य करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। तभी से तालाब निर्माण का अंकुरण प्रस्फुटन समिति के मन में था और उसी की परीणति स्वरूप एक साथ तीन-तीन तालाबों का निर्माण एक सराहनीय कार्य है।
रतलाम विकासखण्ड के प्रस्फुटन गाँव बिंजाखेड़ी में जलाभिषेक कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस गाँव में जन भागीदारी से पूर्व में तीन तालाबों का निर्माण किया गया है। इसीलिये म.प्र. सरकार के महत्वाकांक्षी जलाभिषेक अभियान का शुभारंभ इस गाँव से हुआ। इस अवसर पर नगरी प्रशासन एवं विकास राज्य मंत्री श्री मनोहर ऊंटवाल ने कहा कि पानी के मृत स्त्रोतों जैसे सूखे कुएँ, बावड़ी, नलकूपों आदि के पुनर्जीवन के लिए प्रस्फुटन समितियाँ बीड़ा उठाये तब ही हम जल संरक्षण कर वर्तमान के साथसाथ आने वाली पीढ़ी के लिये भी पानी बचा सकते हैं।
म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि जब मैं अप्रैल २००९ में गाँव में आया था तब एक निर्माणाधीन माता मंदिर पर प्रस्फुटन समिति के सदस्यों से मुलाकात हुई थी। आज इस स्थान पर लाखों रुपये की लागत से निर्मित इस खूबसूरत मंदिर को देखकर बेहद खुशी हुई। इसी से स्पष्ट है कि प्रस्फुटन समिति में भरपूर ऊर्जा है और इसका उपयोग गाँव की प्रगति में बेहतर रूप से किया जा सकता है। उस वक्त पानी की समस्या से जूझते गाँव में जल संरक्षण पर कार्य करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। तभी से तालाब निर्माण का अंकुरण प्रस्फुटन समिति के मन में था और उसी की परीणति स्वरूप एक साथ तीन-तीन तालाबों का निर्माण एक सराहनीय कार्य है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के सपनों को साकार करने के लिये ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण, नशामुक्ति, समग्र स्वच्छता, सबके लिये शिक्षा, सबके लिये स्वास्थ्य एवं हरियाली आदि पर इसी तरह स्वैच्छिकता से कार्य करने का आग्रह किया।
श्री पाण्डेय एवं श्री ऊंटवाल ने मुख्यमंत्री पेयजल योजना के तहत ४,७४,०००/ रुपये से निर्मित पेयजल योजना का लोकार्पण किया। इस योजना के तहत एक पंप हाऊस तथा तीन जल वितरण सिस्टम के साथ १,००० मीटर पाईप लाईन बिछाई गई। अतिथियों द्वारा वर्ष २००८-०९ में जिले की १५ ग्राम पंचायतों को निर्मल गाँव पुरूस्कार एवं प्रतीक चिन्ह भेंट किये गए। इस मौके पर कलेक्टर श्री राजेन्द्र शर्मा ने अपने उद्‌बोधन में कहा कि ग्राम में जनसहयोग की विशेषता को देखते हुए ही इस ग्राम का चयन जलाभिषेक अभियान के शुभारंभ के लिये किया गया है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनीता राजमल जैन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री राकेश कुमार श्रीवास्तव, जन अभियान परिषद्‌ के संभागीय समन्वयक श्री वरूण आचार्य आदि उपस्थित थे।

गोकुल सिंह पवार

सचिव, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति बींजाखेड़ी

जिला रतलाम

११०० सौ बोरियों से बनायें तीन बोरी बंधान

रतलाम जिले की विकासखण्ड जावरा के रौला ग्राम की प्रस्फुटन समिति ने स्वैच्छिक प्रयास से गाँव में ११०० बोरियों के तीन बोरी बंधान बनायें। गांव के तीन नालों पर बनायें गये इन बोरी बंधानों के कारण वहॉ लबालब पानी भरा है। यी कार्य समिति सदस्यों की प्रेरणा और ग्रामीणों के सहयोग से पूर्ण किया गया है।

और अधिक जानें ...........

