म.प्र. जन अभियान परिषद् की शासी निकाय की बैठक माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान की अध्यक्षता में दिनांक 29.03.2011 को सम्पन्न । • • • प्रदेश के स्वैच्छिक संगठनों की क्षमता वर्धन हेतु प्रत्येक जिले में से 25-25 स्वयंसेवी संगठनों का चयन किया जाकर प्रशिक्षण कार्यशालाएँ सम्पन्न |
 
माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह चौहान के साथ म.प्र. जन अभियान परिषद् के अधिकारियों एवं स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक दिनांक 25 अप्रैल 2011 को समन्वय भवन, टी.टी नगर, भोपाल में आयोजन ।

म.प्र.जन अभियान परिषद् के भोपाल एवं ग्वालियर संभाग के विकासखण्ड समन्वयकों की आधारभूत प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दिनांक 19.04.2011 से 23.04.2011 तक एवं जबलपुर, रीवा, एवं सागर संभाग का आयोजन दिनांक 26.04.2011 से 30.04.2011 एन.आई.टी.टी.टी.आर भोपाल में आयोजन ।

म.प्र. जन अभियान परिषद् की शासी निकाय की बैठक माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान की अध्यक्षता में दिनांक 29.03.2011 को सम्पन्न ।

सात संभागो भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, रीवा और जबलपुर में प्रस्फुटन समितियों के साथ संभाग स्तरीय सम्मलेन का आयोजन |

डॉ. अजय शंकर मेहता जी और श्री प्रदीप पांडे जी ने संभाला जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष का दायित्व |

 

 
अन्य

प्रदेश विकास के लिए समाज को खड़ा करना होगा - श्री चौहान

रवीन्द्र भवन में आओ बनाएं अपना मध्यप्रदेश पर कार्यक्रम का आयोजन

भोपाल/25 अप्रैल 2011

प्रदेश का विकास तब तक नहीं हो सकता जब तक उसमें समाज शामिल न हो। प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए समाज को खड़ा करना होगा और समाज को खड़ा करने का उपकरण है म.प्र. जन अभियान परिषद्‌। यह बात प्रदेश के मुखयमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जन अभियान परिषद्‌ द्वारा आयोजित आओं बनायें अपना मध्यप्रदेश पर आयोजित कार्यक्रम में रवीन्द्र भवन सभागार में २५ अप्रैल २०११ को कही। उन्होंने जन अभियान परिषद्‌ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जन अभियान परिषद्‌ ने गाँव-गाँव में काम खड़े किये हैं। जन अभियान परिषद्‌ की प्रस्फुटन समितियों ने पूर्ण सी.एफ.एल. गाँव बनाये हैं। बिजली चोरी रोकने का प्रयास किया है, गाँवों को नशामुक्त किया है। जन संरचनायें खड़ी की हैं। वृक्षा रोपण का सफल प्रयास किया है। इसीलिये सरकार द्वारा आयोजित जलाभिषेक अभियान, स्कूल चलें हम अभियान, खरीफ अभियान और स्पर्श अभियान में जन अभियान को प्रमुख भूमिका निभानी है।
श्री चौहान ने आह्वान किया कि जन अभिषेक अभियान में जल की एक-एक बूंद को बचाना है। चेकडेम, स्टॉप डेम, बोरी बंधान, खेत में तालाब बनाकर जल रोकने का प्रयास करना है। श्री चौहान ने चारों अभियानों पर बोलते हुये कहा कि स्कूल चलें हम अभियान में ऐसे जुटना है कि एक भी बच्चा स्कूल जाने से वंछित न रहे। कृषि का उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि महोत्सव आज से ही शुरू करना है। खरीफ की फसल को डेढ गुना बढ आना है। उसके लिए यथोचित प्रयास किये जायेंगे। परम्परागत खेती के अलावा, जैविक खेती, वन फूलों की खेती, सब्जियों की खेती, औद्योगिक खेती को बढ आने के साथ प्रदेश को श्वेत क्रांति की ओर ले जाना है। स्पर्श अभियान मानवीय अभियान है। समाज के निःशक्त जनों के लिए चलो जलायें दीप वहां जहां अभी अंधेरा है, उनके जीवन में स्पर्श अभियान से रोशनी लाना है।
मुखयमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आगामी तीन वर्षों में मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए जरूरी है कि सरकार और समाज मिलकर कार्य करें। जन अभियान परिषद्‌ और स्वयं सेवी संस्थायें ऐसे लोगों को आगे बढ़ायें जो मिशन के रूप में समाज की सेवा के लिये तत्पर हो। समाज में ऐसी सोच विकसित की जाए जो सामूहिकता, सहभागिता पर कार्य करें।
उन्होंने नशामुक्ति को लेकर घोषणा की कि मध्यप्रदेश की धरती पर नई शराब की दुकान नहीं खुलने दी जायेगी। अन्त में श्री चौहान ने जन अभियान परिषद्‌ के समन्वयकों और स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों से कहा कि आप लोग काम के लिये प्रतिबद्ध हैं, कटिबद्ध हैं, संकल्पबद्ध हैं। आपको स्वर्णिम मध्यप्रदेश निर्माण में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करना है।
भविष्य में जन अभियान परिषद्‌ निभायेगा महत्वपूर्ण भूमिका - श्री राघवजी भाई
वित्त, योजना आर्थिक एवं सांखियकी विभाग मंत्री एवं म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के उपाध्यक्ष श्री राघवजी भाई ने कहा कि आओ बनायें अपना मध्यप्रदेश के तहत जो चार महाभियान (जलाभिषेक अभियान, स्कूल चलें हम अभियान, खरीफ अभियान और स्पर्श अभियान) चलाए जा रहे हैं उनमें म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जन अभियान परिषद्‌ ने हरियाली को लेकर किये जाने वाले वृक्षा रोपण में महती भूमिका का निर्वहन किया है। जिसके परिणाम सामने हैं। कार्य को पूर्ण रूप से सफलता तब तक नहीं मिल पाती जब तक कि वह सैद्धांतिक रूप से न किये जाये। साथ ही उन्होंने म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना की।
प्रदेश के विकास के लिए जन अभियान परिषद्‌ नींव का पत्थर- श्री गोपाल भार्गव

