म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा 18 नवम्बर 2011 को प्रदेश के स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कार्यक्रम का आयोजन । म.प्र. जन अभियान परिषद् की शासी निकाय की बैठक माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान की अध्यक्षता में दिनांक 29.03.2011 को सम्पन्न । • • • प्रदेश के स्वैच्छिक संगठनों की क्षमता वर्धन हेतु प्रत्येक जिले में से 25-25 स्वयंसेवी संगठनों का चयन किया जाकर प्रशिक्षण कार्यशालाएँ सम्पन्न |
 
स्वैच्छिक संगठनों का संवाद -२०११,समाज का उद्धार, जन-जन भागीदार १८ नवम्बर २०११ को शासकीय गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बरखेड़ा, जंबूरी मैदान के पास, भोपाल में।

कार्यक्रम तीन खण्डों में प्रथम खण्ड- भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी व मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह चौहान का उद्‌बोधन ।
द्वितीय खण्ड- प्रतिभागियों के वेल्यू एडिशन के लिए उद्‌देश्य अनुरूप प्रबोधन एवं साहित्य विवरण ।
तृतीय खण्ड- सांस्कृतिक कार्यक्रम ।


म.प्र.जन अभियान परिषद् के भोपाल एवं ग्वालियर संभाग के विकासखण्ड समन्वयकों की आधारभूत प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दिनांक 19.04.2011 से 23.04.2011 तक एवं जबलपुर, रीवा, एवं सागर संभाग का आयोजन दिनांक 26.04.2011 से 30.04.2011 एन.आई.टी.टी.टी.आर भोपाल में आयोजन ।

म.प्र. जन अभियान परिषद् की शासी निकाय की बैठक माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान की अध्यक्षता में दिनांक 29.03.2011 को सम्पन्न ।

सात संभागो भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, रीवा और जबलपुर में प्रस्फुटन समितियों के साथ संभाग स्तरीय सम्मलेन का आयोजन |

डॉ. अजय शंकर मेहता जी और श्री प्रदीप पांडे जी ने संभाला जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष का दायित्व |

 

 
रिपोर्ट- जिला स्तरीय

कपिल धारा से अब सिंचित खेती कर सकेगा मजिद का परिवार

पहले सिंचाई का साधन नही था। अब इस वर्ष कपिलधारा कूप बन रहा है। जिससे मुझे खेती से लाभ होगा और मेरी आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी। यह कहना है ग्राम पंचायत बनिया टोला जनपद मझौली के माजिद का। माजिद बताते हैं कि उनकी ढाई एकड खेती की भूमि परिवार के अन्य लोगों के पास भी सिंचाई का कोई साधन नही था। कपिलधारा कूप मिल जाने से मेरे तथा मेरे परिवार की खेती योग्य लगीाग १४ एकड़ जमीन इससे सिंचित हो जायेगी। कूप को पूरे परिवार के लोगों ने ही मजदूरी करके तैयार किया है। घर के लोगों ने इस काम में रोजगार के अवसर पायें हैं। उपयंत्री श्री सूरज सिंह किरार ने बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी स्कीम -म.प्र. अंतर्गत यह कपिलधारा कूप २ लाख ४० हजार की लागत से बनाया जा रहा है।
जिसमें अभी तक ९०० मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध हो चुका है। अभी कूप निर्माण का कार्य चल रहा है। कुएँ में पर्याप्त मात्रा में पानी है। इसका उपयोग करते हुए उन्होंन सब्जियाँ भी पैदा करना प्रारंभ कर दिया है। सिंचाई का साधन मिल जाने से अब वह अपनी तथा अपने परिवार की खेती को सिंचित कर सकेगा। माजिद ने बताया कि उन्होंने अपने खेत में पहली बार सब्जी लगाई है। इसमें आलू, गोभी, टमाटर, लहसून मिर्ची तथा लाल भाजी शामिल है। माजिद तथा उसका पूरा परिवार कपिलधारा कूप पाकर खुश है। अब वह अपनी खेती को सींचकर लाभ की खेती कर सकेगा।

