म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा 18 नवम्बर 2011 को प्रदेश के स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कार्यक्रम का आयोजन । म.प्र. जन अभियान परिषद् की शासी निकाय की बैठक माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान की अध्यक्षता में दिनांक 29.03.2011 को सम्पन्न । • • • प्रदेश के स्वैच्छिक संगठनों की क्षमता वर्धन हेतु प्रत्येक जिले में से 25-25 स्वयंसेवी संगठनों का चयन किया जाकर प्रशिक्षण कार्यशालाएँ सम्पन्न |
 
स्वैच्छिक संगठनों का संवाद -२०११,समाज का उद्धार, जन-जन भागीदार १८ नवम्बर २०११ को शासकीय गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बरखेड़ा, जंबूरी मैदान के पास, भोपाल में।

कार्यक्रम तीन खण्डों में प्रथम खण्ड- भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी व मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह चौहान का उद्‌बोधन ।
द्वितीय खण्ड- प्रतिभागियों के वेल्यू एडिशन के लिए उद्‌देश्य अनुरूप प्रबोधन एवं साहित्य विवरण ।
तृतीय खण्ड- सांस्कृतिक कार्यक्रम ।


म.प्र.जन अभियान परिषद् के भोपाल एवं ग्वालियर संभाग के विकासखण्ड समन्वयकों की आधारभूत प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दिनांक 19.04.2011 से 23.04.2011 तक एवं जबलपुर, रीवा, एवं सागर संभाग का आयोजन दिनांक 26.04.2011 से 30.04.2011 एन.आई.टी.टी.टी.आर भोपाल में आयोजन ।

म.प्र. जन अभियान परिषद् की शासी निकाय की बैठक माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान की अध्यक्षता में दिनांक 29.03.2011 को सम्पन्न ।

सात संभागो भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, रीवा और जबलपुर में प्रस्फुटन समितियों के साथ संभाग स्तरीय सम्मलेन का आयोजन |

डॉ. अजय शंकर मेहता जी और श्री प्रदीप पांडे जी ने संभाला जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष का दायित्व |

 

 
प्रशिक्षण कार्यक्रम

प्रदेश के हर गाँव में जन अभियान परिषद्‌ का काम दिखेगा : श्री राघवजी भाई


आने वाले पाँच वर्षों में प्रस्फुटन समिति के माध्यम से संपूर्ण प्रदेश परिषद्‌ का कार्यस्थल बन जायेगा। मैदानी स्तर पर परिषद्‌ के कार्यों की प्रमाणिकता इस बात से परिलक्षित होती है कि जिला कलेक्टर एवं कमिश्नर परिषद्‌ द्वारा दी जानकारी को ज्यादा विह्णासनीय मानने लगे हैं। जल्द ही प्रदेश के हर गाँव में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ का काम दिखने लगेगा।



मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद्‌ समाज में एक अलग पहचान वाली संस्था बने यही सबका लक्ष्य होना चाहिए। हर जिले में परिषद्‌ प्रभावी ढंग से कार्य कर पाये इसलिए न्यूनतम आवश्यक मैदानी अमला खड़ा कर लिया जा चुका है जिसमें राज्य कार्यालय के साथ ही संभाग, जिला तथा विकासखण्ड समन्वयक एवं प्रतिवर्ष १० प्रस्फुटन ग्राम प्रति विकासखण्ड के हिसाब से ६२६० प्रस्फुटन समितियाँ सम्मिलित हैं। आने वाले पाँच वर्षों में प्रस्फुटन समिति के माध्यम से संपूर्ण प्रदेश परिषद्‌ का कार्यस्थल बन जायेगा। मैदानी स्तर पर परिषद्‌ के कार्यों की प्रमाणिकता इस बात से परिलक्षित होती है कि जिला कलेक्टर एवं कमिश्नर परिषद्‌ द्वारा दी जानकारी को ज्यादा विह्णासनीय मानने लगे हैं। जल्द ही प्रदेश के हर गाँव में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ का काम दिखने लगेगा। यह बात वित्त, योजना आर्थिक व सांख्यिकी मंत्री एवं म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के उपाध्यक्ष श्री राघव जी भाई ने म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन अवसर पर कही।
उन्होंने बताया कि राज्य में अंत्योदय मेले आरंभ किये गये हैं जिसमें जिले भर के हितग्राहियों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा अपने कार्यों को इतना व्यापक बनाया जावेगा कि भविष्य में राज्य शासन को इस प्रकार के अंत्योदय मेलों को आयोजित करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय चिन्तन में, रक्त में स्वैच्छिक जन भागीदारी की सोच व समझ है। आज आवश्यकता इस बात की है कि इन संस्कारों को पुनः जागृत किया जाये तथा लोगों को विकास कार्यों हेतु प्रेरित किया जाये। समाज में स्वैच्छिकता से विकास कार्य कर रहे स्वैच्छिक संगठनों तथा व्यक्तियों का चिन्हांकन कर उसकी क्षमता को बढ़ाना जन अभियान परिषद्‌ का प्रमुख कार्य है। इसीलिए प्रदेश में जन अभियान परिषद्‌ को स्वयंसेवी संगठनों का शीर्ष संगठन भी कहा जाता है। श्री राघवजी भाई ने जन अभियान परिषद्‌ के कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, जन्म मृत्यु दर, कुपोषण की समस्या के निराकरण में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करें। बिजली चोरी रोकने, वृक्षारोपण करने, जैविक खेती को प्रोत्साहन देने तथा गौ वंश संरक्षण हेतु अग्रणी भूमिका निभायें। श्री राघवजी भाई ने बजट में घोषणा की है कि जिस गाँव में बिजली चोरी या अन्य कारणों से बिजली से होने वाला अपव्यय १० प्रतिशत से कम रहा तो उस गाँव को एक लाख का पुरूस्कार दिया जायेगा।



