क्षमतावर्धन से उज्जवल समाज का निर्माण ।
राज्य, संभाग व जिला स्त्रोत समूह प्रशिक्षण भोपाल में
म.प्र. जन अअभियान परिषद् स्वयंसेवी संगठनों का संसार रच विकास की प्रक्रिया में जनजन की सहभागिता के लिए प्रतिबद्घ है। समग्र विकास के लिए संकल्पित जन अभियान परिषद् -द्वारा क्षमतावान समाज निर्माण के लिए समृद्घि योजना अंतर्गत समयसमय पर क्षमतावृद्घि प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। ताकि अंतरिक प्रबंधन को आधुनिक परिदृश्य अनुरूप विकसित कर कार्यकर्ताओं की कौशलवृद्घि हो। यह कार्यकर्ता क्षमता सपंन्न समाज निर्माण की प्रक्रिया में नेतृत्व करें। यह क्षमतावान समाज स्वर्णिम मध्यप्रदेश निर्माण में सक्रिय भूमिका का निर्वह्न कर सके। क्षमतावृद्घि प्रशिक्षण कार्यक्रमों की इसी श्रृंखला में मुम्बई की रामभाऊ म्हालगी प्रबोधनी संस्था -द्वारा २१ से २४ फरवरी २०१२ को जन अभियान परिषद् के राज्य, क्षेत्रीय व जिला स्तर के स्त्रोत समूह का भोपाल में प्रशिक्षण सम्पन्न किया गया। प्रस्तुत है संक्षिप्त रिपोर्ट -
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........... क्षमतावर्धन से उज्जवल समाज.. 
माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह चौहान के साथ म.प्र. जन अभियान परिषद् के अधिकारियों एवं स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक दिनांक 25 अप्रैल 2011 को समन्वय भवन, टी.टी नगर, भोपाल में आयोजन ।
म.प्र.जन अभियान परिषद् के भोपाल एवं ग्वालियर संभाग के विकासखण्ड समन्वयकों की आधारभूत प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दिनांक 19.04.2011 से 23.04.2011 तक एवं जबलपुर, रीवा, एवं सागर संभाग का आयोजन दिनांक 26.04.2011 से 30.04.2011 एन.आई.टी.टी.टी.आर भोपाल में आयोजन ।
म.प्र. जन अभियान परिषद् की शासी निकाय की बैठक माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान की अध्यक्षता में दिनांक 29.03.2011 को सम्पन्न ।
प्रदेश के हर गाँव में जन अभियान परिषद् का काम दिखेगा : श्री राघवजी भाई
आने वाले पाँच वर्षों में प्रस्फुटन समिति के माध्यम से संपूर्ण प्रदेश परिषद् का कार्यस्थल बन जायेगा। मैदानी स्तर पर परिषद् के कार्यों की प्रमाणिकता इस बात से परिलक्षित होती है कि जिला कलेक्टर एवं कमिश्नर परिषद् द्वारा दी जानकारी को ज्यादा विह्णासनीय मानने लगे हैं। जल्द ही प्रदेश के हर गाँव में म.प्र. जन अभियान परिषद् का काम दिखने लगेगा।
मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् समाज में एक अलग पहचान वाली संस्था बने यही सबका लक्ष्य होना चाहिए। हर जिले में परिषद् प्रभावी ढंग से कार्य कर पाये इसलिए न्यूनतम आवश्यक मैदानी अमला खड़ा कर लिया जा चुका है जिसमें राज्य कार्यालय के साथ ही संभाग, जिला तथा विकासखण्ड समन्वयक एवं प्रतिवर्ष १० प्रस्फुटन ग्राम प्रति विकासखण्ड के हिसाब से ६२६० प्रस्फुटन समितियाँ सम्मिलित हैं। आने वाले पाँच वर्षों में प्रस्फुटन समिति के माध्यम से संपूर्ण प्रदेश परिषद् का कार्यस्थल बन जायेगा। मैदानी स्तर पर परिषद् के कार्यों की प्रमाणिकता इस बात से परिलक्षित होती है कि जिला कलेक्टर एवं कमिश्नर परिषद् द्वारा दी जानकारी को ज्यादा विह्णासनीय मानने लगे हैं। जल्द ही प्रदेश के हर गाँव में म.प्र. जन अभियान परिषद् का काम दिखने लगेगा। यह बात वित्त, योजना आर्थिक व सांख्यिकी मंत्री एवं म.प्र. जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष श्री राघव जी भाई ने म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन अवसर पर कही।
उन्होंने बताया कि राज्य में अंत्योदय मेले आरंभ किये गये हैं जिसमें जिले भर के हितग्राहियों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा अपने कार्यों को इतना व्यापक बनाया जावेगा कि भविष्य में राज्य शासन को इस प्रकार के अंत्योदय मेलों को आयोजित करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय चिन्तन में, रक्त में स्वैच्छिक जन भागीदारी की सोच व समझ है। आज आवश्यकता इस बात की है कि इन संस्कारों को पुनः जागृत किया जाये तथा लोगों को विकास कार्यों हेतु प्रेरित किया जाये। समाज में स्वैच्छिकता से विकास कार्य कर रहे स्वैच्छिक संगठनों तथा व्यक्तियों का चिन्हांकन कर उसकी क्षमता को बढ़ाना जन अभियान परिषद् का प्रमुख कार्य है। इसीलिए प्रदेश में जन अभियान परिषद् को स्वयंसेवी संगठनों का शीर्ष संगठन भी कहा जाता है। श्री राघवजी भाई ने जन अभियान परिषद् के कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, जन्म मृत्यु दर, कुपोषण की समस्या के निराकरण में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करें। बिजली चोरी रोकने, वृक्षारोपण करने, जैविक खेती को प्रोत्साहन देने तथा गौ वंश संरक्षण हेतु अग्रणी भूमिका निभायें। श्री राघवजी भाई ने बजट में घोषणा की है कि जिस गाँव में बिजली चोरी या अन्य कारणों से बिजली से होने वाला अपव्यय १० प्रतिशत से कम रहा तो उस गाँव को एक लाख का पुरूस्कार दिया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा ७ से ११ मार्च २०११ तक शारदा विहार, केरवा बांध मार्ग, भोपाल में संभाग एवं जिला समन्वयकों का पाँच दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण आयोजित किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को स्वैच्छिक संगठन के विज़न, मिशन, रणनीति तथा परिणाम आधारित मूल्यांकन, स्व प्रबंधन, संप्रेषण कौशल, नेतृत्व कौशल, परियोजना निर्माण एवं बजटिंग, संवाद संकलन की विधा, उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के आयाम, वित्तीय औचित्य के मानक सिद्घांत, भण्डार क्रय एवं प्रबंधन, लेखा संबंधी पंजियों का संधारण, मासिक व्यय पत्रक, यात्रा देयक नियम, ओँडिट तथा नस्ती संधारण एवं पत्राचार विषयों पर क्षमता वर्धन करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन म.प्र. जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष डॉ. जय शंकर मेहता तथा श्री प्रदीप पाण्डेय द्वारा किया गया।
शुभारंभ अवसर पर जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि म.प्र. जन अभियान परिषद् समाज के उत्थान हेतु कार्य कर रहा है तथा इसके कार्यकर्ता संस्था के माध्यम से समाज कार्य से जुड़े हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान विगत तीन वर्षों में किये गये कार्यों का सिंहावलोकन करें तथा यह विचार करें कि हम समाज की आशाओं पर खरे उतरे अथवा नहीं। आज हमारा कार्य लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अतः आवश्यकता इस बात की है कि हम हमारी सूझबूझ वाले कार्यकर्ता तैयार करें जिससे कार्य की जिम्मेदारी उनसे साझा की जा सके।