शिवप्रसाद सोनी, मीडिया अधिकारी

जिला पंचायत सीधी

स्वैच्छिक प्रयासों से ग्राम विकास को प्रतिबद्ध बोरखेडी

सीहोर जिले के नसरुल्लागंज की गुरु सिंगाजी ग्राम विकास समिति द्वारा बोरखेडी गांव में स्वैच्छिक प्रयास से ग्राम विकास का आधार तैयार किया जा रहा है। जिसमें शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुचाने के लिए समिति ने लगातार प्रचार-प्रसार किया। ग्राम विकास के तहत गांव में हरियाली उत्सव मनाया गया। नंदन निर्मल ग्राम सप्ताह के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में जनपद पंचायत के मुखय कार्यपालन अधिकारी श्री अनिल कोचर एवं जिला समन्वयक, विकासखण्ड समन्वक व प्रस्फुटन समिति के सभी सदस्यों के अलावा ग्राम के लगभग २५० व्यक्ति उपस्थित हुए। इस मौके पर श्री अनिल कोचर ने समग्र स्वच्छता अभियान के उद्‌देश्यों एवं परिणामों से अवगत कराया। इसके अलावा गांव में स्वैच्छिक भाव से शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, स्वच्छता आदि विषयों में अनेक कार्य किए गए हैं।
शिक्षा- स्कूल चलें हम अभियान के अन्तर्गत ग्राम बोरखेडी के माध्यमिक शाला में ३०, प्राथमिक शाला में १७ बच्चों का एवं एक अन्य हाईस्कूल में १८ बालक-बालिकाओं का प्रवेश कराया। कक्षा १० वी में ५ बालिकाओं का प्रवेश कन्या नसरुल्लागंज में कराया गया। इस प्रकार १०० प्रतिशत बच्चों को प्रवेश एवं स्कूल में नियमतीकरण कराया गया।
नशामुक्ति - २५ लोगों को नशामुक्त किया एवं बच्चों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया।
वृक्षारोपण - स्कूल परिसर एवं मंदिर परिसर में २० पौधों का रोपण किया।
ऊर्जा संरक्षण - आगामी दीपावली पर गांव को पूर्ण सी.एफ.एल. करने का निश्चय किया गया।
जन सूचना केन्द्र - शासकीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार तथा हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने की दृष्टि से जनसूचना केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। जहां शासन की विभिन्न विकास योजनाओं से संबंधित पोस्टर बैनर, पुस्तकें, ब्रोशर आदि रखे हैं। संस्कार केन्द्र के माध्यम से बालक एवं बालिकाओं के लिए कक्षाएं भी लगाई जाती हैं।
स्वच्छता अभियान - प्रस्फुटन समिति की अगवाई में नियमित रूप से ग्राम की नालियों की साफ-सफाई की जा रही है। कीचड़ की समस्या से निजात है।

उजाले की ओर...

गुना जिले का भुलाय गाँव शाम होते ही रोशनी से जगमगा उठता है। बिजली चली जाये तो भी स्ट्रीट लाइट की दूधिया रोशनी बरकरार रहती है, क्योंकि गाँव का अपना इनवर्टर चलित लाइट सिस्टम है। सौ प्रतिशत सी.एफ.एल. इस गाँव के हर घर में मीटर लगे हैं, जो बिजली चोरी मुक्त ग्राम का अनुकरणीय उदाहरण है। पूर्णतः गौ ग्राम भुलाय के प्रत्येक घर में भूनाडेप बनाने के प्रयास के साथ यहाँ जैविक खेती का रकबा बढ़ता जा रहा है। बच्चे संस्कार केन्द्र में संस्कारित हो रहे हैं, साथ ही गाँव शराब मुक्त ग्राम बनने को है। जन सूचना केन्द्र में शासकीय योजनाओं की जानकारी व क्रियान्वयन का हल मिल रहा है। यदि भुलाय गाँव की तरह अन्य गाँव भी प्रयास करें तो प्रदेश विकास की अवधारणा सुनिश्चित ही आकार ले लेगी।