म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा आज रवीन्द्र भवन में आओ बनायें अपना मध्यप्रदेश पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के उद्‌घाटन अवसर पर मुखय अतिथि सामाजिक न्याय एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने कहा कि प्रदेश के विकास, तरक्की और समृद्धि के लिए म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ नींव का पत्थर साबित हो रहा है। आज सरकार द्वारा आओ बनायें अपना मध्यप्रदेश के तहत जो चार महाभियान चलाए जा रहे हैं उनमें म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ की महत्वपूर्ण भूमिका साबित होगी।
श्री भार्गव ने कहा कि मुखयमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की इच्छा है कि प्रदेश में प्रगति का ऐसा खाका तैयार हो जिसका दूसरे राज्य अनुसरण करें। श्री भार्गव ने जलाभिषेक अभियान पर बोलते हुए कहा कि जल संरक्षण हेतु हमने बहुत कुछ किया है लेकिन अभी भी हम लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकें हैं। इसके लिए हम सबको आगे आकर और अधिक कार्य करने हैं। वहीं स्कूल चलें हम अभियान की रूपरेखा पर उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि आगामी वर्षों में राज्य में एक भी बच्चा शाला में अप्रवेशी न रहे और यह सिर्फ सरकार के भरोसे नही हो सकता। इसके लिए जन भागीदारी की जरूरत है। इस अभियान को सतत चलाने की आवश्यकता है।
खरीफ महाभियान पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में खरीफ फसलों का उत्पादन डेढ़ गुना करने पर प्रयास करना है। इसके लिए गाँव स्तर पर अभियान चलाकर जागरूकता की आवश्यकता है। इसमें म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ की भूमिका अग्रणी रहेगी। इसके अलावा श्री भार्गव ने स्पर्श अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि इस अभियान के तहत जिलों व विकासखण्ड स्तर पर शिविर लगाकर ऐसे लोगों का चिन्हांकन करना है जो विकलांग हैं और जिन्हें सरकारी मदद की जरूरत है। इसके तहत आम आदमी को जोड ना है। यह कार्य म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ से बेहतर कोई नही कर सकता। अंत में श्री भार्गव ने कहा कि इन सभी महाभियानों में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ सहयोगी बने। राज्य सरकार किसी भी प्रकार की कमी नही आने देगी। इस अवसर पर श्रीमती अर्चना चिटनीस स्कूल शिक्षा मंत्री, डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया कृषि मंत्री, श्री अजय विश्नोई पशुपालन मंत्री भी उपस्थित थे।
स्वरूप बदलने के लिए दृष्टि होनी चाहिए - श्री पाण्डेय