इस अवसर पर म.प्र. जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष डॉ. जय शंकर मेहता ने जन अभियान परिषद् के विजन, मिशन तथा रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विजन स्टेटमेंट की विशेषताओं, मिशन निर्धारण के तत्वों तथा रणनीति निर्धारण के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जन अभियान परिषद् द्वारा प्रस्फुटन समितियों के माध्यम से समाज को नेतृत्व देने का प्रयास किया जा रहा है। जिस कारण समाज में परिषद् के प्रति भावनात्मक लगाव उत्पन्न हुआ तथा समाज परिषद् से जुड़ गया है। अतः यह आवश्यक है कि हम कार्य के प्रति समर्पण रखे तथा प्रतिष्ठा पर ध्यान दें।
म.प्र. जन अभियान परिषद् के उप निदेशक श्री गिरीश जोशी ने परिणाम आधारित प्रबंधन एवं लॉजिकल फ्रेमवर्क अप्रोच विषय पर विचार रखे। शारदा विद्या मंदिर के प्रबंधक श्री विलास गोड़े ने कहा कि भारत में प्राचीन काल में देशी गायों की ६० प्रजातियाँ थी जो आज घट कर ३० की सीमा में आ गई हैं। यह अत्यन्त ही चिंता का विषय है।
कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रथम सत्र में डिबेट संस्था के श्री अमिताभ सिंह एवं सुश्री लीना सिंह ने अनुश्रवण मूल्यांकन एवं समंक विश्लेषण की अवधारणा एवं पद्घतियाँ विषय पर अपना प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि कार्यों के अनुश्रवण एवं मूल्यांकन से हमें अपने रास्ते को परखने का मौका मिलता है तथा यह जानने का अवसर मिलता है कि हम उस रास्ते पर ठीक ढंग से चल पा रहे हैं तथा संसाधनों का उचित उपयोग कर पा रहे हैं अथवा नहीं।
अतिथि वक्ता श्री प्रकाश सोलापुरकर ने कहा कि आज ग्रामीण समाज की यह प्रवत्ति बन गई है कि यदि कोई गाँव में आयेगा तो वह कुछ देकर जायेगा। अतः यह आवश्यक है कि जन अभियान परिषद् समाज की इस मानसिकता को बदलने हेतु व्यापक प्रयास करे। किसी भी संस्था को अनुशासित रहने के लिए समय का पालन करना आवश्यक है। प्रबंधन गुरु व चिंतक डॉ. विजय शंकर मेहता ने कहा कि जीवन का स्व प्रबंधन करने से अधिक श्रेष्ठ और कुछ भी नहीं। म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा समाज के मन में गौरव का भाव जागृत करने की आवश्यकता है।
प्रशिक्षण के तीसरे दिन भारतीय सूचना सेवा के सेवानिवृत्त एडीशनल डायरेक्टर जनरल डॉ. विजय अग्रवाल ने संप्रेषण कौशल तथा नेतृत्व कौशल विकास पर अपने विचारों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विगत कुछ दिनों में मिस्त्र तथा टयूनिसिया जैसे राष्ट्रों में राजनैतिक परिवर्तन का आधार इंटरनेट के माध्यम से किया गया संप्रेषण ही है। संप्रेषण कौशल से बड़ी शक्ति इस धरा पर नहीं है। इसी दिन जन अभियान परिषद् की निदेशक परियोजना श्रीमती हेमलता सिंह ने प्रस्फुटन समितियों व नवांकुर संस्थाओं के परिप्रेक्ष्य में मूल्यांकन एवं मापदंड तैयार करने को लेकर जानकारी दी। निदेशक प्रशिक्षण श्रीमती सीमा दीपक ने प्रशिक्षण आयोजन को लेकर विस्तार में बताया।
वरिष्ठ पत्रकार श्री रमेश शर्मा ने संवाद संकलन की विधा तथा उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के आयाम विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संवाद की हमारी योग्यता तीन विषयों पर आधारित होती है जो कि शब्द, उसका अर्थ तथा उसका आशय समझने से संबद्घ होती है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता अपने क्षेत्र का गहन अध्ययन करें तभी उत्कृष्ट संवाद कर सकेंगे। यह आवश्यक है कि हम सिर्फ किताबों से ही नहीं अपितु अपने अनुभव से भी सीख लें। उन्होंने बताया कि एक अच्छा संवाद सकारात्मक एवं समीक्षात्मक होना चाहिए। उन्होंने परिषद् के कार्यकर्ताओं को उत्कृष्ट रिपोर्टिंग की विभिन्न विधाओं से विस्तार पूर्वक परिचित कराया।
प्रशिक्षण के चौथे दिन सेवा निवृत्त हृदय रोग शल्य चिकित्सक डॉ. माधव हरी कान्हरे ने आरोग्य विष पर कहा कि ग्रामवासियों ने ही भारत की संस्कृति की अब तक रक्षा की है। अब समय आ गया है कि ग्रामों के विकास पर भी ध्यान दिया जावे, जिससे देश का विकास सुनिश्चित हो सके। वाल्मी के एसोसिएट प्रोफेसर श्री राजेश पौराणिक तथा शोधार्थी श्री सुमित मेहता द्वारा परियोजना निर्माण एवं बजटिंग विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। उन्होंने कहा कि म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा विभिन्न दानदाता संस्थाओं तथा स्वैच्छिक संगठनों के मध्य सेतु की भूमिका का निर्वहन श्रेष्ठता से किया जा सकता है। उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण में संवाद के माध्यम, प्रतिवेदन के प्रकार, तकनीकी प्रतिवेदन लेखन तथा प्रोजेक्ट प्रपोजल आदि बिन्दुओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा की। श्री जे.एस. राय ने नस्ती संधारण एवं पत्रचार के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण के अंतिम दिन श्री जय चौबे ने वित्तीय औचित्य के मानक सिद्घांत तथा भण्डार क्रय प्रबंधन पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं श्री आर.सी. जैन ने लेखा संबंधी पंजियों का संधारण एवं मासिक व्यय पत्रक को लेकर प्रतिभागियों को अवगत कराया। इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी संभाग व जिला समन्वयकों ने भाग लिया।
नवीन शर्मा
आजीविका के क्षेत्र में जुड़कर स्वैच्छिक संगठन पनी ाजीविका भी च्छे ढंग से चला सकते हैं। साथ ही साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, नशामुक्ति, जल सरंक्षण जैसे कार्यों के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सकता है। जन भियान परिषद् सरकार व स्वयंसेवी संगठनों के बीच सेतु का कार्य करेगा। साथ ही इसे रिसोर्स सेंटर बनाकर योजना ों में स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी सुनिश्च्िात की जा सकती है।
समन्वय से कार्य करें स्वयंसेवी संस्थाएँ : श्री पस्तौर