११०० सौ बोरियों से ..

पैंसठ स्थानों पर बोरी बंधान

सीधी जिले में ६५ स्थानों पर जल संरक्षण पर कार्य करते हुए लगभग ६५० एकड़ जमीन की सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था हो गयी है। जिससे लगभग २८५ छोटे बडे किसान लाभान्वित होंगे। जल संरचनाओं के निर्माण में लगभग दो लाखा सोलह हजार रुपये जन सहयोग से एकत्र कर व्यय किये गये। विकास के यह कार्य स्वैच्छिक सहयोग से किये गये। यह कार्य ग्रामीणों को जल के महत्व के बारे में जन अभियान परिषद्‌की प्रस्फुटन समितियों द्वारा लगातार दी जा रही जानकारी व ग्राम विकास यात्रा के दौरान प्रस्तुत नुक्कउ नाटक व गीत की प्रेरणा से सम्पन्न हुआ।

और अधिक जानें ...........

पैंसठ स्थानों पर ..

थम गया बहता पानी ..

एक माह में ३२ बोरी बंधान ..

श्रमदान से तालाब का गहरीकरण,तालाब की मिट्‌टी बेचकर जुटायें दो लाख रुपये

रायसेन जिले के खसरौद गांव में लगातार पानी की समस्या रहती थी। सूखे से परेशान होकर लोग पलायन भी करने लगे थे। पानी की समस्या को हल करने के लिएजन अभियान परिषद्‌ समिति खसरौद की ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति ने गांव के तालाब को गहरा करने का निर्णय लिया। सर्वप्रथम तालाब गहरीकरण को लेकर बैटक कर कार्य योजना बनाई गई। सभी को तालाब गहरीकरण के लिए सहमत किया गया तथा पंचायत से अनुमति भी ली गई। चूंकि तालाब बडा था, उसके लिए गहरीकरण के लिए जे.सी.बी. मशीन की आवश्यकता थी। वहीं जे.सी.बी. मशीन के किराये के लिये पैसों की भी समस्या थी। इस समस्या के निराकरण के लिए समिति सदस्यों ने तालाब की मिट्‌टी को बेचने की योजना बनाई। योजनानुसार लागतार १० दिन तक तालाब गहरीकरण का कार्य किया गया। पहले जहां तालाब मात्र ८-१० फीट गहरा था इसे २५-३० फीट गहरा किया गया। तालाब की मिट्‌टी बेचने से लगभग दो लाख रुपये प्रस्फुटन समिति को प्रापत हुए। इस राशि से जे.सी.बी. मशीन का किराया दिया गया व शेष राशि से ग्राम के मंदिर की बाऊंड्री वॉल बनाई गई अभी तालाब की पाल को पक्का किया जाना शेष है। इस तरह गांव ने स्वैच्छिक सहभागिता से पानी की समस्या को स्वयं हल कर दिया है। उम्मीद है अब गांव से लोगों का पलायन भी रुक जायेगा।