उल्लेखनीय है कि म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा ७ से ११ मार्च २०११ तक शारदा विहार, केरवा बांध मार्ग, भोपाल में संभाग एवं जिला समन्वयकों का पाँच दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण आयोजित किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को स्वैच्छिक संगठन के विज़न, मिशन, रणनीति तथा परिणाम आधारित मूल्यांकन, स्व प्रबंधन, संप्रेषण कौशल, नेतृत्व कौशल, परियोजना निर्माण एवं बजटिंग, संवाद संकलन की विधा, उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के आयाम, वित्तीय औचित्य के मानक सिद्घांत, भण्डार क्रय एवं प्रबंधन, लेखा संबंधी पंजियों का संधारण, मासिक व्यय पत्रक, यात्रा देयक नियम, ओँडिट तथा नस्ती संधारण एवं पत्राचार विषयों पर क्षमता वर्धन करना था। कार्यक्रम का उद्‌घाटन म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के उपाध्यक्ष डॉ. जय शंकर मेहता तथा श्री प्रदीप पाण्डेय द्वारा किया गया।
शुभारंभ अवसर पर जन अभियान परिषद्‌ के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ समाज के उत्थान हेतु कार्य कर रहा है तथा इसके कार्यकर्ता संस्था के माध्यम से समाज कार्य से जुड़े हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान विगत तीन वर्षों में किये गये कार्यों का सिंहावलोकन करें तथा यह विचार करें कि हम समाज की आशाओं पर खरे उतरे अथवा नहीं। आज हमारा कार्य लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अतः आवश्यकता इस बात की है कि हम हमारी सूझबूझ वाले कार्यकर्ता तैयार करें जिससे कार्य की जिम्मेदारी उनसे साझा की जा सके।
इस अवसर पर म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के उपाध्यक्ष डॉ. जय शंकर मेहता ने जन अभियान परिषद्‌ के विजन, मिशन तथा रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विजन स्टेटमेंट की विशेषताओं, मिशन निर्धारण के तत्वों तथा रणनीति निर्धारण के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जन अभियान परिषद्‌ द्वारा प्रस्फुटन समितियों के माध्यम से समाज को नेतृत्व देने का प्रयास किया जा रहा है। जिस कारण समाज में परिषद्‌ के प्रति भावनात्मक लगाव उत्पन्न हुआ तथा समाज परिषद्‌ से जुड़ गया है। अतः यह आवश्यक है कि हम कार्य के प्रति समर्पण रखे तथा प्रतिष्ठा पर ध्यान दें।



म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के उप निदेशक श्री गिरीश जोशी ने परिणाम आधारित प्रबंधन एवं लॉजिकल फ्रेमवर्क अप्रोच विषय पर विचार रखे। शारदा विद्या मंदिर के प्रबंधक श्री विलास गोड़े ने कहा कि भारत में प्राचीन काल में देशी गायों की ६० प्रजातियाँ थी जो आज घट कर ३० की सीमा में आ गई हैं। यह अत्यन्त ही चिंता का विषय है।
कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रथम सत्र में डिबेट संस्था के श्री अमिताभ सिंह एवं सुश्री लीना सिंह ने अनुश्रवण मूल्यांकन एवं समंक विश्लेषण की अवधारणा एवं पद्घतियाँ विषय पर अपना प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि कार्यों के अनुश्रवण एवं मूल्यांकन से हमें अपने रास्ते को परखने का मौका मिलता है तथा यह जानने का अवसर मिलता है कि हम उस रास्ते पर ठीक ढंग से चल पा रहे हैं तथा संसाधनों का उचित उपयोग कर पा रहे हैं अथवा नहीं।
अतिथि वक्ता श्री प्रकाश सोलापुरकर ने कहा कि आज ग्रामीण समाज की यह प्रवत्ति बन गई है कि यदि कोई गाँव में आयेगा तो वह कुछ देकर जायेगा। अतः यह आवश्यक है कि जन अभियान परिषद्‌ समाज की इस मानसिकता को बदलने हेतु व्यापक प्रयास करे। किसी भी संस्था को अनुशासित रहने के लिए समय का पालन करना आवश्यक है। प्रबंधन गुरु व चिंतक डॉ. विजय शंकर मेहता ने कहा कि जीवन का स्व प्रबंधन करने से अधिक श्रेष्ठ और कुछ भी नहीं। म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा समाज के मन में गौरव का भाव जागृत करने की आवश्यकता है।
प्रशिक्षण के तीसरे दिन भारतीय सूचना सेवा के सेवानिवृत्त एडीशनल डायरेक्टर जनरल डॉ. विजय अग्रवाल ने संप्रेषण कौशल तथा नेतृत्व कौशल विकास पर अपने विचारों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विगत कुछ दिनों में मिस्त्र तथा टयूनिसिया जैसे राष्ट्रों में राजनैतिक परिवर्तन का आधार इंटरनेट के माध्यम से किया गया संप्रेषण ही है। संप्रेषण कौशल से बड़ी शक्ति इस धरा पर नहीं है। इसी दिन जन अभियान परिषद्‌ की निदेशक परियोजना श्रीमती हेमलता सिंह ने प्रस्फुटन समितियों व नवांकुर संस्थाओं के परिप्रेक्ष्य में मूल्यांकन एवं मापदंड तैयार करने को लेकर जानकारी दी। निदेशक प्रशिक्षण श्रीमती सीमा दीपक ने प्रशिक्षण आयोजन को लेकर विस्तार में बताया।
वरिष्ठ पत्रकार श्री रमेश शर्मा ने संवाद संकलन की विधा तथा उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के आयाम विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संवाद की हमारी योग्यता तीन विषयों पर आधारित होती है जो कि शब्द, उसका अर्थ तथा उसका आशय समझने से संबद्घ होती है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता अपने क्षेत्र का गहन अध्ययन करें तभी उत्कृष्ट संवाद कर सकेंगे। यह आवश्यक है कि हम सिर्फ किताबों से ही नहीं अपितु अपने अनुभव से भी सीख लें। उन्होंने बताया कि एक अच्छा संवाद सकारात्मक एवं समीक्षात्मक होना चाहिए। उन्होंने परिषद्‌ के कार्यकर्ताओं को उत्कृष्ट रिपोर्टिंग की विभिन्न विधाओं से विस्तार पूर्वक परिचित कराया।
प्रशिक्षण के चौथे दिन सेवा निवृत्त हृदय रोग शल्य चिकित्सक डॉ. माधव हरी कान्हरे ने आरोग्य विष पर कहा कि ग्रामवासियों ने ही भारत की संस्कृति की अब तक रक्षा की है। अब समय आ गया है कि ग्रामों के विकास पर भी ध्यान दिया जावे, जिससे देश का विकास सुनिश्चित हो सके। वाल्मी के एसोसिएट प्रोफेसर श्री राजेश पौराणिक तथा शोधार्थी श्री सुमित मेहता द्वारा परियोजना निर्माण एवं बजटिंग विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। उन्होंने कहा कि म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा विभिन्न दानदाता संस्थाओं तथा स्वैच्छिक संगठनों के मध्य सेतु की भूमिका का निर्वहन श्रेष्ठता से किया जा सकता है। उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण में संवाद के माध्यम, प्रतिवेदन के प्रकार, तकनीकी प्रतिवेदन लेखन तथा प्रोजेक्ट प्रपोजल आदि बिन्दुओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा की। श्री जे.एस. राय ने नस्ती संधारण एवं पत्रचार के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण के अंतिम दिन श्री जय चौबे ने वित्तीय औचित्य के मानक सिद्घांत तथा भण्डार क्रय प्रबंधन पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं श्री आर.सी. जैन ने लेखा संबंधी पंजियों का संधारण एवं मासिक व्यय पत्रक को लेकर प्रतिभागियों को अवगत कराया। इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी संभाग व जिला समन्वयकों ने भाग लिया।


नवीन शर्मा

स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमतावृद्घि हेतु जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला

प्रदेश के विकास में स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयंसेवी संस्थाओं के क्षमता वर्धन की घोषणा की थी। तदानुसार राज्य योजना आयोग तथा म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों की कौशल वृद्घि करने एवं संस्थाओं के आंतरिक प्रबंधन में उत्कृष्टता लाने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में से २५२५ स्वैच्छिक संगठनों के २२ प्रतिनिधियों को विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण, समुदाय आधारित मूल्यांकन एवं अंनुश्रवण, सामाजिक अंकेक्षण एवं समंक विश्लेषण के सन्दर्भ में प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य राज्य स्तर पर बड़ी मात्रा में इन विषयों से संबंधित विषय विशेषज्ञ तैयार करना था। प्रशिक्षण के अंतिम दिवस प्रशिक्षणार्थियों को क्षेत्र भ्रमण करवाकर कार्य के व्यवहारिक पक्ष व स्थानीय समस्याओं से अवगत कराया गया। प्रस्तुत है संभागवार फोटो फीचर्स :-

विकास के लिए साध्य, साधन तथा संसाधन का तालमेल आवश्यक :- श्री दवे

द्रभारत में विकेन्द्रीकृत सामाजिक व्यवस्था अति पुरातन है। पहले यहाँ कृषि विकसित थी, व्यापार, उद्योगधंधे समृद्घ थे, शिक्षा का स्तर ऊँचा था, लोग सुखी थे क्योंकि कार्य की, व्यवहार की मूल वधारणा भारतीय चिंतन था। हमें इस पक्ष पर विचार करना होगा। विकास के लिए साध्य, साधन तथा संसाधन तीनों में तालमेल होना आवश्यक है।


भारत में विकेन्द्रीकृत सामाजिक व्यवस्था अति पुरातन है। पहले यहाँ कृषि विकसित थी, व्यापार, उद्योगधंधे समृद्घ थे, शिक्षा का स्तर ऊँचा था, लोग सुखी थे क्योंकि कार्य की, व्यवहार की मूल अवधारणा में भारतीय चिंतन था। हमें इस पक्ष पर विचार करना होगा। विकास के लिए साध्य, साधन तथा संसाधन तीनों में तालमेल होना आवश्यक है।'' यह बात राज्य सभा सांसद श्री अनिल माधव दवे ने मध्यप्रदेश जन भियान परिषद्‌ तथा राज्य योजना आयोग के तत्वावधान में प्रदेश की स्वयंसेवी संस्थाओ के क्षमता वर्धन के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर कही।
३० सितम्बर २०१० से २ अक्टूबर २०१० तक प्रशासन अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में श्री दवे ने कहा कि जन अभियान परिषद्‌ स्वयंसेवी संगठनों के मूल चिंतन के लिए प्रतिबद्घ है। प्रशिक्षणार्थियों से अपेक्षा है कि वे विचारों को निर्णय में परिवर्तित करें। विकेन्द्रीकृत नियोजन को लेकर श्री दवे ने कहा कि विकेन्द्रीकरण एक ऐसी कुंजी है जिसके माध्यम से सारा काम किया जा सकता है। इसमें योजना ठीक से बने, क्रियान्वयन बेहतर हो तभी परिणाम सामने आ सकते हैं। समाज की भूमिका को लेकर श्री दवे ने कहा कि विकास में समाज की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। स्वयंसेवी संस्थाओ के माध्यम से उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जाये। हमारी संकल्पना, सोच, समझ भारतीय हो तभी कार्य को सही दिशा मिलेगी।
कार्यक्रम के अध्यक्ष राज्य योजना आयोग के सलाहकार श्री मंगेश त्यागी ने कहा कि राज्य योजना आयोग ने गत वर्ष खरगोन, राजगढ़, छतरपुर, सतना और मण्डला जिलों में विकेन्द्रीकृत नियोजन का कार्य किया है जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं। आज कार्य का स्वरूप तैयार है, इस प्रयोग के आधार पर विकेन्द्रीकृत योजना प्रणाली को इस वर्ष से संपूर्ण प्रदेश में लागू किया जायेगा। विकेन्द्रीकृत नियोजन के बारे में जानकारी देते हुए श्री त्यागी ने कहा कि इसमें स्वयंसेवी संगठनों की महती भूमिका हो सकती है। चूंकि जन अभियान परिषद्‌ स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि के रूप में है, अतः जन अभियान का मैदानी अमला विकास दूत का कार्य कर सकता है। उन्होंने विकेन्द्रीकृत नियोजन को विस्तार में बताया तथा ग्राम योजना और वार्ड योजना की जानकारी देते हुए कहा कि योजना, ग्राम से जनपद और जनपद से जिले में आयेगी, इस तरह विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण में गाँव के लोग अपनी आवश्यकता के अनुरूप ग्राम विकास की योजना में भागीदार होंगे। शहरी क्षेत्र में वार्ड स्तर पर स्थानीय लोगों की आवश्यकता के आधार पर योजना बनेगी। वार्ड से नगरीय निकाय और फिर जिले में जिला योजना समिति के पास पहुँचेगी।
इससे पूर्व जन अभियान परिषद्‌ के कार्यपालक निदेशक श्री धीरेन्द्र चतुर्वेदी ने कार्यशाला के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री आवास पर १२ अक्टूबर २००९ को हुई पंचायत में मुख्यमंत्री जी द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं के क्षमता वर्धन की घोषणा की गई थी, जिसके परिपालन में प्रत्येक जिल से २५२५ स्वयंसेवी संस्थाओं का चयन किया जाकर पूरे प्रदेश के १२५० स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमतावृद्घि की जाएगी। इस तारतम्य में यह तीसरी बार कार्यशाला आयोजित की जा रही है, जिसमें स्वयंसेवी संस्थाओं से विकेन्द्रीकृत नियोजन, सामाजिक अंकेक्षण, समुदाय आधारित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण एवं समंक विश्लेषण विषयों पर प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षकों को तैयार किया जाना हैं ताकि क्षमता सम्पन्न स्त्रोत व्यक्तियों की जिला स्तर पर उपलब्धता सुनिश्चित हो जाए। इस प्रशिक्षण के बाद इस प्रकार की कार्यशालाएँ जिला स्तर पर आयोजित की जाएँगी।


प्रथम सत्र :