इससे पहले कार्यक्रम के स्वागत भाषण में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि प्रदेश के स्वरूप को बदलने के लिए दृष्टि की आवश्यकता है। इसमें हमारी क्या भूमिका हो सकती है इस पर विचार करने की जरूरत है। श्री पाण्डेय ने कहा कि आज की इस कार्यशाला में यही बात निकलकर आएगी। हमारी प्रवृत्ति ग्रहण करने की होनी चाहिए। उन्होंने मुखयमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के स्वर्णिम म.प्र. निर्माण के संकल्प पर बोलते हुए कहा कि इन चारों अभियानों के तहत हम प्रदेश का स्वरूप बदलेंगे। इस मंच से मिलने वाले मार्गदर्शन हमारे लिए प्रेरणादायी होंगे।
रोशनी से अंधेरा मिटाना है - डॉ. मेहता
म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के उपाध्यक्ष डॉ. अजय शंकर मेहता ने कहा कि हमारे सामने जो अंधेरा है उसे रोशनी से मिटाना है। कार्यक्रमों के माध्यम से रोशनी फैलाना है। उन्होंने म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के सदस्यों से आह्वान करते हुए कहा कि हमे कुछ करने के लिए आगे ही चलना है।
कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में जन अभियान परिषद्‌ की महत्वपूर्ण भूमिका - श्री के. सुरेश
योजना एवं सांखियकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री के. सुरेश ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जलाभिषेक, स्कूल चलें हम, खरीफ और स्पर्श अभियानों के सफल क्रियान्वयन में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ की महत्वपूर्ण भूमिका साबित होगी। इन अभियानों के माध्यम से गाँव समृद्ध होंगे व विकास का नया इतिहास रचा जाएगा।
स्वर्णिम मध्यप्रदेश निर्माण के लिए चलाये जा रहे आओ बनायें अपना मध्यप्रदेश महा अभियान को गति देने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में जल अभिषेक अभियान, स्पर्श अभियान, स्कूल चलें हम अभियान, खरीफ अभियान के तहत अभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई।
उल्लेखनीय है कि आगामी माह में चलाये जाने वाले इन महत्वपूर्ण अभियानों के मध्य समन्वय हेतु जन अभियान परिषद्‌ को दिशा निर्देश दिये गए। कार्यक्रम में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ की कार्ययोजना को लेकर विचार-विमर्श किया गया। इस मौके पर जलाभिषेक अभियान पर श्री उमाकांत उमराव, संचालक राजीव गाँधी जल ग्रहण क्षेत्र, स्पर्श अभियान पर श्री एच.एल. त्रिवेदी आयुक्त पंचायत राज, स्कूल चलें हम अभियान पर श्री मनोज झालानी आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र एवं खरीफ अभियान पर डॉ. डी.एन. शर्मा संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास ने पावर पाईन्ट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से संबंधित विभागों की कार्ययोजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के सभी संभाग, जिला, एवं विकासखण्ड समन्वयक और स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सम्पादक ज.अ.प.