आशीष गौर

अध्यक्ष ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति

खसरौद जिला रायसेन

जल को सहेजने के प्रयास

जीवन के प्रमुख तत्वों में जल का बड़ा महत्व है। सृष्टि के समस्त जीवों के लिए जल प्रमुख घटक है। जल के बिना न जीवन है और न ही सृष्टि। किसी ने कहा है अगला विह्णा युद्घ जल के लिए होगा। लगातार घटते जल स्तर और बढ़ते जल के दोहन से यह बात सत्य भी है। आंकड़े बताते हैं कि पृथ्वी से जल की उपलब्धता घटती जा रही है। पृथ्वी के ७० प्रतिशत हिस्से पर भले ही जल हो लेकिन उपयोग के लिए जल की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है। उपयोग के साथ साथ पेयजल के लिए भी जद्दोजहद होने लगी है।
देश में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध नहीं है। लगातार कम होती जा रही बारिश से यह संकट बढ़ता जा रहा है। यदि आज हम नहीं चेते तो यह संकट बढ़ता ही जाएगा और एक समय ऐसा भी आएगा कि जब हम जल से मोहताज हो जाएंगे। आज जरूरत है जागरूक होने की। यदि हम जल के प्रति जागरूक नहीं हुए तो भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। पानी की प्रति व्यक्ति उपलब्धता दिनों दिन कम होती जा रही है। ऐसे में पानी की आपूर्ति का वह तरीका श्रेष्ठ होगा जो पानी के उपयोग में मितव्ययता को संभव बनाए।

हमें पानी के उपयोग के ऐसे विकल्प तलाशने होंगे जो जल के दोहन को कम करे। दूसरी तरफ जल को सजेहने की प्रवति लानी होगी। विशेषकर वर्षा जल को जितना अधिक सहेजेंगे उतनी समस्या कम होगी। मानसूनी वर्षा पर भी भी हमारी कृषि और पेयजल की जरूरत का आधे से अधिक भाग निर्भर है। हम वर्षा के रूप में सालभर में लगभग ४००० अरब घन मीटर पानी प्राप्त करते हैं।

जल को सहेजने के तमाम प्रयासों के चलते म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ की प्रस्फुटन समितियों ने एक अभिनव अभियान चलाया है। गाँव का पानी गाँव में। इस भियान द्वारा परिषद्‌ की प्रस्फुटन समितियाँ पानी की बूंदबूंद सहेजने में लगी है। इन प्रस्फुटन समितियों ने प्रदेश भर में १६८८ बोरी बंधान, ४२२ तालाबों का गहरीकरण, १,१२० कुओं का गहरीकरण, ११५ बावड़ियों का गहरीकरण किया है।

प्रस्फुटन समितियों द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किये गये कार्य

क्रं.संभाग के नामकुओं का गहरीकरण/चेक डेम/बोरी बंधानतालाबों का गहरीकरणबावड़ियों का गहरीकरण
1.सागर संभाग46   38484
2.रीवा संभाग139   54778
3.ग्वालियर संभाग23   38068
4.उज्जैन संभाग144   3049119
5.जबलपुर संभाग572   11241417
6.भोपाल संभाग100   378498
7.इन्दौर संभाग96  536467

श्रमदान से प्रस्फुटित नहर

म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ की प्रस्फुटन समितियों द्वारा जल संरक्षण को लेकर किये जाने वाले उत्कृष्ठ प्रयासों में इंदौर संभाग के खरगौन जिले की भगवानपुरा तहसील से ३५ कि.मी. दूर वनवासी अंचल में बसे ग्राम झगड़ी की प्रस्फुटन समिति ने जल संरक्षण की अनूठी मिसाल कायम की है। झगड़ी की माँ भगवती ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के सदस्यों एवं ग्रामवासियों ने श्रमदान से एक लंबी नहर का निर्माण कर वर्षा जल को सहेजने के साथ जल को कृषि कार्य के लिये उपयोगी बनाया है।

जमरा फलिया में ४० से ४५ लोगों ने अपने अथक परिश्रम से मात्र ६ दिन में १२ मीटर लम्बा, २० मीटर चौड़ा तथा २ मीटर गहराई का बांध बनाया। इस बांध के पानी को खेतों तक पहुँचाने के लिये नहर निर्माण का निर्णय लिया गया। सबने उत्साह से श्रमदान किया और १.५ किलोमीटर लम्बी नहर निकाली। नहर बनाते समय सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण कार्य था चट्‌टान को खोदना लेकिन साझा संकल्प व सामूहिक परिश्रम से आठ दिन में यह कार्य संभव हो गया।