स्वैच्छिक संगठनों व शासकीय विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के उद्देश्य से रीवा में एक दिवसीय जिला स्तरीय संवाद कार्यशाला का ायोजन किया गया। इस वसर पर मुख्य तिथि रीवा संभागायुक्त डॉ. रवीन्द्र पस्तौर ने कहा कि साझा सामर्थ्य विकसित करते हुए स्वयंसेवी संस्थाएँ व शासकीय विभाग योजना ों के क्रियान्वयन में गति प्रदान करने का कार्य करें। जन भियान परिषद् की रीवा जिला ईकाई -ारा ायोजित इस कार्यशाला में श्री पस्तौर ने कहा कि मिलकर कार्य करने से कार्य धिक सफल होते हैं ौर उनमें स्थिरता भी रहती है। लेकिन जरूरत इस बात की है कि ापस में विश्वास ौर समझ की भावना एक जैसी हो।
उन्होंने स्वयंसेवी संगठनों को पने किसी एक क्षेत्र का चुनाव कर उसमें विह्णासनीयता बनाकर पारदर्शिता व गुणवत्तायुक्त कार्य करने की समझाईश दी। व्यावसायिक व समाजसेवा जैसी दोनों विधा ों में स्वयंसेवी संगठनों का ेकार्य करने की सलाह देते हुए डॉ. पस्तौर ने कहा कि आजीविका के क्षेत्र में जुड़कर स्वैच्छिक संगठन पनी ाजीविका भी च्छे ढंग से चला सकते हैं, साथ ही साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, नशामुक्ति, जल सरंक्षण जैसे कार्यों के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सकता है। संभागायुक्त ने स्वसहायता समूहों के गठन से लेकर उनके सातों चरणों को पूरा करते हुए बाजार से जोड़ने की प्रक्रिया को बताया। उन्होंने स्वयंसेवी संगठनों से पेक्षा की कि वे जिले में इस दिशा में प्रारंभ किये गये कार्यों में ागे ायें ौर ाजीविका से जोड़ने के कार्य में भागीदार बनें। उन्होंने कहा कि जन भियान परिषद् सरकार व स्वयंसेवी संगठनों के बीच सेतु का कार्य करेगा। साथ ही इसे रिसोर्स सेंटर बनाकर योजना ों में स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी सुनिश्च्िात की जा सकती है। संभागयुक्त ने जिले के विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों -ारा किये गये कार्यों की सराहना भी की। इस वसर पर कलेक्टर रीवा श्री जी.पी. श्रीवास्तव ने कहा कि जिले के विकास में स्वयंसेवी संगठन पनी सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग करें। उन्होंने जल संरक्षण, संवर्धन के साथसाथ गाँवों में लोगों को ऊर्जा बचत के लिए प्रेरित करने की बात कही। उन्होंने अभियान चलाकर नशामुक्ति, पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कुपोषण ादि की गाँवगाँव में लख जगाने की जरूरत पर भी बल देते हुए कहा कि इसमें स्वयंसेवी संस्था ों की भूमिका महत्वपूर्ण है। कलेक्टर ने कहा कि यह संस्थाएँ पना पना कार्य चुनकर शासन की विभिन्न योजना ों के क्रियान्वयन में मदद दें, उन्हें शासन स्तर से हर तरह का सहयोग मिलेगा। उन्होंने जिले में लगातार संवाद करने की बात भी कही ताकि शासकीय विभाग व स्वयंसेवी संगठन बेहतर तालमेल के साथ कार्य कर सकें। इससे पूर्व स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनके -ारा विभिन्न क्षेत्रों में किये गये कार्यों की जानकारी दी तथा विभागीय धिकारियों ने विभिन्न योजना ों से वगत कराया। कार्यशाला में जिले के २५ स्वयंसेवी संगठनों के दोदो प्रतिनिधि, न्य शासकीय विभागों के धिकारी, जन भियान के जिला समन्वयक व संभाग के ब्लॉक समन्वयक उपस्थित थे। विष्णु नागर जिला समन्वयक, रीवा, म.प्र. ज.अ.प.
जन और तंत्र के बीच की कड़ी बने जन भियान परिषद् : श्री शिवराज सिंह चौहान
सरकार के कार्यों को जनजन तक पहुँचाने में म.प्र. जन अभियान परिषद् एक बेहतर माध्यम साबित हो रहा है। हमारा प्रयास है कि जन ौर तंत्र के बीच जन भियान परिषद् एक कड़ी के रूप में कार्य करें तथा शासन की विभिन्न योजना ों के क्रियान्वयन में महती भूमिका का निर्वहन करें। यह बात मुख्यमंत्री एवं जन भियान परिषद् के ध्यक्ष श्री शिवराज सिंह चौहान ने २६ मई २०१० को मध्यप्रदेश जन भियान परिषद् के तत्वावधान में रविन्द्र भवन भोपाल में ायोजित जिला एवं विकासखण्ड समन्वयकों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम के वसर पर मुख्य तिथि के रूप में कही। इस वसर पर सांसद श्री निल माधव दवे व संभागायुक्त भोपाल श्री मनोज श्रीवास्तव उपस्थित थे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमें एक नया म.प्र. बनाना है। म.प्र. को बीमारू राज्यों की श्रेणी से अलग करना है, उसकी छवि राष्ट्र में बनाना है इसके लिए जन भियान परिषद् है। मुझे मुख्यमंत्री हुए साढ़े चार वर्ष हो गए हैं, मैं पने प्रदेश का विकास कर रहा हूँ लेकिन यह तब तक नही होगा जब तक गाँवगाँव का हर नागरिक इस विकास में योगदान नहीं देगा। जन भियान परिषद् के माध्यम से जनजन में जन जागृति फैलाना है। जनता को जागरूक करना, उन्हें इस और प्रेरित करना है तभी यह सब संभव होगा। इसके लिए मैं गाँवो में भ्रमण करता हूँ और आओ अपना म.प्र. बनायें और म.प्र. यात्रा का नारा लेकर चलता हूँ । यह यात्रा हम पूरी गंभीरता के साथ कर रहे हैं। राजनीतिक दलों ने हम सबकी मानसिकता को प्रभावित किया है। दलों का कहना है कि हमें वोट दो हम आपके सभी काम करवायेंगे ये सभी काम सरकार करेगी यहाँ तक कि हम आपको रोटी का निवाला भी तोड़कर आपके मुँह में डालेंगे, यह मानसिकता गलत है। मेरा पहला उद्देश्य म.प्र. को बनाना है इसके लिए समाज को जागरूक करके खड़ा करना होगा। आपको म.प्र. के प्रतिनिधि के रूप में गांवगांव में जाकर मेरा यह संदेश पहुँचाना है और उन्हें जागृत करने के कार्य को सुचारू रूप से करवाना है और उनसे कहना है कि आप कुछ मत करो मात्र पना गांव बना लो, गर एकएक गांव में पना भियान होगा ौर गांव का विकास होगा तो मेरा यह लक्ष्य स्वर्णिम म.प्र. बनाना पूरा हो जायेगा। यह कार्य मैं आप सभी जन भियान परिषद् के सदस्यों को सौप रहा हूँ। गांवगांव में जाकर हमें पने लक्ष्यों को पूरा करवाना है इसके लिए पहले हमें खुद कुछ करना होगा तब जाकर ापको लोग भी सहयोग करेंगे। ऐसा नही कि हम खुद नशा करें और दूसरों को यह सलाह दें कि हमें नशा नही करना चाहिये। आप गांवो में जाएगें तो आपको कई व्यक्ति आपकी भावना और अपके लक्ष्यों के विपरीत मिलेंगे और आपकी आलोचना भी करेंगे लेकिन ऐसा नही है। बहुत से ऐसे लोग भी मिलेंगे जो आप के साथ काम करना शुरु कर देंगे। आज भी मुझे यह याद है कि पने गांव में यदि किसी के यहाँ बारात आती थी तो ऐसा लगता था कि पूरे गांव वालों के यहाँ बारात आई हुई है। सब व्यक्ति उसका सहयोग करते थे। जब बेटी की विदाई होती थी तो पूरा गांव आता था और सभी मिलकर डोली उठाते थे ऐसा लगता था कि किसी व्यक्ति विशेष की बेटी की विदाई नहीं हो रही है, बल्कि पूरे गांव की बेटी की विदाई हो रही है। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि हम सभी को सामूहिक रूप से मिलकर किसी कार्य को अंजाम देना चाहिये। ये भाव भारत की माटी में, भारत के गांवों में, भारत के जनजन में है। जन अभियान परिषद् के कार्यकर्ताओ को भी यही काम करना है। उन लोंगो से सामूहिकता के माध्यम से काम करवाना है। उनमें जागृति पैदा करना है। उन्हें गाथाएँ सुनाकर, बताकर प्रेरित करना है। आप लोगों को म.प्र. बनाओ के लक्ष्यों को लेकर समितियाँ बनानी होगी और इनका क्रियान्वयन करना होगा। मैं यह मानता हूँ कि गर आप ऐसा करने में सक्षम हो गए तो जरूर हमारा लक्ष्य पूरा होगा। आप लोगों ने जो भी काम किया है जैसा कि मुझे ज्ञात हुआ सी.एफ.एल. गांव, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण आदि वह निश्चित रूप से सराहनीय हैं। काम कैसा भी हो चाहे वह साधारण हो या साधारण लेकिन ऐसा कोई काम नही है जिसे हम न कर सकें। आप समस्त जन अभियान परिषद् के कार्यकर्ता अगर मेरा साथ देने का वादा करें तो हम सभी कार्यों को क्रियान्वित करते हुए अपने म.प्र. का विकास कर सकते हैं। मुझे भीड़ की जरूरत नहीं है। मुझे आप जैसे समाजसेवियों की जरूरत है। एक तो मैं खुद में हरदम सुधार की प्रक्रिया जारी रखता हूँ। हमें पनी कमियों को ढ़ूंढ़ना होगा और उनमें सुधार करना होगा। हमें गाँवों का भ्रमण करना है वहां पर पनी योजना का क्रियान्वयन करवाना है। यदि आपके पास हौसला एवं उत्साह नहीं है तो आप कुछ नहीं कर पाएंगे। मैं कभी इंदौर जाता हूँ तो कभी सीधी। ऐसी गर्मी में मेरा कहीं न कहीं का भ्रमण जरूर होता है लेकिन मेरे अन्दर उत्साह होने के कारण मुझे इतनी गर्मी का आभास नहीं होता है। मुझे तो टी.वी. चैनलों के माध्यम से ही जानकारी मिलती है कि तापमान इतना रहा। कहने का तात्पर्य यह है कि यदि हमारा मन उत्साह से भरा हुआ है, हममें कुछ करने की क्षमता है तो हमारे शरीर पर किसी भी प्रकार का कोई भी सर नहीं पड़ने वाला है। मन में संकल्प होने चाहिए यदि आपके संकल्प मजबूत हैं तो आप कुछ भी कर सकते हैं। यदि सभी व्यक्ति पना काम जिम्मेदारी के साथ करें तो विकास हो सकता है यदि डाक्टर, इंजीनियर, अध्यापक, कर्मचारी, किसान, पंच, सरपंच जो जिसका काम है, वह सब बेहतर ढंग से करें तो एक बेहतर विकास हो सकता है। जन अभियान परिषद् के कर्मचारी होने के नाते हमें इन सभी को पने कर्तव्यों से वाकिब करवाना होगा, इन्हें प्रेरित करना है तभी हमारा संकल्प पूरा हो सकता है। आज मैं आप लोगों के बीच कह रहा हूँ कि मैं म.प्र. बनाओ भियान आप लोगों के सहयोग से चाहता हूँ। मैं यह चाहता हूँ कि आप जनता और सरकार के मध्य एक कड़ी का काम करें। आप हमारे लक्ष्यों को लेकर चलें और उनका क्रियान्वयन सही दिशा से करवायें
1:- स्कूल चलें अभियान
बच्चा बच्चा स्कूल जाना चाहिए इसके लिए हमें प्रयास करना होगा, प्रवेश के दिन हमें जुलूस लेकर गाँवों में भ्रमण करना होगा और सभी को बताना होगा कि विद्यालय में पने बच्चों का प्रवेश करवायें। उनको शिक्षा से संबंधित हर सुविधाएं मुहैया करवाये।
2:-पानी बचाओ अभियान
पानी बचाने का काम भी आप लोगों को ही करना होगा। पानी कैसे बचे, पानी का स्तर कैसे ऊंचा हो, तालाबों में पानी कैसे रुके इसके लिए आपको यह तय करना होगा कि यह काम किस प्रकार से हो।
3:-वृक्ष लगाओ अभियान
वृक्ष लगाओ भियान को चलाना है तथा सभी व्यक्तियों को यह सूचित करना है कि प्रतिवर्ष एक वृक्ष अवश्य लगायें और उसकी सुरक्षा भी करें।
4:-समग्र स्वच्छता के अभियान
समग्र स्वच्छता अभियान के अंतर्गत शौचालयों, सड़क, नाली का निर्माण करवाना है। गाँव वालों को स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक करना है।
5:-नशा मुक्ति अभियान
नशा मुक्ति अभियान अंतर्गत लोगों की मानसिकता बदलनी होगी । आपको प्रयास करना है कि आपका गाँव कैसे नशा मुक्त हो जाये।
6:-ऊर्जा बचाओ अभियान
ऊर्जा बचाओ अभियान के अंतर्गत बिजली की चोरी रोकना, सी.एफ.एल. के माध्यम से ऊर्जा बचत एवं लोगों की मानसिकता में बदलाव लाकर यह काम करना होगा।
7:-योजनाओं का लाभ जनता तक पहुँचाने का अभियान
जो भी योजनाएँ सरकार द्वारा चल रही है उनका लाभ जनता तक पहुँच रहा है या नहीं इसकी निगरानी करना, इन योजनाओं का क्रियान्वयन करना, और उनका लाभ जनता तक पहुँचाना है। हमें जनता और सरकार के मध्य एक कड़ी के रूप में काम करना है इस प्रकार हम म.प्र. को समाज के माध्यम से बना सकते हैं।

कौन कहता है कि आसमान में सुराग नहीं होता।
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों॥
इससे पहले कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सांसद श्री अनिल माधव दवे ने कहा कि मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् के सदस्य कर्मचारी नहीं बल्कि कार्यकर्ता हैं जो सामूहिकता, सहभागिता और सामंजस्य के साथ पने कार्यों का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् के उद्देश्य और क्रियाकलापों में कार्यकर्ता पनी मेहनत, लगन और कर्तव्य परायणता से जुटे हैं। अगले सत्र में उपजिलाध्यक्ष श्री सुधीर कोचर ने कहा कि लक्ष्य निश्चित होने चाहिए तथा मनुष्य जीवन मूल्य है इसका सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ता के व्यक्तित्व, कृतित्व
और जीवन शैली पर प्रकाश डाला। इस मौके पर म.प्र. जन अभियान परिषद् के उपनिदेशक श्री गिरीश जोशी ने ब्लॉक, जिला व संभाग समन्वयकों की सहभागिता से २०१०११ के लिए जन अभियान परिषद् का वार्षिक कलेण्डर एवं लक्ष्य निर्धारित किए। कार्यशाला में संभागायुक्त भोपाल श्री मनोज श्रीवास्तव ने प्रभावी तरीके से अपने सुदीर्घ नुभव के अधार पर उपस्थित समन्वयकों को मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि आज सरकार एवं स्वैच्छिक संस्थाओ के बीच विश्वास की कमी है, इसी खाई को मिटाना है। इस अवसर पर जन अभियान परिषद् का मैदानी मामला, राज्य कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।
स्वैच्छिक संगठनों की क्षमतावृद्घि तथा
प्रत्याययन के संदर्भ में राष्ट्रीय कार्यशाला
प्रदेश के विकास में स्वैच्छिक संगठनों की महती भूमिका : श्री राधवजी भाई