म.प्र. जन अभियान परिषद्‌

भोपाल

म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ की शासी निकाय की बैठक सम्पन्न

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ की शासी निकाय की बैठक विधानसभा समिति कक्ष क्रमांक १ में दिनांक २९.३.२०११ को आयोजित की गई। बैठक में परिषद्‌ के कार्यों प्रस्फुटन, समृद्घि, संवाद, नवांकुर तथा विस्तार कार्यक्रमों की प्रगति का विवरण दिया गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री व अध्यक्ष, म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ ने प्रगति प्रतिवेदन पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि परिषद्‌ द्वारा किये जा रहे अच्छे कार्यों की संभाग व जिलों से भी जानकारी मिलती रहती है। उन्होंने प्रस्फुटन समितियों के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इन समितियों को "आओ बनायें अपना मध्यप्रदेश '' कार्यक्रम में मुख्य भूमिका का निर्वहन करना चाहिए

  • मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा गठित प्रस्फुटन समितियों के कार्यों को सराहा।
  • आओ बनायें अपना मध्यप्रदेश कार्यक्रम में प्रस्फुटन समितियों को मुख्य भूमिका निर्वहन करने के निर्देश।
  • जन अभियान परिषद्‌ को 82000 बहुविकलांगों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने व बच्चों का शाला में प्रवेश एवं नियमितिकरण में सहयोग करने के निर्देश।
  • प्रस्फुटन समितियों को जल संरक्षण अभियान से जोडा जायेगा।
  • स्वैच्छिक संगठनों हेतु ड्राफ्ट पालिसी को अनुमोदन उपरांत केबीनेट में रखे जाने की स्वीकृति प्रदाय।
  • प्रदेश की पंजीकृत सक्रिय व निष्क्रिय स्वैच्छिक संगठनों का चिन्हांकन व दस्तावेजीकरण के निर्देश।
  • तय मापदण्डों अनुसार स्वैच्छिक संगठनों के प्रत्याययन करने के निर्देश दिये गये।
  • हर तीसरे माह में मुख्यमंत्री म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के कार्यों की समिक्षा करेंगे।


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ की शासी निकाय की बैठक विधानसभा समिति कक्ष क्रमांक १ में दिनांक २९.३.२०११ को आयोजित की गई। सर्वप्रथम म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के नवनियुक्त उपाध्यक्ष डॉ. जय शंकर मेहता एवं श्री प्रदीप पाण्डेय द्वारा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया। बैठक में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के कार्यों की समीक्षा की गई तथा वित्तीय वर्ष २०१०११ एवं वित्तीय वर्ष २०१११२ के बजट पर विस्तृत विचार विमर्श हुआ।
बैठक में परिषद्‌ के कार्यों क्रमशः प्रस्फुटन, समृद्घि, संवाद, नवांकुर तथा विस्तार कार्यक्रमों की प्रगति का विवरण दिया गया। साथ ही प्रदेश में पंजीकृत ७७८३० स्वैच्छिक संगठनों के सर्वेक्षण व हरियाली चुनरी योजना हेतु नर्मदा सर्वेक्षण की जानकारी दी गई। प्रदेश के मुख्यमंत्री व अध्यक्ष, म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ ने प्रगति प्रतिवेदन पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि परिषद्‌ द्वारा किये जा रहे अच्छे कार्यों की संभाग व जिलों से भी जानकारी मिलती रहती है। उन्होंने जन अभियान परिषद्‌ द्वारा निर्मित प्रस्फुटन समितियों के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इन समितियों को आओ बनायें अपना मध्यप्रदेश '' कार्यक्रम में मुख्य भूमिका का निर्वन करना चाहिए। म.प्र. में ६ वर्ष से अधिक आयु के बहुविकलांगों को सहायता अनुदान की पात्रता हेतु गरीबी रेखा से नीचे होने की शर्त समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। जिससे लगभग ८२००० बहुविकलांगों को लाभ मिल सकेगा। मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्फुटन समितियों को इस योजना का लाभ बहुविकलांगों को दिलाने तथा शालाओं में छात्रों के शतप्रतिशत प्रवेश व नियमित उपस्थिति हेतु सहयोग करने के निर्देश दिये गये। श्री गोपाल भार्गव मंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं सामाजिक न्याय विभाग द्वारा प्रस्फुटन समितियों को नदी पुनजीर्वित योजना से जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया जिसे मान्य करते हुए मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्फुटन समितियों को आगामी महिनों में जल संरक्षण कार्यों से जुड़ने के निर्देश दिये गए।
प्रदेश के मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य के सुझाव अनुसार प्रदेश में पंजीकृत संगठनों का किये गये सर्वे के आधार पर वास्तविक रूप से कार्यरत एवं कार्य न करने वाले संगठनों को चिन्हांकित कर दस्तावेजीकरण के परीक्षण उपरांत पृथकपृथक सूची तैयार किये जाने के निर्देश दिये गये।
दिनांक १२ अक्टूबर २००९ को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित स्वैच्छिक संगठनों की पंचायत में की गयी घोषणाओं पर कार्यवाही को लेकर अप्रैल माह में संबद्घ विभागों के साथ बैठक आयोजित किये जाने का निर्णय लिया गया। स्वैच्छिक संगठनों हेतु ड्राफ्ट पॉलिसी का अनुमोदन किया जाकर स्वीकृति के लिये केबिनेट के समक्ष रखे जाने की सहमति दी गयी।
बैठक में नवांकुर संस्थाओं के चयन हेतु तैयार किये गये मापदण्डों को स्वीकृति दी गई तथा भविष्य में प्रदेश में स्वैच्छिक संगठनों के प्रत्याययन के लिए भी इसी प्रक्रिया को अपनाने के निर्देश दिये गये।

