प्रस्फुटन
किसी भी गाँव का विकास तब तक नहीं हो सकता जब तक गाँव में एक या उससे अधिक विकास पुरुष न हो। प्रत्येक ग्राम में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो स्वावलंबन की दिशा में कार्य करते हैं। समाज की इसी स्वैच्छिक प्रवृत्ति को प्रोत्साहन देने हेतु प्रतिवर्ष प्रत्येक विकासखण्ड में 10 नये गांवों का चयन किया जायेगा । गाँव में चिन्हित व चयनित सक्रिय समूह को 3 वर्षों के लिए प्रतिमाह रु. 1000 दिये जायेंगे। इस राशि में प्रत्येक वर्ष 500 रुपये की वृद्धि की जा सकेगी । 3 वर्षों के अन्दर इनमें से 10 से 25 प्रतिशत गावों में वृहद् स्वैच्छिकता उत्पन्न हो जायेगी और सक्रिय समूह एक स्वयंसेवी संस्था में परिवर्तित हो जायेंगें ।
नवांकुर
राज्य में नवीन स्वंयसेवी संस्थाओं का उन्मुखीकरण एवं पोषण करना परिषद् की एक प्रमुख गतिविधि है । इसके लिए प्रतिवर्ष प्रत्येक विकासखण्ड में एक, जिला मुख्यालय पर एक, संभाग मुख्यालयों पर तीन, तीन बडे शहरों - इन्दौर, ग्वालियर और जबलपुर में पाँच तथा राज्य की राजधानी भोपाल में दस नवांकुरित संस्थाओं का चयन कर उनकी रुचि, क्षमता और जरूरतों के अनुसार प्रथम वर्ष में रू. 50 हजार, द्वितीय वर्ष में 1 लाख और तृतीय वर्ष में 2 लाख का वित्तीय पोषण का प्रयत्न किया जाएगा। यह पोषण जन अभियान परिषद् द्वारा सीधे अथवा किसी अन्य स्वयंसेवी संस्था के माध्यम से किया जाएगा । इस सहायता का उपयोग क्षमता वृद्धि, समुदाय को संगठित करने एवं प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग हेतु किया जाएगा।
दृष्टि
राज्य की समस्त पंजीबद्ध संस्थाओं का पंजीयन कर उनका परीक्षण व मूल्यांकन किया जाएगा। उनकी ताकत, कमजोरियों व अवसरों का मूल्यांकन उनके कार्यालय, मैदानी कार्य व वार्षिक रिपोर्ट एवं अन्य प्रकाशित दस्तावेजों के आधार पर किया जाेगा। यह मूल्यांकन आगामी वर्षो में विभिन्न-कार्यक्रमों हेतु प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में विकास कार्यों हेतु स्वयंसेवी संस्थाएँ उपलब्ध कराने का आधार बनेगा। स्वयंसेवी संगठनों के मूल्यांकन उपरान्त समस्त प्रकार के आवश्यक प्रशिक्षणों का कलेन्डर भी जारी किया जावेगा।
सृजन
ग्रामीण अंचलों में लोगों के पास पारंपरिक ज्ञान और कौशल का अथाह भण्डार है । क्षमता और सृजनात्मकता के धनी इन लोगों को जहाँ एक ओर आर्थिक संकट का सामना करना पडता है वहीं दूसरी ओर इसका लाभ आम जनता तक व्यापक रूप से नहीं पहुँच पाता है। प्रत्येक जिले में ऐसे व्यक्तियों को चिन्हित कर उन्हें आवश्यकता अनुसार अशंदान देकर सृजनात्मक कार्यों को व्यवसायिक स्तर पर स्थापित किया जा सकता है ।
संवाद
इस कार्यक्रम में स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर, उनकी क्षमतावृद्धि के लिए प्रशिक्षण, संगोष्ठी और कार्यशालाओं का आयोजन किया जायेगा । संवाद, संचार, अभिप्रेरणा और सूचना संप्रेषण के उद्देश्य से आयोजित ये गतिविधियाँ राज्य, संभाग, जिला और विकासखण्ड स्तर पर होंगी।
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