स्वैच्छिक संगठन ही वह कड़ी हैं जो जनता और सरकार के बीच माध्यम का कार्य करते हैं। इनके बगैर न तो जनता को सरकारी योजनाओ का सही लाभ मिल सकता है और न ही सरकारी योजनाओ का सही क्रियान्वयन हो सकता है। किसी भी क्षेत्र में स्वयंसेवी संगठनों के बगैर विकास की परिकल्पना साकार नहीं हो सकती। यह बात वित्त योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री एवं जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष श्री राघवजी भाई ने ७ जून २०१० को स्वैच्छिक संगठनों की क्षमतावृद्घि तथा प्रत्यययन के संबंध में अयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के शुभारंभ पर मुख्य तिथि के रूप में कही। श्री राघव जी भाई ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे स्वैच्छिक संगठनोंकी क्षमता वृद्घि और उनके बीच बेहतर समन्वय की अवश्यकता है ताकि वे शासन के साथ सहयोग कर विकास योजनाओ के बेहतर क्रियान्वयन में सक्रिय रूप से भागीदार बन सकें। हमारे देश में संस्कृति के उदय के साथ ही स्वैच्छिक दृष्टि साकार हो गई थी। लोग स्वैच्छिकता, सामुदायिकता और सहभागिता से कार्य करने लगे थे। बहुत सारे क्षेत्रों में स्वैच्छिक संगठन माध्यम का कार्य कर रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, धर्म आदि में स्वैच्छिक संगठन अपनी महती भूमिका निभाकर सेवाभावी मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक संगठनों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। जनता का नजरिया बदलता जा रहा है वह अब सरकारी तंत्र पर कम निर्भर रह रहे हैं। यह कार्य स्वैच्छिक संगठनों के बदौलत हो रहा है। सरकार अकेले प्रदेश के विकास का सपना साकार नहीं कर सकती इसके लिए स्वैच्छिक संगठनों की भूमिका हम है। इन्हीं प्रयासों की कड़ी में जन अभियान परिषद् जोड़ने का कार्य कर रही है। विकास कार्यों को करने में जनता बड़ी शक्ति है, उनका उपयोग विकास के रास्ते पर होना चाहिए। आज जरूरत ऐसे स्वैच्छिक संगठनों की है जो कार्यों में रुचि रखने वाले हो क्योंकि सेवाभावी स्वैच्छिक संगठन से कार्यक्षमता और उत्पादकता भी बढ़ जाती है। आज देश में कई संगठन अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रदेश, शहर, गाँव स्तर के हैं जो अपने बलबूते पर समाज सेवा के नेक काम कर रहे हैं। हमें इनसे प्रेरणा लेकर और लोगों को प्रेरित कर स्थानीय कार्यों में लगाना है। योजना, आर्थिक एवं साख्यिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री के. सुरेश ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य स्वैच्छिक संगठनों का श्रेणीकरण करना, मैदानी स्तर पर उनके द्वारा महसूस की जा रही कठिनाइयों को जानना, सरकार के साथ उनका संवाद स्थापित करना और संगठनों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है। कार्यशाला के निष्कर्षों के अधार पर इन संगठनों की समस्याओ का समाधान किया जाएगा। इस अवसर पर राज्य योजना अयोग के सलाहकार श्री मंगेश त्यागी ने कार्यशाला की अवधारण, उद्देश्य एवं कार्य की अपेक्षाओ को लेकर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्याययन बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। क्षमता वृद्घि के लिए लगातार आगे भी कार्यक्रम होते रहेंगे। स्वयंसेवी संगठनों और सरकार के बीच सहभागिता विकसित करने का यह आरंभिक प्रयास है। श्री त्यागी ने कहा कि हर एजेंसी की पनी शक्ति होती है। इन संगठनों की शक्ति को शासन की शक्ति से जोड़कर योजनाओ का बेहतर परिणाम हासिल करना ही इस कार्यशाला का उद्देश्य है। गांव में स्त्रोत व्यक्ति तैयार किये जायेंगे जो विकेन्द्रीकृत नियोजन, सामाजिक अंकेक्षण, अनुश्रवण तथा मूल्यांकन के काम में मदद करेंगे। अतः प्रशिक्षण द्वारा जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर विभिन्न विषयों से संबंधित स्त्रोत व्यक्तियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो पायेगी।
प्रथम सत्र
प्रथम सत्र में श्री हर्ष जेटली, मुख्य कार्यपालन अधिकारी वॉलेन्ट्री एसोसिएशन नेटवर्क ऑफ़ इंडिया नई दिल्ली ने स्वयंसेवी संगठनों की क्षमतावृद्घि की चुनौतियाँ एवं अपेक्षाएँ विषय पर स्वैच्छिक संगठनों का राष्ट्रीय परिदृश्य रखते हुए स्वयंसेवी संगठनों को कार्य करने में आ रही समस्याओ, भविष्य की चुनौतियों, शासन व समाज की अपेक्षाओ तथा स्वयंसेवी क्षेत्र की प्रभावशीलता एवं उत्पादकता बढ़ाने को लेकर पने विचार रखे। उन्होंने छोटे स्तर पर अच्छे कार्य करने वाले स्वैच्छिक संगठनों को बढ़ावा देने, स्वैच्छिक संगठनों की वैधानिकता के प्रश्नों का समाधान करते हुए सामुदायिक मूल्यांकन व नुश्रवण के लिए अच्छे स्वयंसेवी संगठनों को प्रोत्साहित करने तथा सुव्यवस्थित प्रत्याययन करने पर जोर दिया। इसी सत्र में वन संरक्षक श्री चितरंजन त्यागी ने माईक्रोप्लानिंग एवं सामुदायिक भागीदारी के विषय में बताया। उन्होंने कहा कि योजना को स्थानीय भाषा में कैसे पहुंचाए, यह महत्वपूर्ण है। राज्य स्तर, जिला स्तर, जनपद स्तर एवं ग्राम स्तर के बीच सूचनाओं का अदान प्रदान सरलता से होना अवश्यक है। विकास के क्षेत्र में कार्य करने वाले कार्यकर्ता की क्या भूमिका हो? एवं उसे किन समस्याओ का सामना करना पड़ता है यह स्पष्ट किया।
कार्यशाला का खुला सत्र
कार्यशाला के खुले सत्र की अध्यक्षता करते हुए श्री श्याम बोहरे ने परियोजना प्रस्ताव, प्रतिवेदन लेखन, प्रस्तुतिकरण, समस्याओ का आंकलन , विषयों पर स्वयंसेवी संगठनों के प्रशिक्षण की अवश्यकता को बताया।
जीम प्रेम जी फाउण्डेशन उत्तराखण्ड के राज्य प्रमुख श्री नंत गंगोला ने ज्ञान, वृति, कौशल, सूचना प्रबंधन तथा स्थानीय अवश्यकता व वैश्विक परिदृश्य में तालमेल पर प्रशिक्षण की अवश्यकता बताई।
यू.एन.डी.पी. के राज्य प्रतिनिधि श्री शैलेष नायक ने वित्तीय संसाधनों का संकलन, व्यवसायिक क्षमता वृद्घि, स्वयंसेवी संगठनों को कार्य करने हेतु विस्तृत क्षेत्र पर प्रशिक्षण की अवश्यकता पर बल दिया।
उपरोक्त सत्र में स्वयंसेवी संस्थाओ के प्रतिनिधियों द्वारा स्वयंसेवी क्षेत्रों में प्रशिक्षण की अवश्यकता पर अपने अपने सुझाव व्यक्त किये गये।
प्रतिनिधियों के सुझाव :
म.प्र. में स्वयंसेवी क्षेत्रों की डायरेक्ट्री बनाई जाना चाहिए। स्वयंसेवी संस्था अपने दायित्वों का निर्वहन समाज हित में करें।
:-श्रीमती अर्चना बाजपेयी, राज्य संसाधन केन्द्र इन्दौर
संस्था अपने प्रभाव से परियोजनाएँ लेकर आती है पर क्रियान्वयन नहीं होता। उनकी क्षमता वृद्घि हो, प्रशासकीय एवं वित्तीय क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाये।
:- डॉ. श्रीमती जनक पलटा मगिलियन, बरली गामीण महिला विकास संस्थान इन्दौर
अच्छे कार्य करने वाले समूह को स्वैच्छिक संगठनों के रूप में स्थापित होना चाहिए।
:- श्री सोमकांत उमालकर, सेवा भारती भोपाल
जो स्वैच्छिक संगठन कार्य करने के लिए इच्छुक हैं उन्हें मजबूत बनाया जाये। उनके प्रशिक्षण व वित्त की भी व्यवस्था हो।