कार्यशाला में यूनीसेफ के श्री ऋषिराज ने विकेन्द्रीकृत नियोजन की आवश्यकता और अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि विकेन्द्रीकृत नियोजन में लोगों की सहभागिता आवश्यक है। आरम्भिक प्रयास में यूनिसेफ, यू.एन.डी.पी. के सहयोग से जिला कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा एकीकृत जिला योजना म.प्र. के पाँच जिलों खरगोन, राजगढ़, सतना, छतरपुर तथा मण्डला में अपनाई गई। विकेन्द्रीकृत नियोजन का मतलब लोगों की आवाज है। इसकी आवश्यकता इसलिए है ताकि स्थानीय लोग योजना बनाने में भागीदारी कर सके और बेहतर ढंग से समझ सके। प्लान केवल प्लान तक सीमित न रहे इसका ठीक से क्रियान्वयन हो तथा उसका मूल्यांकन एवं अनुश्रवण भी ठीक से हो। उन्होंने जिला स्तर तक की संस्थाओं का संरचनात्मक ढांचा भी प्रस्तुत किया। जिसके लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र पर आधारित विकेन्द्रीकृत नियोजन के लिए एक मेकेनिज़म बनाया है जिसे टेक्नीकल सपोर्ट ग्रुप कहते हैं।

द्वितीय सत्र

गरीबी उन्मूलन और नीति सहायता इकाई राज्य योजना आयोग के श्री योगेश माहोर ने विकेन्द्रीकृत नियोजन प्रणाली, विकेन्द्रीकृत नियोजन के लिए विभिन्न स्तरों पर गठित समितियों, उप समितियों की संरचना एवं कार्य की जानकारी देते हुए बताया कि नेतृत्व बजट सीलिंग, मूल्यांकन एवं अनुश्रवण, ग्रामीण नियोजन, बजट का आंकलन, संसाधनों का आंकलन, जनपद को मार्गदर्शन, विभागों द्वारा क्रियान्वयन तथा समेकन की जिम्मेदारी जिला नियोजन समिति की होगी। टेक्नीकल सपोर्ट ग्रुप का मुख्य कार्य ६ क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करना तथा योजना निर्माण में तकनीकी सहयोग देना है। ग्राम पंचायत द्वारा आवश्यक वातावरण निर्माण करना एवं सूचना देना, प्रस्तावों को ग्राम पंचायत में भेजना, समाहित कराना, ग्राम सभा में अनुमोदित कार्य का समेकन एवं अनुमोदित करना। ग्राम विकास समिति के मुख्य कार्य अधिकतम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना, विचार विमर्श करना, उपेक्षित वर्ग को समाहित करना एवं प्रस्तुतिकरण करना है।


तृतीय सत्र :

वरिष्ठ सलाहकार श्री श्याम बोहरे ने स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमतावृद्घि करने वाले प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण का अर्थ, भूमिका व कार्य पद्घति के बारे में विस्तार से बताया।



कार्यशाला का दूसरा दिन
प्रथम सत्र :

प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन विषय विशेषज्ञों ने गहन प्रशिक्षण दिया।
विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण में स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी बढ़ाने और उनके क्षमतावर्धन के लिये प्रशिक्षकों को दिये जाने वाले प्रशिक्षण में यू.एन.डी.पी. के शैलेष नायक ने योजना निर्माण को लेकर विस्तार से बताते हुए कहा कि यदि हम तर्कपूर्ण कार्य करेंगे तो परिणाम सही आयेंगे। श्री नायक ने योजना निर्माण की आवधारणा, जिले की समस्याएँ, आवश्यकताएँ, कमजोरी और चुनौतियों के विश्लेषण की प्रक्रिया को स्पष्ट किया।
द्वितीय सत्र
वरिष्ठ सलाहकार श्री श्याम बोहरे ने कहा कि प्रशिक्षण का आधार वह उद्देश्य है, जिसके लिए प्रशिक्षण दिया जाना है। अतः उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए क्योंकि उद्देश्य को हासिल करने के लिये ही विषय वस्तु का चयन किया जाता है। विषय वस्तु सरल से कठिन, ज्ञात से ज्ञात, मूर्त से मूर्त हो। उन्होंने विषय वस्तु के प्रस्तुतीकरण की बारीकियों को बताते हुए कहा कि प्रस्तुतिकरण साफ, स्पष्ट और सरल हो। श्री बोहरे ने व्याख्यान और समूह चर्चा में प्रशिक्षक की भूमिका भी स्पष्ट की।
इसी सत्र में समर्थन के श्री चंचल मोदी ने विकेन्द्रीकृत जिला नियोजन प्रणाली में नगरीय योजना निर्माण की प्रक्रिया और विभिन्न चरणों की जानकारी दी। उन्होंने नगर की समस्या के आधार पर नियोजन की प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया को समझाया तथा योजना निर्माण में जन भागीदारी प्रोत्साहित करने के उपाय बताये। श्री विशाल नायक ने ग्रामीण योजना निर्माण से संबंधित ग्राम की नियोजन प्रक्रिया के निम्न प्रमुख चरणों पर चर्चा की :


  • यदि जरूरत हो तो ग्राम नियोजन समिति का गठन।
  • ग्रामसभा में दृष्टिकोण पर जानकारी एवं मुददों की पहचान।
  • चिन्हित समूहों की पहचान।
  • पृथकपृथक समूहों में ग्राम की समस्याओं का प्राथमिकीकरण एवं न्य कार्यक्रमों में उनके संभावित समाधानों की पहचान।
  • समूहों से निकली प्राथमिकता के आधार पर कार्यक्रमों को जोड़कर योजना निर्माण।
  • ग्राम सभा में सुझावों का समावेश एवं ग्राम सभा का अनुमोदन प्राप्त करना।
  • ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सभाओं के नियोजनों का समेकन एवं औपचारिक दस्तावेजों को जनपद पंचायत में प्रस्तुत करना।
  • ग्राम पंचायतों की कार्ययोजनाओं का जनपद/जिला पंचायत स्तर पर समेकन। श्री नायक ने नियोजन प्रक्रिया में बेहतर भागीदारी को प्रोत्साहित करने के निम्न उपाय सुझाए :
  • समय रहते बैठक की तारीखें निर्धारित करना।
  • सूचनाओं का मुद्रण और व्यापक प्रसार व वितरण
  • बेहतर उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए, पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधियों को प्रोत्साहित करना,
  • विशेष हितधारक समूहों जैसे स्वयं सहायता समूह, पालक शिक्षक संघ आदि को शामिल करना।
  • स्वयं सेवकों द्वारा घरों के दौरे।
  • विचारविमर्श इत्यादि के लिए ग्राम सभा को छोटे समूहों (वार्ड सभा) में विभक्त करना।
  • नागरिकों को उनकी दिक्कतें बांटने का अवसर मुहैया कराना, चाहे वे ग्रामसभा की बैठकों में उपस्थित रहते हो या नहीं।

उन्होंने विषय को स्पष्ट करते हुए बताया कि विकेन्द्रीकृत नियोजन की सरलता है कि लोगों द्वारा बनी योजना अपनी योजना कहलाएगी जिससे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। ग्रामवासियों की आवाज को गतिविधियों में लायें, पात्र हितग्राही को लाभ मिले ऐसे प्रयास हों। इसी सत्र में समर्थन के ही श्री विशाल नायक ने ग्रामीण योजना निर्माण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की जानकारी दी तथा ग्राम की समस्या के आधार पर नियोजन की प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया को समझाया। साथ ही नियोजन प्रक्रिया में जन भागीदारी प्रोत्साहित करने के उपाय बताये।