गांधी के सपने को साकार करता "हिवरे बाजार''

एक गाँव जहाँ लोग अपने उपनाम के रूप में लगाते हैं अपने गाँव का नाम। जहाँ व्यापक मंदी के इस दौर में मंदी का कोई सर नहीं है। जहाँ से अब कोई पलायन पर नहीं जाता है। जहाँ कोई भी व्यक्ति शराब नहीं पीता हैं। जहाँ पर बच्चे कुपोषित नहीं हैं, राशन व्यवस्था ग्रामसभा के अनुसार संचालित होती है। हर घर गुलाबी रंग से पुता है। यह उस गाँव के हाल हैं जहाँ सत्ता किसी सरकार द्वारा नहीं बल्कि उसी गाँव के लोगों द्वारा संचालित होती है। यह कोई सपना सा ही लगता है, लेकिन यह सपना साकार हो गया है महाराष्ट्र के हमदनगर जिले के गाँव हिवरे बाजार'' में। हिवरे बाजार'' प्रतिनिधि है गाँधी के सपनों के भारत का।
महात्मा गाँधी ने कहा था कि सच्ची लोकशाही केन्द्र में बैठे हुए २० आदमी नहीं चला सकते हैं, वह तो नीचे से हर एक गाँव में लोगों द्वारा चलाई जानी चाहिए। सत्ता के केन्द्र इस समय दिल्ली, कलकत्ता व मुम्बई जैसे नगरों में है। मैं उसे भारत के ७ लाख गाँवों में बांटना चाहूंगा।'' गाँधी जी का यह वाक्य हमेशा एक आदर्श वाक्य की तरह लगता रहा है लेकिन इस आदर्श वाक्य को हिवरे बाजार ने साकार कर दिया है। १९८९ में हिवरे बाजार के कुछ पढ़ेलिखे नौजवानों ने यह बीड़ा उठाया कि क्यों न अपने गाँव को संवारा जाये...... गाँववालों से बातचीत की गई तो गाँववालों ने कल के छोकरे'' कह कर एक सिरे से नकार दिया। युवकों ने हिम्मत नही हारी और अपनी प्रतिबद्घता दोहराई। गाँव वालों ने भी युवकों की चुनौती को गंभीरता से लिया। नवयुवकों ने पोपट राव पवार को सत्ता सौंपी। पोपट राव पवार उस समय महाराष्ट्र की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते थे। हिवरे बाजार में अब ९ अगस्त को क्रांति दिवस मनाया जाता है।
युवकों ने इस एक वर्ष को अवसर के रूप में देखा। गाँव में पहली ग्रामसभा की गई और चुनी गई प्राथमिकतायें। बिजली, पानी के बीच बात शिक्षा की भी आई। सामूहिक सहमति बनी शिक्षा के सवाल पर। स्कूल में न तो खेल का मैदान और न थी बैठने की व्यवस्था। ग्रामसभा में सबसे पहले युवकों ने गाँव वालों से पील की कि अपनी बंजर पड़ी जमीन को स्कूल के लिये दान दें। शुरू में दो परिवार तैयार हुए और बाद में कई। एक अतिरिक्त कक्ष के निर्माण के लिये ६०,००० रुपये की राशि स्वीकृत हुई। उचित नियोजन व गाँववालों के श्रमदान की बदौलत दो कमरों का निर्माण किया। गाँव वालों ने अब इन नवयुवकों को पाँच वर्षों के लिये सत्ता सौंपने का निश्चय किया।
पोपटराव के कुशल नेतृत्व में युवकों ने गाँव का बेसलाईन तैयार करना शुरू किया। गाँव में औसतन प्रति व्यक्ति सालाना आय 800 रुपये थी। गाँव के हर परिवार से लोग पालायन पर जाते थे, गाँव में रह जाते थे केवल बूढ़े, महिलायें और बच्चे। जिन लोगों के पास जमीन थी वो केवल एक फसल ले पाते थे। सिंचाई के लिये पानी तो था ही नहीं। कुल मिलाकर 400 मि.मी. वर्षा होती थी। पोपट राव कहते हैं कि हमने इस विषय पर सोचना शुरू किया। पहले गाँव वाले वन विभाग द्वारा लगाये पौधों को ही काट कर ले जाते थे। हमने 10 लाख पेड़ लगाये और 99 फीसदी सफल हुए। अब इस जंगल में वनविभाग को जाने के लिये भी ग्रामसभा की अनुमति लेना होती है। पोपट राव कहते हैं कि शुरू में कई निर्णयों पर बहुत विरोध हुआ, हमने कहा कि गाँव के हित में यह निर्णय ठीक होगा, इसके दूरगामी परिणाम सामने आयेंगे।