:- श्री जी.बी. कर्नाटक, स्वयंसेवी संस्थाएँ महासंघ अध्यक्ष भोपाल
द्वितीय दिवस (८ जून २०१०)
कार्यशाला के दूसरे दिन ८ जून २०१० से कार्यशाला में उपस्थित स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने म.प्र. के स्वैच्छिक संगठनों के प्रत्याययन के विषय पर चर्चा की व सुझाव रखे। इस दौरान स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए ऐसी व्यवस्था और प्रक्रिया निर्धारित करने का प्रयास किया गया जिससे स्वयंसेवी संगठनों की ग्रेडिंग, उनके संरचनात्मक स्वरूप व जमीनी प्रभाव का सतत् मूल्यांकन हो सके। प्रथम सत्र में विषय प्रवर्तन करते हुए समर्थन संस्था भोपाल के श्री योगेश कुमार ने कहा कि हम प्रत्याययन के मापदण्ड तय करें, इसे जवाबदेही व पारदर्शिता के तहत देखें। यह स्वसंचालित स्वैच्छिक संगठनों की क्षमता वृद्घि के लिए उपयोगी हो।
परिचर्चा में उभरकर आया कि स्वैच्छिक संगठनों को मूल्यांकन, मानकों पर खरे उतर कर कार्य करने की जरूरत है। इस अवसर पर क्रेडिबिलिटी एलायंस नई दिल्ली की सुश्री कंचन तुली ने स्वैच्छिक संगठनों का प्रत्याययन, उसकी अवश्यकता, प्रक्रिया और चुनौतियों को लेकर प्रस्तुतिकरण के माध्यम से विस्तार में जानकारी दी।
प्रतिनिधियों के सुझाव :
1:-पहले संस्थाओं का प्रत्याययन हो फिर क्षमतावृद्घि पर कार्य किया जाये। समाज के निर्माण में स्वैच्छिक संगठनों की महती भूमिका है। प्रत्याययन को लेकर सूचक क्या होगा, इसका दर्शन स्पष्ट कर संस्था चुनी जाये। इससे फर्जी संस्थाएँ स्वतः लग हो जायेंगी।
श्री अनंत गंगोला,अजीम प्रेम जी फाउण्डेशन
उत्तराखण्ड के राज्य प्रमुख
2:-हम बड़े मूल्यों के साथ जुड़े हैं, हम उन मानकों को तय करें जो हमारे लिये सार्थक उपयोगी व क्रेडिबिलिटी को सिद्घ करें। हम अपने जमीनी नुभवों से विकास की दिशा में कार्य को बेहतरीन बनाने में सक्रिय योगदान दे सकते हैं।
श्री शैलेष नायक, यू.एन.डी.पी. भोपाल
3:-म.प्र. भौगोलिक विविधता वाला प्रदेश है यहाँ स्वैच्छिक संगठनों को क्षेत्रवार कार्य में आने वाली अनेक समस्याएँ हैं। प्रत्याययन प्रक्रिया में तकनीकी मुद्दों के कारण स्वयंसेवी संगठनों की स्वैच्छिकता की भावना को ठेस न पहुँचे। वे अपने परिवेश व क्षेत्र के लिए जो कार्य करना चाहती हैं इस उद्देश्य को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
श्री योगेश राठौर, शोध संस्था भोपाल
4:-सबसे महत्वपूर्ण है स्वैच्छिक संगठनों की ग्रेडिंग करने के पीछे क्या नीयत है। ग्रेडिंग में कमजोर संस्थाओं को बाहर न कर पहले उनकी क्षमता संवर्धन पर कार्य किया जाना चाहिए।
श्री सुनील चतुर्वेदी, विभावरी देवास
5:-म.प्र. की स्वयंसेवी संस्थाओं को तुलनात्मक दृष्टि से कम कार्य मिलता है। यदि सूचकों के अधार पर प्रत्याययन हो तो प्रदेश की संस्थाएँ प्रशिक्षित होंगी और वे राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर स्थिति में पहुँचेगी।
श्री सोमकांत उमालकर, सेवा भारती भोपाल
6:-स्वैच्छिक संगठनों को धारा २७, २८ के तहत नियमित बैठकें लेना चाहिए। कार्यालय, वित्त की औपचारिकताएँ पूर्ण कर नियमों के अनुसार चले अन्यथा पेरशान होना पड़ता है। हम रचनात्मक कार्य करते हैं, सरकार के साथ सवाल भी खड़ा करते हैं अतः हमें खुद को साबित करना होगा।
श्री अरूण त्यागी, ग्राम सुधार समिति सीधी
7:-क्षमतावृद्घि के लिये होने वाला प्रत्याययन संस्थाओं के कार्यों के अधार पर होना चाहिए।
श्री सुबोध ताम्रकार, रूरल इन्वायरनमेंट डेवलपमेंट
सोसायटी सागर
8:-जमीनी स्तर पर कार्य कर सही संस्थाओं को विशेष महत्व देना चाहिए।
श्री श्याम बोहरे, भोपाल
9:-प्रत्याययन की प्रक्रिया सरल हो इसमें स्वैचिछकता की आत्मा न खो जाये, लोग गुणवत्तापूर्ण विश्लेषण की क्लिष्टता से डर न जाये।
श्री राजेश देशमुख, परियोजना प्रबंधक
सम्पर्क मध्यप्रदेश, झाबुआ
10:-जो संस्थाएं सक्षम नहीं हैं उन्हें सक्षम बनाया जाये ताकि छोटी संस्थायें न छूटे।
डॉ. एस.एम. हसन, युनाइटेड रिफार्मस आर्गेनाईजेशन भोपाल
कार्यशाला के द्वितीय सत्र में चार विषयों सत्यापन प्रपत्रों का निर्धारण, ग्रेडिंग प्रक्रिया के सूचक, राज्य स्तर से ग्राम स्तरीय प्रक्रिया व चरण तथा जमीनी स्तर पर सत्यापन के सूचक एवं प्रक्रिया पर समूह बनाकर कार्य हुआ। प्रत्याययन से जुड़े इन विषयों का समूहों ने प्रस्तुतिकरण दिया।
अंतिम दिवस ९ जून २०१०
राष्ट्रीय कार्यशाला के अंतिम दिन स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने समुदाय अधारित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण की अवश्यकता, समस्या व समाधान पर चर्चा की। कार्यशाला में पैनल की ध्यक्षता करते हुए डॉ. एस.पी. शर्मा, आयुक्त, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय म.प्र. ने कहा कि आवश्यकताओ व क्षमताओ का आंकलन और वर्तमान तकनीकी ज्ञान की जानकारी प्राप्त कर क्षमतावृद्घि की जा सकती है। सामाजिक अंकेक्षण सामुदायिक स्थिति प्राप्त करने का उपयुक्त तरीका है।
स्वैच्छिक संगठन व सरकारी तंत्र सामंजस्य व समग्रता से कार्य कर समुदाय की क्षमतावृद्घि कर सकते हैं।
दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट की डॉ. श्रीमती नंदिता पाठक ने समुदाय आधारित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण वर्तमान परिदृश्य एवं चुनौतियाँ विषय पर प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि हम सबसे पहले अपनी भूमिका पहचान कर कार्य को समाज के लिए उपयोगी बनाये। लोगों में संवेदना, दर्द, परस्पर पूरकता विकसित की जाए तो कार्यक्रम का क्रियान्वयन जल्दी होगा, हम साथ आये , साथ बैठें, साथ सोचें, साथ योजनाएं बनाएं, साथ कार्य कर समाधान तक पहुँचे। अनुश्रवण व मूल्यांकन प्रबंधन का उपकरण है। क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के अधार पर स्वैच्छिक संगठनों को कार्य करना चाहिए। गाँव की जरूरतों को ध्यान में रखकर कार्य करेंगे तो स्थानीय लोगों की सहभागिता भी होगी और परिणाम भी सार्थक निकलेंगे। श्रीमती पाठक ने दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा ५०० गाँवों में किये गये विकास एव सामुदायिक, मूल्यांकन व अनुश्रवण का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वैच्छिक संगठन भयविहीन होकर आगे बढ़ेंगे तो उनकी क्षमतावृद्घि भी होगी और मूल्यांकन भी बेहतर होगा।