चतुर्थ सत्र :स्वास्थ्य विभाग के डॉ. अजय खरे ने समुदाय आधारित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण का अर्थ, आवश्यकता एवं विभिन्न चरणों की जानकारी दी तथा समुदाय आधारित अनुश्रवण की विधियों को समझाया।


कार्यशाला का तीसरा दिन
प्रथम सत्र :यू.एन.डी.पी. के श्री विशाल नायक ने ग्रामीण एवं नगरीय योजना समेकन के लिए संबंधित प्रपत्रों पर चर्चा की एवं प्रपत्रों से संबंधित प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने नगरीय एवं ग्रामीण योजना बनाने के व्यवहारिक पक्ष को स्पष्ट करने के लिए प्रशिक्षणार्थियों की सात टीम वनवाई तथा प्रत्येक टीम को एक वार्ड एवं एक ग्राम की केस स्ट्‌डी दी। जिसका अध्ययन करके टीमों ने क्षेत्रवार समस्याएं निकाली, समस्याओं का प्राथमिकीकरण कर समाधान निकाले तथा प्रस्तुतिकरण दिया।
द्वितीय सत्र : समर्थन के श्री अविनाश झाड़े ने सामाजिक अंकेक्षण विषय को बहुत ही सहज और सरल तरीके से प्रतिभागियों के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने सामाजिक अंकेक्षण का अर्थ, उद्देश्य, आवश्यकता एवं प्रक्रिया पर प्रकाश डाला एवं उदाहरणों द्वारा स्पष्ट किया कि सामाजिक अंकेक्षण के द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पोषण, आजीविका, अधोसंरचना प्रबंधन, ऊर्जा, ईंधन तथा वैकल्पिक ऊर्जा, नागरिक अधिकार संरक्षण इत्यादि क्षेत्रों के बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
तृतीय सत्र :योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के आयुक्त डॉ. एस.पी. शर्मा ने सामाजिक फायदे एवं कीमत विश्लेषण पर चर्चा की जिसमें उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट पर प्रत्यक्ष एवं प्रत्यक्ष प्रभाव होते हैं तथा प्रोजेक्ट की मांग हमेशा आय, व्यवसाय एवं शिक्षा के आधार पर उत्पन्न होती है। जहां भिन्नताएं अधिक होती हैं वहां सैम्पल साईज बड़ा लेना चाहिए और जहां कम होती है वहां सेम्पल साईज छोटा लेना चाहिए।
वन विभाग के वन संरक्षक श्री चितरंजन त्यागी ने प्रशिक्षणार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए बताया कि सर्वप्रथम लक्ष्य स्पष्ट हो, प्रशिक्षकों की भूभ्मिका स्पष्ट हो तथा प्राथमिकता निर्धारित हो कि किस प्रकार दक्षता निर्मित करनी है, तभी हम चुनौतियों का सामना कर पाएंगे। उन्होंने विकेन्द्रीकृत नियोजन में स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि स्वयंसेवी संस्थाओं की पैठ जमीनी स्तर तक होती है। वे समुदाय को प्रोत्साहित कर सही दिशा दिखाने में सक्षम होते हैं।


स्वयंसेवी संगठनों की क्षमता वृद्घि के संबंध में विकासखण्ड समन्वयकों का संभाग स्तरीय प्रशिक्षण

म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ अन्तर्गत स्वयंसेवी संगठनों की क्षमता वृद्घि के संबंध में १४ अगस्त २०१० को उज्जैन संभाग के विकासखण्ड समन्वयकों की संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला उज्जैन में सम्पन्न हुई। कार्यशाला का शुभारंभ श्री एस.सी. गुप्ता, संयुक्त संचालक, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, श्री प्रदीप पाण्डे, शासकीय सदस्य म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा किया गया। संभागीय समन्वयक द्वारा कार्यशाला के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। जिसके अन्तर्गत प्रशिक्षणार्थियों से कार्यशाला के उद्देश्य तथा विकासखण्ड समन्वयकों से परियोजना के संदर्भ में अपेक्षा तथा प्राप्त किये जाने वाले परिणामों से अवगत कराया गया। इसके पश्चात्‌ संयुक्त संचालक, श्री एस.सी. गुप्ता ने जिलों में योजना निर्माण तथा ग्रामों में विकेन्द्रीकृत नियोजन की महत्ता से समस्त प्रतिभागियों को अवगत कराया। साथ ही सम्पूर्ण परियोजना में जन अभियान परिषद्‌ की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
कार्यशाला में उपस्थित म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के शासकीय सदस्य श्री प्रदीप पाण्डे द्वारा अपने उद्‌बोधन में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के कार्यकर्ताओं द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए प्रस्फुटन समितियों की ग्राम विकास में भूमिका तथा ग्रामों की विकेन्द्रीकृत योजना में स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमता वृद्घि हेतु परियोजना का परिचय तथा क्रियान्वयन एवं रणनीति पर उज्जैन जिला समन्वयक श्री मांगीलाल आर्य द्वारा विस्तार से बताया गया। श्री आर्य द्वारा मुख्यमंत्री जी की घोषणा के परिपालन में प्रदेश में १२५० स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमता वृद्घि के लिए म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ एवं पी.एम.पी.एस.यू. राज्य योजना आयोग द्वारा संचालित परियोजना से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी समस्त प्रतिभागियों को दी गई। विकेन्द्रीकृत नियोजन के विषय में श्री बुदा सोलंकी, जिला समन्वयक रतलाम ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ग्रामों में विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण के समस्त चरणों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
उन्होंने विकेन्द्रीकृत नियोजन की अवधारणा तथा क्रियान्वयन एवं चुनौतियों के संदर्भ में विस्तार से जानकारी दी तथा विकेन्द्रीकृत नियोजन की आवश्यकता तथा ग्राम विकास में सम्पूर्ण परियोजना की महत्ता पर प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया। विकेन्द्रीकृत नियोजन में स्वयंसेवी संस्थाओं के चयन एवं रणनीति पर सुश्री पूजा बंधैया जिला समन्वयक, शाजापुर द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें प्रत्येक जिले में ५० स्वयंसेवी संस्थाओं के चयन हेतु बनाई गई रणनीति तथा संस्थाओं के चयन हेतु निर्धारित जिला स्तरीय समिति के स्वरूप एवं संस्थाओं के चयन के लिए अंक निर्धारण प्रक्रिया से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमता वृद्घि में संभाग/जिला/विकासखण्ड समन्वयकों की भूमिका का विस्तृत विवरण श्रीमती तृप्ती बैरागी, जिला समन्वयक मंदसौर द्वारा प्रस्तुत किया गया। जिसके अन्तर्गत स्वयंसेवी संस्थाओं के चयन के लिए प्राप्त आवेदन पत्र एवं सत्यापन प्रपत्रों के परिक्षण के संदर्भ में समस्त प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया। सत्रों का संचालन श्री चेतन अत्रे, जिला समन्वयक नीमच द्वारा किया गया। कार्यशाला के अंत में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के उपनिदेशक श्री गिरीश जोशी ने समुदाय सशक्तिकरण विषय पर प्रशिक्षण दिया। आभार प्रदर्शन संभाग समन्वयक उज्जैन ने किया।



वरूण आचार्य संभाग समन्वयक, उज्जैन, म.प्र. ज. .प.