इस नहर के बनने से १६ किसानों की ४९ एकड़ कृषि भूमि सिंचित की जा रही है। इसी प्रकार पटेल फलिया में २५ से ३० लोगों ने मिलकर मात्र ८ दिन में ५ मीटर लम्बा, १२ मीटर चौड़ा तथा १ मीटर गहरा बांध बनाया और फिर ३.५ किलोमीटर लम्बी नहर निकाली। जिससे ११ किसानों की ५६ एकड़ कृषि भूमि सिंचित की जा रही है। समिति सदस्यों एवं ग्रामवासियों ने निःशुल्क श्रमदान कर बोरीबांध व नहर तैयार कर प्रशंसनीय कार्य कर दिखाया है। इस नहर से लगभग १०५ एकड़ भूमि सिंचित होकर २८ कृषक परिवार लाभान्वित हुए। ये परिवार ब गेहूँ, कपास एवं अन्य फसलें उगा पाने में सक्षम हैं।
ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के माध्यम से किए जाने वाले इस प्रयास में पूरा गाँव शामिल था। गाँव वालों ने गाँव का पानी गाँव में रोक खुद पानी उपलब्ध किया है। आज जरूरत ऐसे ही जन भागीदारी और जन सहयोग की है जो जल के महत्व को समझ कर आगामी समस्याओं से निपट सके।

गाँव का पानी गाँव में

यह केवल नारा नहीं बल्कि इसका एकएक शब्द प्रत्यक्ष में चरितार्थ होता है क्योंकि जल के बगैर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। यदि पानी की उपयोगिता को समय रहते नहीं समझा गया तो विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। भविष्य के जल संकट को देखते हुए म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा जिला बड़वानी के चयनित ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति ग्राम रूई वि.ख. राजपुर बड़वानी ने गाँव का पानी गाँव में'' अभियान चलाया और गाँव को जल गाँव बना दिया।

ग्राम रूई में तीन नाले बहते हैं जिनका पानी नदी में बहकर चला जाता था। नालों का पानी किसी प्रकार से प्रयोग नहीं हो पाता था। प्रस्फुटन समिति के सदस्यों ने बैठक में निर्णय लिया कि यदि नालों के पानी को स्थान स्थान पर रोक दिया जाये, तो इस पानी का उपयोग कृषि कार्य में किया जा सकता है। निर्णयानुसार ०९ अक्टूबर २००९ को प्रस्फुटन समिति के सदस्यों ने गाँव से सटे नाले में पहला ३५० बोरियों का बंधान बना कर पानी रोका। इस बंधान के माध्यम से ३५ मी.लम्बा, १५ मी. चौड़ा, १ मी. गहराई वाले क्षेत्र में १,१५,१३१ गैलेन पानी रोका गया।

शुरूआत में कुछ ग्रामवासियों का नकारात्मक रुख रहा परन्तु बाद में समिति के कार्यों को देख वे सहयोगात्मक भूमिका में आ गये। सम्पूर्ण ग्राम के सहयोग से प्रस्फुटन समिति का उत्साह और बढ़ गया क्योंकि श्रमदान में अब सारा गाँव उनके साथ था।

श्रमदान के माध्यम से ग्राम रूई की प्रस्फुटन समिति ने ७ बोरी बंधान कर तीन नालों के पानी को गाँव में ही रोक दिया। यही नहीं गाँव से होकर जाने वाली डेब नदी पर २००० बोरियों का बड़ा बंधान बनाकर नदी का पानी भी रोक लिया। डेब नदी में २००० बोरियों से १५० मी. लम्बे, ८० मी. चौड़े, १ मी. गहरे क्षेत्र में २६,३१,५७८ गैलेन पानी रोका गया। इस तरह ग्राम रूई की प्रस्फुटन समिति ने श्रमदान करके ३४,४८,५०० गैलेन पानी रोक लिया। स्थान स्थान पर पानी रोककर वर्षा जल को संग्रहित करने से जमीन के अंदर जल स्तर बढ़ने लगा जिससे गाँव के कुँए, टयूबवेल एवं हैण्डपम्पों का जल स्तर भी बढ़ गया है। अब यहाँ के किसानों को पानी की उपलब्धता है। जल का विकल्प जल' के इस अनूठे अभियान को आकार देकर ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति ने ग्राम रूई में अनुकरणीय मिसाल कायम की है।