कार्यशाला में वन संरक्षक श्री चितरंजन त्यागी ने कहा कि विकेन्द्रीकृत ग्राम योजना में आवश्यक है कि स्वैच्छिक संगठन हर समुदाय और गाँव की जरूरत के अनुसार कार्य करें। यदि गाँव की आवश्यकतानुसार कार्य किया गया तो भविष्य में सामंजस्य बैठाने में पेरशानी नहीं होगी। ग्राम समुदाय अपने किये गये कार्यों का अनुश्रवण व मूल्यांकन कर सकेंगे।
कार्यशाला में उपस्थिति प्रतिनिधियों का मानना था कि आज के परिदृश्य में सबसे बड़ी चुनौती लोगों के बीच सामंजस्य बैठाने की है। विकास की योजनाओ और कार्यों को जरूरतमंदों तक पहुँचाना आवश्यक है, तभी स्वैच्छिक संगठन के प्रयास सार्थक होंगे।
प्रतिनिधियों के सुझाव :
1:- मानव संसाधन के उचित प्रयोग से उन्हें स्वैच्छिक संगठनों को प्रोत्साहित व उद्वेलित करने की आवश्यकता है।
श्री संदीप नायक, एड् एट् एक्शन भोपाल
2:-सामुदायिक अनुश्रवण व मूल्यांकन में सबसे अवश्यक है सामुदायिकता का भाव जाग्रत हो जिसके चलते लोग सामूहिक रूप से चिंतन कर निर्णय व क्रियान्वयन की प्रक्रिया में बराबरी से भागीदार हो सकें।
श्री कौशलेश मिश्रा, अध्यक्ष विजय लक्ष्मी शिक्षा समिति, रीवा
3:-परियोजना प्रस्तार व सरल स्वरूप में तैयार किया जाना चाहिए। स्वैच्छिक संगठनों की योजना निर्माण में आरंभ से भागीदारी हो।
श्री बालेन्दु शुक्ल, महासचिव पर्यावरण संरक्षण संघ, छतरपुर
4:-कानूनी औपचारिकताओ की जानकारी, रिर्पोंटिंग, डाक्यूमेन्टेशन और प्रस्तुतिकरण की क्षमता का विकास हो।
श्री मनोज जोशी, एम.पी.वी.एच.ए., इन्दौर
5:-शहरी झुग्गीझोपड़ी क्षेत्रों में भी सामाजिक अंकेक्षण की अवश्यकता है।
डॉ. एस.एम. हसन, यूनाइटेड रिफार्मस अर्गेनाइजेशन भोपाल
6:-समाज का स्वत्व परम्परा में परिवर्तित कर समुदाय को भागीदार बनाया जाये।
श्री योगेश शास्त्री, सहजीवन समिति शहडोल
7:-जन अभियान परिषद् स्वयंसेवी क्षेत्र को एक पाँचवें स्तम्भ के रूप में स्थापित करने का अधार प्रतीत हो रहा है। इस संवाद से एक साँझे मंच की उत्पत्ति हुई है।
श्री अनंत गंगोला, जीम प्रेम जी फाउण्डेशन
उत्तराखण्ड के राज्य प्रमुख
समापन सत्र
समापन सत्र के मुख्य अतिथि थे राज्यसभा सांसद व पर्यावरणविद् श्री अनिल माधव दवे व अध्यक्षता श्री श्याम बोहरे ने की। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि श्री अनिल माधव दवे ने कहा कि हिन्दुस्तान में अनादिकाल से स्वैच्छिक भाव रहा है। हमें मूल दिशा को समझना होगा। यह देश एक परिवार है, यह एकात्म राष्ट्र है। जन संगठनों को भारत, भारतीयता व भारतीय वैभव को समझना होगा, एकात्म के बिना दिशा नहीं मिल सकती। भारतीय मूल के साथ एकात्म होकर ही दिशा तय की जा सकती है। हम प्रकृति के प्रति अपना कर्त्तव्य निभाएं। आपसी सामंजस्य, सकारात्मक भाव, मन में संतोष के साथ कार्य करें। गाँव के विकास की योजना स्थानीय लोग, गाँव की आवश्यकता, उपलब्धता व संसाधन के आधार पर बनायें। स्थानीय स्वयंसेवी संगठन अपने क्षेत्र की समस्याओ से परिचित होते हैं वे क्षेत्र के अनुरूप समाधान के उपकरण खड़े कर सकते हैं। अतः स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओ को अपने क्षेत्र के गाँव व गाँव में रहने वाले समाज को खड़ा करना होगा। यदि स्वयंसेवी संगठनों की दृष्टि में स्पष्टता होगी तो व्यवस्था ठीक हो जायेगी।
श्री दवे ने बताया कि, म.प्र. जन अभियान परिषद् स्वयंसेवी संगठनों के लिए नीति निर्माण कर रही है और इसके क्रियान्वयन को लेकर कार्य योजना बनाई जा रही है। यह कार्य योजना सकारात्मक रूप से लागू हो इसके लिए स्वैच्छिक संगठन साथ में आये और इस दिशा में आगे बढ़ें। हम सब मिलकर उद्देश्य को लक्ष्य तक पहुचायेंगे। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवी संगठनों के सेवा भावी आन्दोलन में ८५ प्रतिशत लोग प्रामाणिकता से लगे हैं। इस देश की चिंता करने वाले करोड़ों सेवा क्षेत्र के लोग दूर दराज तक फैले हैं। विकास को लेकर संघर्ष जरूर है लेकिन उम्मीद है परिणाम सकारात्मक होंगे और यह सब आप लोगों की प्रतिबद्घता से ही संभव है।
इस अवसर पर स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्वयंसेवी क्षेत्र में आने वाली समस्याओ व पेक्षाओ को लेकर श्री दवे के समक्ष प्रश्न रखे जिसका उन्होंने यथोचित समाधान किया।
इस अवसर पर स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्वयंसेवी क्षेत्र में आने वाली समस्याओ व पेक्षाओ को लेकर श्री दवे के समक्ष प्रश्न रखे जिसका उन्होंने यथोचित समाधान किया।
इस सत्र के अध्यक्ष श्री श्याम बोहरे ने ग्राम सभा को कार्य करने में आने वाली परेशानियों को लेकर ग्राम सभा के स्वरूप व क्रियान्वयन की विसंगतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। श्री बोहरे ने बताया कि ग्राम सभा लोकतंत्र की प्रत्यक्ष इकाई है। ग्राम के कार्य, बजट, पंचायत का विकास, सामाजिक अंकेक्षण व निगरानी के सभी अधिकार ग्राम सभा को है अर्थात वैधानिक व अधिनियम के रूप में ग्राम सभा मजबूत है लेकिन फिर भी प्रदेश के ५२ हजार गाँवों में ग्राम सभा को सक्रिय करना हमारे लिये चुनौती का विषय है। इसके लिये सबसे बड़ी अवश्यकता हैं अधिनियमों की सरलीकृत भाषा में व्याख्या हो, जिसे गाँव का व्यक्ति समझ सके । कार्यशाला का संचालन शोध संस्था भोपाल के श्री योगेश राठौर ने तथा अभार प्रदर्शन म.प्र. जन अभियान परिषद् के भोपाल संभाग समन्वयक श्री अमिताभ श्रीवास्तव ने किया।
कार्यशाला में देश भर के स्वैच्छिक संगठनों के ४५ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें सेवा क्षेत्र के विशेषज्ञों व प्रतिनिधियों ने स्वयंसेवी संस्थाओं की ग्रेडिंग, क्षमतावृद्घि, विकेन्द्रीकृत नियोजन, समंक विश्लेषण, समुदाय आधारित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण तथा सामाजिक अंकेक्षण को लेकर चर्चा की। देश के इन अनुभवी प्रतिनिधियों ने स्वयंसेवी संस्थाओ की ग्रेडिंग हेतु पारदर्शी प्रक्रिया मापदण्ड तथा क्षमतावृद्घि हेतु रणनीति तैयार की तथा स्वैच्छिक संगठनों के प्रत्याययन को लेकर अपने विचार रखे व प्रारूप तैयार किया। उल्लेखनीय है कि स्वयंसेवी संगठनों के सुदृढ़ीकरण व सुचारू कार्य संचालन के लिए १२ क्टूबर २००९ को मुख्यमंत्री निवास पर स्वैच्छिक संगठनों की पंचायत का अयोजन किया गया था। पंचायत में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने म.प्र. जन अभियान परिषद् के माध्यम से प्रदेश में कार्यरत स्वैच्छिक संगठनों का प्रत्याययन कर उनकी क्षमतावृद्घि करने के लिए १ करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की थी। इसी घोषणा के तारतम्य में जन अभियान परिषद् द्वारा राज्य योजना अयोग के सहयोग से परियोजना का क्रियान्वयन किया जाना है। इस परियोजना में १२५० स्वयंसेवी संस्थाओ की पहचान तथा ग्रेडिंग कर उनकी क्षमतावृद्घि की जायेगी। यह कार्यशाला परियोजना के क्रियान्वयन में स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने का अरंभिक प्रयास है।