स्वयंसेवी संगठनों की क्षमता वृद्घि के संबंध में समन्वयकों का प्रशिक्षण

विगत १२ अक्टूबर २००९ को मुख्यमंत्री निवास पर स्वैच्छिक संगठनों की पंचायत का आयोजन किया गया था। इस पंचायत में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि स्वयंसेवी संगठनों की क्षमता वृद्घि की जावेगी। इसके क्रियान्वयन के तहत राज्य योजना आयोग के सहयोग से जन अभियान परिषद्‌ द्वारा ७ से ९ जून २०१० को राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया था। जिसमें राष्ट्रीय स्तर की ४२ स्वयंसेवी संस्थाओं ने भाग लिया व सुझाव रखे। स्वयंसेवी संगठनों की क्षमता वृद्घि आयोजना के संदर्भ में जन अभियान परिषद्‌ के संभाग व जिला समन्वयकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन दिनांक १ अगस्त २०१० को भोपाल में किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा विकेन्द्रीकृत नियोजन, सामजिक अंकेक्षण, समुदाय आधारित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण व समंक विश्लेषण विषयों पर क्षमता सम्पन्न स्त्रोत व्यक्तियों की जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।


स्वयंसेवी संस्थाएँ निश्चित उद्देश्य लेकर काम करती हैं तो उनके परिणाम भी अच्छे होते हैं। इस हेतु उनकी क्षमतावृद्घि आवश्यक है ताकि वह विकास के मुद्‌दों पर शासन के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके यह बात श्री के. सुरेश, प्रमुख सचिव, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, म.प्र. शासन, ने कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कही। उन्होंने कहा कि सबसे पहले शासकीय विभागों के लोगों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। जमीनी स्तर पर लोगों में विश्वास पैदा किया जाए और गाँव के विकास कार्य में हम अपनी भूमिका को पहचानें।
सत्र के आरंभ में जन अभियान परिषद्‌ के उपनिदेशक श्री गिरीश जोशी ने कार्यशाला के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह कार्य म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ तथा राज्य योजना आयोग अर्थात योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के दोनों विभागों को मिलकर करना है। जन अभियान परिषद्‌ का मुख्य कार्य स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमता वृद्घि करना है इसी संदर्भ में प्रत्येक जिले से २५२५ संस्थाओं का तथा प्रदेश स्तर पर ८७,७७० में से १२५० स्वयंसेवी संस्थाओं का चयन कर उनको प्रशिक्षण दिया जायेगा, इस हेतु विकेन्द्रीकृत नियोजन मुख्य मुद्दा है क्योंकि सभी मुद्दे इसी से निकलकर आये हैं। सभी संभाग मिलकर यह कार्य करेंगे जिससे इस प्रक्रिया के द्वारा बेहतर स्वयंसेवी संगठनों को सामने ला पायें।
इस प्रशिक्षण के बाद समन्वयकों से यह अपेक्षा है कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ जिला स्तर पर आयोजित की जाएँ। जिला समन्वयक, संभाग समन्वयक के साथ मिलकर चयन प्रक्रिया, आवेदनों की छटनी, ग्रेडिंग, प्रशिक्षण की कार्य योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभायें तथा विकासखण्ड समन्वयकों का उन्मुखीकरण करें जिससे उनकी परियोजना के संबंध में बेहतर प्रारंभिक समझ बन सके।


प्रथम सत्र के आरंभ में कार्यक्रम के विशेष अतिथि गरीबी उन्मूलन व नीति सहायता इकाई के डॉ. एस.पी. बत्रा ने कहा कि यदि आपकी पहचान बनेगी तो आपको सभी स्वीकार करेंगे तथा हमने जो योजना मिलकर बनाई है उसका क्रियान्वयन आप लोगों के द्वारा ही किया जायेगा। उन्होंने इसी विषय पर चर्चा आगे बढ़ाते हुए बताया कि ग्राम योजना, ग्राम सभा में स्वीकृत हुई हो, जिससे एकीकृत ग्रामीण व शहरी योजना बने जो जिला योजना समिति से स्वीकृत हो तभी विकेन्द्रीकृत नियोजन का मतलब निकलेगा। नीचे से आयी योजना से काम का सही वितरण, संसाधनों का बेहतर उपयोग तथा शासन के विभागों द्वारा गाँव में किस योजना पर काम चल रहा है पता चल सकेगा। तकनीकी सहायता समूह के द्वारा सेक्टर, स्कीम, विभाग एवं एजेन्सी स्तरों पर सर्वे कर पता किया जा सकता है कि कितना विकास हो सका है। स्थानीय स्तर पर प्राथमिकताएँ तय हों उसके पश्चात उन पर अमल हो तभी ठोस चीज निकलकर आ सकेगी। सामाजिक अंकेक्षण को लेकर उन्होंने कहा कि काम ठीक से हुआ कि नहीं इसका ठीक ठीक अवलोकन करना आवश्यक है।
इसी सत्र में युनिसेफ के श्री ऋषिराज ने बताया कि विकेन्द्रीकृत नियोजन का मतलब लोगों की आवाज है इसकी आवश्यकता इसलिए है ताकि स्थानीय लोग योजना बनाने में भागीदारी कर सकें और बेहतर ढंग से समझ सकें। जिसमें स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। प्लान केवल प्लान तक सीमित न रहे इसका ठीक से क्रियान्वयन हो तथा उसका मूल्यांकन एवं अनुश्रवण भी ठीक से हो। श्री ऋषिराज ने प्रेजेन्टेशन द्वारा एकीकृत जिला नियोजन एवं विकेन्द्रीकृत नियोजन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भी उनके द्वारा यूनिसेफ, यू.एन.डी.पी. के सहयोग से एकीकृत जिला परियोजना म.प्र. के पाँच जिलों खरगोन, राजगढ़, सतना, छतरपुर तथा मण्डला में अपनाई गई है। उन्होंने जिला स्तर की संस्थाओं अंका संरचनात्मक ढांचा भी प्रस्तुत किया जिसके लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र पर आधारित विकेन्द्रीकृत नियोजन के लिए एक मेकेनिज्म बनाया है जिसे टेक्नीकल सपोर्ट ग्रुप कहते हैं। विकेन्द्रीकृत नियोजन के लिए एक साफ्टवेयर भी बनाया गया है जिसमें यह कोशिश की गई है कि गाँव का, वार्ड का तथा ब्लॉक का प्लान आप ऑंनलाईन देख सकते हैं। इससे यह पता चलेगा कि विकेन्द्रीकृत नियोजन की आवश्यकता क्यों है? इसके क्या फायदे हो सकते हैं? जिले में संसाधनों की उपलब्धता एवं उनसे संबंधित चुनौतियाँ क्या-क्या हैं?
यू.एन.डी.पी. के श्री शैलेष नायक ने विकेन्द्रीकृत नियोजन में स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका पर प्रतिभागियों से चर्चा करते हुए बताया कि स्वयंसेवी संस्थाओं की पैठ जमीनी स्तर तक होती है। वह समुदाय को प्रोत्साहित कर उसको सही दिशा दिखाने में सक्षम होते हैं। श्री नायक ने ग्रामसभा एवं जिला योजना कमेटी के सशक्तीकरण में संस्थाओं की भूमिका को स्पष्ट किया।