हम सबने मिलकर जलग्रहण क्षेत्र का काम करना शुरू किया। कुछ सरकारी राशि और कुछ श्रमदान। तीन चार वर्षों बाद सर दिखा। भूजल स्तर बढ़ा और मिट्टी में नमी बढ़ने लगी। लोगों ने दूसरी और तीसरी फसल की ओर रुख किया। अब यहां सब्जी भी उगाई जाती है। भूमिहीनों को गाँव में ही काम मिलने लगा। लोगों का पलायन बंद हुआ। आज गाँव की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय सालाना 800 रुपये से बढ़कर 28,000 हो गई है।
पहले बच्चों को पाँचवीं के बाद से ही बाहर जाना पड़ता था, जिससे अधिकांश बालिकायें ड्राप आऊट हो जाती थीं। अब हायर सेकेण्ड्री तक स्कूल हो गया है। स्कूल का समय शासन के अनुसार नहीं चलता है, बल्कि ग्रामसभा तय करती है। स्कूल में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था है। शिक्षिका शोभा थांगे कहती हैं कि हम लोग ग्रीष्मकालीन अवकाश में भी आते हैं। यहाँ पढ़ाई किसी बड़े कान्वेन्ट स्कूल से बेहतर होती है। यही कारण है कि आज, हिवरे बाजार गाँव में आसपास के गाँव और शहरों से 40 प्रतिशत छात्रछात्रायें आती हैं।
गाँव के हर बच्चे का टीकाकरण होता है। हर गर्भवती महिला को आयरन फोलिक एसिड की गोलियाँ मिलती हैं। स्थानीय स्तर पर मिलने वाली समस्त स्वास्थ्य सुविधायें गाँव में गारंटी के साथ मिलती हैं। राशन व्यवस्था में यहाँ पर सबसे पहले तो प्रत्येक कार्डधारी को राशन बांट दिया जाता है लेकिन उसके बाद राशन बचने पर ग्रामसभा तय करती है कि इस राशन का क्या होगा?
पोपटराव कहते हैं कि 1995 में हमने लैण्ड सेटलमेंट की बात की तो कुछ लोगों ने विरोध किया। आज चारों ओर हरियाली है, पेयजल व सिचांई का जल पर्याप्त है। राव कहते हैं कि अब बाहरी लोगो अंकी नजर हमारी जमीन पर है। हमने फिर नियम बना लिये हैं कि हमारी जमीन किसी बाहरी व्यक्ति को नहीं बेची जायेगी। इससे गरीब हमेशा गरीब रहेगा और अमीर और अमीर हो जायेगा।
ये सारे महत्वपूर्ण निर्णय जहाँ पर बैठकर लिये जाते हैं, उस जगह का नाम है ग्राम संसद। इसकी बनावट भी दिल्ली के संसद भवन की ही तरह है। पोपट राव कहते हैं कि पहले तो गाँव में दो ग्रामसभा ही होती थी, लेकिन हमने बाद में अपनी जरूरत के मुताबिक ग्रामसभायें करनी शुरू की। हम महीने में चार ग्रामसभायें करते हैं। दरअसल हमारी यह ग्रामसभा एक निर्णय सभा है, हम ग्रामसभा में कोशिश करते हैं कि हर व्यक्ति आये और बात करे। महिलायें विशेष रूप से आयें और बात रखें। जाहिर है कि उनकी बात को