रंजना चितल
हिन्दुस्तान में अनादिकाल से स्वैच्छिक भाव रहा है। हमें मूल दिशा को समझना होगा। यह देश एक परिवार है, यह एकात्म राष्ट्र है। जन संगठनों को भारत, भारतीयता व भारतीय वैभव को समझना होगा, एकात्म के बिना दिशा नहीं मिल सकती। भारतीय मूल के साथ एकात्म होकर ही दिशा तय की जा सकती है। विकास को लेकर संघर्ष जरूर है लेकिन उम्मीद है परिणाम सकारात्मक होंगे
और यह सब आप लोगों की प्रतिबद्घता से ही संभव है।
श्री अनिल माधव दव
नए मध्यप्रदेश निर्माण में
स्वैच्छिक संगठनों का समागम
किसी भी समाज, प्रांत अथवा देश के विकास में स्वैच्छिक संस्थाओ की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। स्वैच्छिक संस्थाएं लोक से जुड़ी होती हैं। लोकहित के मुद्दों पर कार्य करती हैं। स्थानीय संसाधन, स्थानीय आवश्यकताओ के अनुरूप कार्य प्रणालियाँ विकसित करती हैं, इसीलिये प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वैच्छिक संगठनों की क्षमता, समर्पण व क्रियाशीलता को अंगीकार करते हुए नये विकसित मध्यप्रदेश निर्माण में जनजन को जोड़ने के लिये स्वैच्छिक संस्थाओ के सहयोग का आह्वान किया। विकास के संकल्प को अयाम देने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने १२ अक्टूबर २००९ को मुख्यमंत्री निवास पर स्वैच्छिक संगठनों की पंचायत बुलाई।
दिनांक १२ अक्टूबर २००९ को अयोजित स्वैच्छिक संगठनों
की पंचायत में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा मध्यप्रदेश के नवनिर्माण में संपूर्ण समाज की सहभागिता के लिए स्वैच्छिक संगठनों का सहयोग लिया जाएगा। स्वैच्छिक संगठन बेहतर ढंग से कार्य कर सकें इस उद्देश्य से उनकी समस्याओ का निराकरण करते हुए उन्हें बढ़ावा दिया जाएगा।
नए मध्यप्रदेश का निर्माण केले सरकार द्वारा संभव नहीं है। समाज में गहरे से व्याप्त इस भावना को दूर करना होगा कि सरकार सब करेगी। राज्य सरकार द्वारा स्वैच्छिक संस्थाओ के सहयोग से मध्यप्रदेश बनाओ अभियान संचालित किया जाएगा। स्वैच्छिक संस्थाएँ प्रदेश के प्रत्येक नागरिक में कर्त्तव्यबोध जागृत करने में सहयोग प्रदान करेगी। इससे विकास का नया वातावरण बनेगा।''
वित्त, योजना आर्थिक व सांख्यिकी मंत्री एवं म.प्र. ज.अ.प. के उपाध्यक्ष श्री राघवजी ने इस अवसर पर कहा कि स्वैच्छिक संगठनों को बढ़ावा देने से कार्यों का संचालन बेहतर ढंग से हो सकेगा। सांसद श्री अनिल माधव दवे ने कहा कि पूरी दुनिया में कार्य करने की नयी संस्कृति विकसित हो रही है, जिसमें स्वैच्छिक संगठनों की प्रभावी भूमिका होगी। प्रदेश के स्वैच्छिक संगठनों को भी प्रदेश के विकास में योगदान देने आगे आना चाहिए।
प्रारंभ में तत्कालीन प्रमुख सचिव योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग श्री देवेंद्र सिंघई ने स्वैच्छिक संगठनों की पंचायत के आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वैच्छिक संस्थाओ की इस पंचायत का उद्देश्य है कि स्वैच्छिक संस्थाओ के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करके उनके अनुभवों, सुझावों एवं प्रस्तावों को ध्यान में रख कर हम मध्यप्रदेश के विकास में आप सबकी भूमिका को मजबूती प्रदान करें। मध्यप्रदेश को एक आधुनिक एवं विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए राज्य में ऐसा वातावरण विकसित करना है कि शासकीय एवं गैर शासकीय सभी लोग अपना भरपूर सहयोग प्रदान कर सकें।''
सामाजिक विकास एवं बदलाव लाने में स्वैच्छिक संस्थाओं की अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वैच्छिक संस्थाएँ स्वतंत्र रूप से लोकहित के मुद्दों पर कार्य करती हैं। स्थानीय स्तर पर कार्य करते हुए संस्थाएँ नवीन कार्य प्रणालियाँ विकसित करती हैं, इन्हीं छोटे छोटे प्रयोगों से बड़े स्तर पर उपयोग होने योग्य काम करने के तौर तरीके विकसित होते हैं।
म.प्र. में स्वैच्छिक संस्थाओं की क्षमता विकसित करने तथा हर तरह का आवश्यक सहयोग, मार्गदर्शन एवं नेटवर्किंग करने के लिए म.प्र. जन अभियान परिषद् का गठन किया गया है। जन अभियान परिषद् ने प्रदेश, जिलों एवं स्थानीय स्तर पर सक्रिय लगभग ५००० स्वैच्छिक संस्थाओ को पंजीबद्घ किया है। इसी प्रकार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों की स्वैच्छिक सेवा की भावना को विकसित करने के लिए सभी विकासखण्डों में १०१० ग्रामों का चयन कर प्रस्फुटन समितियों का गठन किया है, जो ग्राम स्तर पर सामाजिक संगठन के माध्यम से विकास के कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
इस पंचायत में प्रदेश में कार्यरत लगभग १५०० स्वैच्छिक संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् द्वारा प्रदेशभर में गठित प्रस्फुटन समितियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर योजना आर्थिक, सांख्यिकी एवं वित्त मंत्री श्री राघवजी, कृषि मंत्री श्री रामकृष्ण कुसमरिया, स्वास्थ्य मंत्री श्री अनूप मिश्रा, सहकारिता मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री जगन्नाथ सिंह तथा सांसद एवं जन अभियान परिषद् के प्रेणता श्री अनिल माधव दवे उपस्थित थे।
पंचायत में भाग लेने आए प्रदेश के विभिन्न स्थानों के स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कागजी कार्रवाई कम करने, छोटे स्थानीय संगठनों को शासकीय विभागों के कार्य देने, शासन में एक ही स्थान पर पंजीकरण की सुविधा, नई संस्थाओ के कार्य, जिला स्तर पर निगरानी, स्पष्ट नीति का निर्धारण, धिकार पत्र देने, रोजगार गारंटी योजना के क्रियान्वयनमें स्वैच्छिक संगठनों को भागीदार बनाने, सद्भावना बढ़ाने, नैतिक शिक्षा जैसे कार्यों की जिम्मेदारी संगठनों को देने, संस्थाओ से कार्यानुभव की अपेक्षा कम करते हुए कार्य का अवसर देने और
सुविधा, नई संस्थाओ के कार्य, जिला स्तर पर निगरानी, स्पष्ट नीति का निर्धारण, अधिकार पत्र देने, रोजगार गारंटी योजना के क्रियान्वयन गारंटी की निवार्यता समाप्त करने तथा कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का दायित्व स्वैच्छिक संगठनों को देने के सुझाव दिये।
कार्यशाला का विस्तृत विवरण
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