गरीबी उन्मूलन व नीति सहायता इकाई के श्री योगेश माहौर ने कहा कि स्वयंसेवी संस्थाओं को चारों बिन्दुओं विकेन्द्रीकृत नियोजन, सामाजिक अंकेक्षण, डाटा विश्लेषण एवं समुदाय आधारित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण पर प्रशिक्षण देना प्रस्तावित है जिससे डाटाबेस इकट्ठा किया जा सकेगा ताकि संवैधानिक संस्थाओं को ब्लॉक स्तर पर काम कराना हो तो प्रशिक्षित संस्थाओं की सेवाएँ ब्लॉक स्तर पर ली जा सकें। जिला योजना कमेटी अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।



द्वितीय सत्र:- स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमतावृद्घि हेतु परियोजना संक्षिप्त परिचय तथा क्रियान्वयन की रणनीति

श्रीमती सीमा दीपक निदेशक प्रशिक्षण सेल जन अभियान परिषद्‌ ने प्रजेन्टेशन द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमतावृद्घि हेतु परियोजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परियोजना का संचालन दो चरणों में किया जाना है। प्रथम चरण में प्रदेश के प्रत्येक जिले में २५ स्वयंसेवी संस्थाओं का चयन उसकी विषय आधारित ग्रेडिंग के आधार पर इस प्रकार किया जायेगा कि प्रत्येक विकासखण्ड में कार्यरत कम से कम एक संस्था चयनित हो सके। यदि किसी विकासखण्ड में संस्था कार्यरत नहीं है तो ऐसी स्थिति में प्रस्फुटन समितियों को प्राथमिकता दी जा सकती है। प्रथम चरण में संस्थाओं की क्षमतावृद्घि हेतु विकेन्द्रीकृत नियोजन तथा सामाजिक अंकेक्षण को ही शामिल किया गया है। द्वितीय चरण में डाटा विश्लेषण एवं समुदाय आधारित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण पर संस्थाओं की क्षमतावृद्घि की जायेगी।




तृतीय सत्र-स्वयंसेवी संस्थाओं के चयन की रणनीति

श्रीमती हेमलता सिंह निदेशक परियोजना सेल ने प्रस्तुतीकरण द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमतावृद्घि हेतु चयन की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि विकासखण्ड समन्वयकों के प्रशिक्षण हेतु संभाग स्तर पर कार्ययोजना तथा रूपरेखा कैसे निर्मित की जाए तथा स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमतावृद्घि के लिए चयन में ब्लॉक/जिला/संभाग समन्वयकों की भूमिका से अवगत कराया। इसी दौरान सत्यापन प्रपत्र एवं क्षमतावृद्घि के आवेदन पत्र पर समन्वयकों से विस्तृत चर्चा की गयी।


चतुर्थ सत्र -संभाग स्तरीय कार्यशालाओं के आयोजन हेतु रणनीति पर चर्चा

समूह चर्चा में सभी प्रतिभागियों द्वारा संभागवार बैठकर विकासखण्ड समन्वयकों के प्रशिक्षण तथा संभाग स्तरीय कार्यशाला के आयोजन हेतु कार्ययोजना तथा रूपरेखा तैयार करके समक्ष प्रस्तुत की गयी।
पंचम सत्र -खुला सत्र
प्रतिभागियों की जिज्ञासा का समाधान जन अभियान परिषद्‌ के कार्यपालक निदेशक ने किया उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों की जिज्ञासा को संतुष्ट करते हुए आग्रह किया कि सभी अपने संबंधित क्षेत्र में कर्त्तव्यनिष्ठ होकर कार्य को साकार करें।
षष्ठम सत्र - समीक्षा एवं प्रतिपुष्टि (रिव्यू एवं फीडबैक) सत्र
इस सत्र में दिन भर की गतिविधियों का पुनरावलोकन किया गया। प्रत्येक सत्र से अपेक्षित परिणामों को प्रतिभागियों के साथ में बाँटा गया ताकि विषय की गंभीरता बनी रहे। प्रतिभागियों से उनके फीडबैक लिये गए। अधिकांश प्रतिभागियों ने यह विचार व्यक्त किया कि प्रशिक्षण की अवधि को बढ़ाया जाए और यदि क्षेत्रीय भ्रमण का भी सत्र होता तो विषय ज्यादा व्यवहारिक हो सकता था। अन्त में सभी प्रतिभागियों ने इस परियोजना के उद्देश्यों की पूर्ति पूरी निष्ठा से पूर्ण करने का संकल्प लिया।



रंजना चितले

विकासखण्ड समन्वयकों का प्रशिक्षण

मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद्‌ के तत्वावधान में राजधानी स्थित एन.आई.टी.टी.टी.आर. के सभागार में २४२५ मई को दो दिवसीय नव नियुक्त विकासखण्ड समन्वयकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्‌घाटन सांसद श्री अनिल माधव दवे ने किया। वहीं दूसरे दिन प्रशिक्षण शिविर को वित्तमंत्री श्री राधवजी भाई ने संबोधित किया। इस मौके पर योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री के. सुरेश भी उपस्थित थे।