"कहने में जरूर अटपटा लगता है लेकिन वास्तव में पानी की खेती होती है। यह एक ऐसी विधा है जिसे जल संरक्षण के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है। जल स्तर बढ़ाने का यह अभिनव प्रयोग है।"

ग्राम रामपुरिया में पानी की खेती जल प्रबंधन का बेहतर विकल्प


भोपाल संभाग के राजगढ़ विकासखण्ड के ग्राम रामपुरिया में इन दिनों पौधरोपण एवं जल संरक्षण के लिए पानी की खेती का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है। इससे ग्रामीण किसान अपने खेतों में भरपूर सिंचाई कर सकेंगे तथा गांव में पीने के पानी की समस्या भी हल हो सकेगी। प्रदेश में पानी की खेती के अपनी तरह के इस अनूठे प्रयोग का बीड़ा उठाया है, राजगढ़ जिले में गठित ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति सदस्यों ने। सुरक्षित भविष्य को देखते हुए इस प्रयास में संपूर्ण गाँव अपने अपने स्तर पर सहयोग कर रहा है।

पानी की खेती को नए रूप में प्रस्तुत करने के लिए २० बीघा जमीन को चारों तरफ से गहरी खुदाई करवाकर खाई का रूप दिया गया है। खुदाई के दौरान निकली मिट्टी, पत्थर तथा अन्य अवशेष से मेढ़ बनवाई गई, ताकि सरंक्षित पौधों को पशु नुकसान न पहुंचा सके। यहां विभिन्न खण्डों में ४ ट्रेन्च बनाकर विभिन्न आकृतियों के माध्यम से तालाब का रूप दिया गया है, जिससे वर्षा का पानी इसमें पर्याप्त रूप से संग्रहित हो सके। संग्रहित पानी खेतों में सिंचाई का माध्यम बनेगा, भूजल स्तर में बढ़ोतरी होगी और पशुओं सहित गाँव की पेयजल समस्या को काफी हद तक खत्म करने में कारगर साबित होगा।

इन ४ निस्तारित ट्रेन्चों की लागत तालाब के बराबर है, जिनमें एक के बाद एक में पानी का संचय होगा। पानी की खेती को देखने के लिये जिला कलेक्टर श्री लोकेश जाटव द्वारा सूचना शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में जिला कलेक्टर ने कृषि विभाग एवं जिले के विकासखण्ड स्तरीय अधिकारियों के साथ लगभग ३ घंटों तक पानी की खेती का अवलोकन किया।

जिला कलेक्टर ने ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के सहयोग से २० बीघा जमीन पर पानी की खेती के रूप में विकसित अभिवन प्रयोग को घंटो निहारा। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग की समस्या समाधान, भूजल स्तर में सुधार, गाँव की पेयजल समस्या का निपटारा, वृहद स्तर पर पौधरोपण, सिंचाई के उचित माध्यम के लिए इस प्रोजेक्ट की सराहना की। उन्होंने जिले की अन्य ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के माध्यम से इस कार्य को विस्तारित करने को कहा।


लगाए ४ हजार पौधे पानी को संग्रहित करने की दिशा में ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति ने ५ से १० फीट के वर्गाकार क्षेत्र में करीब ४ हजार पौधों को रोपित भी किया है, जिसमें बांस, नीम, गुलमोहर, जामुन, शीशम सहित फलदार और छायादार वृक्षों के पौधे शामिल है। इस तरह प्रत्येक वर्ग के चारों ओर पौधों के द्वारा जल को भी सरंक्षित किया जा रहा है।