सुना जाये। यदि नहीं सुना जायेगा तो फिर वे ग्रामसभा में आयेंगी ही क्यों? यहाँ पंचायत भवन में प्रतिमाह पैसों का पूरा रिकार्ड लिखकर टांग दिया जाता है। पंचायत सचिव श्री ज्ञानेह्णार लक्ष्मण कहते हैं कि साल के अंत में ग्रामसभा का पूरा रिकार्ड गाँव वालों के सामने और बाहरी लोगों को बुलाकर बताया जाता है। सूचना के अधिकार व स्वराज पर काम कर रहे मैग्सेसे पुरस्कार विजेता श्री अरविन्द केजरीवाल कहते हैं कि जब मैं इस गाँव गया तो मुझे लगा कि मैं किसी और देश में हूँ । न भ्रष्टाचार, न सरकारी ढर्रा बस अपना राज, ग्रामस्वराज। कबीर से जुड़े मनीष सिसोदिया और उनके साथियों ने हिवरे बाजार से प्रभावित होकर स्वराज'' नामक फिल्म ही बना डाली।
"हिवरे बाजार'' को इस साल देश की सर्वश्रेष्ठ पंचायत का पुरस्कार राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने दिया है। हिवरे बाजार को महाराष्ट्र सरकार ने भी अनेक पुरस्कारों से नवाजा है। रोजाना बाहरी लोग गाँव को देखने और स्वराज को समझने यहाँ आते हैं। एक समय था कि जब गाँव में हर आठवें दिन पुलिस आ जाती थी। उस समय यह ऐसा गाँव था कि नवयुवक आसपास में यह बताने से कतराते थे कि हम हिवरे बाजार के निवासी हैं। आज इस गाँव के लोग गर्व से कहते हैं कि हम हिवरे बाजार के निवासी हैं। बाला साहेब रमेश ने तो अपने उपनाम की जगह लगा दिया है अपने गाँव का नाम। हिवरे बाजार, गाँधी के सपने का साकार रूप है। कल्पना कीजिये उस दिन की जब देश के ७ लाख गाँव हिवरे बाजार'' होंगे। जहाँ होगी अपनी सत्ता, अपना स्वराज।


हिवरे बाजार का भ्रमण

प्रदेश स्तर पर प्रमुख 5 जिलों में एक्सपोजर विजिट की चयन समिति द्वारा राज्य योजना आयोग की ओर से जन अभियान परिषद्‌ के राजगढ़ विकासखण्ड समन्वयक श्री शिवशंकर शर्मा का एक्सपोजर विजिट हेतु चयन किया गया। इसमें देश का पहला आदर्श ग्राम हिवरे बाजार का भ्रमण कराया गया जिसमें श्री शर्मा द्वारा भ्रमण दल के साथ हिवरे बाजार का अवलोकन किया गया, विकास कार्य के कार्यकर्ताओं से प्रत्यक्ष चर्चा की गई एवं अपने विभाग द्वारा किये जा रहे कार्यों के संबंध में बताया। इस विजिट के बाद श्री शर्मा का कहना है कि हिवरे बाजार को आदर्श ग्राम बनाने में 20 वर्ष का लम्बा समय लगा लेकिन जन अभियान परिषद्‌ के कार्यों को देखते हुए लगता है आने वाले 57 वर्षों में ही आदर्श ग्राम खड़े हो जायेंगे।


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