२४ व २५ मई २०१० को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्‌घाटन अवसर पर राज्यसभा सांसद व पर्यावरणविद श्री निल माधव दवे ने कहा कि समाज को स्वावलम्बी बनाने का कार्य स्वयं समाज को ही करना होगा। सरकारों से समाज नही बनता और न ही प्रशासनिक औपचारिकताओं से विकास का क्रम खड़ा किया जा सकता है। म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ का यही प्रयास है कि गाँव के लोग स्वयं सामने आकर अंचल की विशेषताओं और वर्जनाओं से परिचित हो, समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान करें व संसाधनों का सृजन करें। परिषद्‌ को ऐसे युवा साथियों की तलाश है जिनके मन में गाँव के माध्यम से और गाँव को आधार बनाकर इस राष्ट्र का समग्र विकास का सपना हो। कार्यकर्ता शांत चित हो, गंभीर हो, चुस्त हो, जुझारू हो और किसी भी परिस्थिति में परिणाम मूलक कार्य करने के लिए सक्रिय हो। ये प्रस्फुटन समूह अपना पंजीयन कराकर स्वयंसेवी संगठन में परिवर्तित होंगे।
जन अभियान परिषद्‌ शासन को सलाह देने, सामुदायिक भागीदारी प्रोत्साहित करने, स्वयंसेवी संस्थाओं से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी समेहित कर नीतियों के क्रियान्वयन में एक समन्वयक अभिकरण के रूप में कार्य करती है। जन अभियान परिषद्‌ की आत्मा जन केन्द्रित है। आगामी वर्षों में स्वयंसेवी संगठनों का जाल बुनकर प्रत्येक विकासखण्ड में स्वैच्छिक संगठन खड़े करना है।
श्री दवे ने नवनियुक्त विकासखण्ड समन्वयकों से कहा कि अपने मन की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए जिससे कार्य करने में आसानी होती है। म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ का मुख्य उद्देश्य स्वेच्छिक संगठन खड़े करना है। शासकीय कार्यक्रमों का क्रियान्वयन एवं मुख्यमंत्री जी के म.प्र. बनाओं अभियान के ७ विषय म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के मुख्य उद्देश्य को प्राप्त करने के साधन हैं। उन्होंने विकासखण्ड समन्वयकों से आग्रह किया कि स्वावलंबी वृक्ष बनो न कि परावलंबी बेल।
योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री के.सुरेश ने अपने उद्‌बोधन में कहा कि नवनियुक्त विकासखण्ड समन्वयक प्रशिक्षण पश्चात जन अभियान का कार्य शुरू करेंगे। यह आसान कार्य नहीं है। फील्ड की अपनी कठिनाईयाँ हैं। दायित्व बहुत बड़ा है। जो काम सरकारी कर्मचारी नहीं करा सके वह विकासखण्ड समन्वयकों को जन भागीदारी से करवाना है।
इस अवसर पर म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के उप निदेशक श्री गिरीश जोशी ने अपने सहज सरल उद्‌बोधन से जन अभियान परिषद्‌ के संसाधन एवं कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रत्यक्ष रूप से सहायक मानव संसाधन की सूची में विकासखण्ड समन्वयकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इंदौर संभाग समन्वयक श्री अशोक पाटीदार ने समग्र ग्राम विकास के विभिन्न आयाम एवं मानव संसाधन की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस मौके पर निदेशक परियोजना श्रीमती हेमलता सिंह ने बताया कि म.प्र. में स्वयंसेवी संगठनों को प्रोत्साहन देने एवं उचित वातावरण निर्माण हेतु मुख्यमंत्री जी ने १२ अक्टूबर २००९ को ७ घोषणाएँ की थी। जन अभियान परिषद्‌ के सहयोग से ६ घोषणएँ पूर्ण हो चुकी हैं। उन्होंने स्वैच्छिक संगठनों की भविष्य की संभावनाओं, उपयोग में लाई जाने वाली शब्दावली पर प्रकाश डाला।
सागर संभाग समन्वयक श्री अमित शाह ने म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के कार्यक्रमों का परिचय दिया। अपने मैदानी कार्य अनुभव के आधार पर जबलपुर संभाग समन्वयक श्री भीमसिंह डामोर ने सरल सहज तरीके से विकासखण्ड समन्वकों को प्रस्फुटन समिति गठित करने पर जोर दिया। ग्वालियर संभाग समन्वयक श्री शिव प्रसाद मालवीय ने बताया कि जिस देश में हरित क्रांति, दुग्ध क्रांति हुई वहाँ भी शिक्षा, जानकारी का भाव, सहभागिता के भाव आदि कारणों से पर्याप्त विकास नहीं हो पाया। म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा प्रकाशित पत्रिका की संपादक श्रीमती रंजना चितले ने जन अभियान परिषद्‌ की प्रारम्भिक गतिविधियों जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उदय, क्रांतियात्रा, स्वैच्छिक संगठनों की मेपिंग, नीति निर्माण कार्यशाला से लेकर ाज तक की उपलब्धियों का लेखाजोखा प्रस्तुत किया। परिषद्‌ की प्रमुख योजना प्रस्फुटन की द्यतन उपलब्धियाँ सर्वविदित है जिसका उन्होंने संभागवार प्रस्तुतिकरण दिया।
प्रशिक्षण सत्र के दूसरे दिन २५ मई को नवनियुक्त विकासखण्ड समन्वयकों को माननीय श्री राघवजी भाई मंत्री म.प्र. शासन वित्त, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी एवं उपाध्यक्ष जन अभियान परिषद्‌ का मार्गदर्शन मिला। अपने सम्बोधन में राघव जी भाई ने कहा कि जन अभियान परिषद्‌ में नियुक्ति लग प्रकार की है। यहाँ सेवा भावी लोग जो मानव सेवा को सर्वोच्च महत्व देते हैं, कार्यरत हैं। इसे नौकरी मानकर कार्य नहीं करते हैं। ऐसे सैकड़ों उदाहरण है जब देश की रक्षा के लिए वीरों ने अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया था। श्री राघवजी ने कहा कि विकासखण्ड समन्वयकों को पथ प्रदर्शक का कार्य करना है। लोगों की सोच में परिवर्तन लाकर सही दिशा देना है। कार्य दुर्लभ है लेकिन सम्भव नहीं। स्वर्णिम म.प्र. के लिए नये समाज की रचना करना है। मध्यप्रदेश को उन्नत प्रदेश की कतार में लाना है। उन्होंने कहा कि म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ ने प्रस्फुटन योजनांतर्गत ऊर्जा बचत, जल संरक्षण के क्षेत्र में अभिनव प्रयोग कर उपलब्धियाँ हासिल की है। वृक्षारोपण, निर्मल गाँव, स्कूल शिक्षा व स्वास्थ्य में भी सफलता अर्जित की है। भी मुट्ठी भर जमीन नापी है, सारा आसमान बाकी है।
इसी सत्र में रीवा संभाग समन्वयक श्री वरूण आचार्य ने शासन की संरचना जिला स्तर, ब्लॉक स्तर, ग्राम स्तर पर समझाई एवं विभिन्न स्तरों पर प्रमुख विभागों अधिकारियों को जानकारी दी। शासन की कार्यप्रणाली एवं पंचायती राज व्यवस्था पर प्रकाश डाला। इस प्रशिक्षण में कुल ७७ नवनियुक्त विकासखण्ड समन्वयक उपस्थित थे।



नवीन शर्मा

विकासखण्ड समन्वयकों को पथ प्रदर्शक का कार्य करना है। लोगों की सोच में परिवर्तन लाकर सही दिशा देना है। कार्य दुर्लभ है लेकिन असम्भव नहीं। स्वर्णिम म.प्र. के लिए नये समाज की रचना करना है। मध्यप्रदेश को उन्नत प्रदेश की कतार में लाना है।


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