वर्तमान समय में बिजली संकट बड़ी समस्या है, यह समस्या महानगर, नगर से होते हुए सुदूर अंचल में बसे गाँव तक और बढ़ जाती है। इस समस्या को बिजली का अपव्यय व चोरी ने और बढ़ाया है। इसके लिये सरकार चिंतित है। प्रदेश सरकार के इस बजट में तो यहाँ तक प्रावधान है कि जिस गाँव में बिजली चोरी व अपव्यय जो औसतन ४० प्रतिशत है यदि घट कर १० प्रतिशत हो गया तो शासन उस गाँव के निर्माण कार्यों पर पुरूस्कार स्वरूप एक लाख रुपये खर्च करेगी।
यदि बिजली का अपव्यय ४० से १० प्रतिशत तक आ गया तो प्रदेश में स्वतः पर्याप्त बिजली दी जा सकती है तब बिजली कटौती की कहीं कोई समस्या ही नहीं होगी। विचार आकार का आधार होता है। इस विचार को क्रियान्वित करना अंसभव बिल्कुल नहीं है इसे साबित कर दिखाया है म.प्र. के गुना जिले के राधौगढ़ विकासखण्ड के भुलाय गाँव ने। लगभग १२५० आबादी से भरा यह गाँव जिला मुख्यालय से ४० किलोमीटर दूर स्थित है। अनेक समस्याओं से घिरे इस गाँव में भी बमुश्किल ४६ घंटे ही बिजली रहती थी। जबतब अंधेरा रहता सो लग। बिजली की समस्या को लेकर प्रस्फुटन समिति सदस्यों ने जन अभियान परिषद्‌ के विकासखण्ड समन्वयक लोकेन्द्र सिंह लाखनोत से चर्चा कर ग्रामवासियों की बैठक रखी।



ग्राम चौपाल में सभी ग्रामीणों ने अपने अपने मत रखे। कोई अंधेरे से होने वाली परेशानी गिना रहा था तो कोई सिंचाई न हो पाने की मजबूरी। समस्याओं का दौर पूरा हुआ। प्रस्फुटन समिति अध्यक्ष भगत सिंह ने समाधान को लेकर बात शुरू की और पूछा कि आप लोग वाकई इसका हल चाहते हैं। सबने कहा हाँ बिल्कुल। भगत सिंह बोले तो मेरी बात माननी होगी। हाँ बिल्कुल मानेंगे... तेज स्वर में नेक आवाजें गूंजी।
प्रस्फुटन समिति अध्यक्ष ने चुप्पी का पल भर इंतजार किया फिर बोला सबसे पहला काम हम बिजली चोरी नहीं करेंगे। फिर फुस्फुसाहट शुरू हुई। किसी ने जोर से कहा हम चोरी कहां करते हैं हम तो बस तार से खेच कर बिजली लेते हैं। इस पर विकासखण्ड समन्वयक ने समझाया यही तो बिजली चोरी है। प्रस्फुटन समिति के अध्यक्ष श्री भगत सिंह ने स्पष्ट किया कि यहाँ घरों में न मीटर है और न ही केबल डली है। समस्या को जान उसी समय कार्ययोजना बनी। इसी दौरान लोकेन्द्र सिंह ने सी.एफ.एल. बल्ब लगवाकर बिजली बचाने को लेकर भी बातचीत की। रात्रि विश्राम के दौरान सारी बातें तय हो गयी दूसरे दिन प्रस्फुटन समिति के अध्यक्ष भगतसिंह ने, सरपंच कल्याण सिंह, सदस्य हरीसिंह व, गोविन्द सिंह के साथ विद्युत विभाग से संपर्क कर मीटर लगाने के लिये आवेदन दिया।
भुलाय की प्रस्फुटन समिति ने बातचीत का सिलसिला जारी रखा, लगभग एक माह में गाँव के हर घर में इलेक्ट्रानिक मीटर लगा दिये गये तथा नई सर्विस लाइन भी डाल दी गयी। इस तरह पूरा गाँव १०० प्रतिशत बिजली चोरी मुक्त ग्राम बन गया।
अब प्रस्फुटन समिति के लोगों ने अगला अभियान छेड़ा सी.एफ.एल. गाँव बनाने का। पूरे गाँव ने मिलकर निर्णय लिया और काम में जुट गये। सर्वेक्षण में पाये गये पीले बल्बों को बदलने का सिलसिला चला और ३० से ३५ दिनों में गाँव पूर्ण सी.एफ.एल. गाँव बन गया। प्रस्फुटन समिति ने घरघर रोशन करने के साथ आगे बीड़ा उठाया गाँव की हर गली को रोशन करने का। सलाह मशवरा कर सम्पूर्ण गाँव को रोशन करने का प्रस्ताव ग्राम सभा में रखा गया। ग्राम सभा में तय किया गया कि स्ट्रीट लाईट जलाने के लिये बैटरी इन्वर्टर के माध्यम से संचालित की जाना चाहिए। सबकी सहमति बनी, सरपंच श्री कल्याण सिंह ने खर्च के लिये ८०,००० रुपये का प्रस्ताव बनाकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी से स्वीकृत करवाया। राशि प्राप्त होते ही प्रस्फुटन समिति सदस्यों ने २००० वाट की दो बैटरिया, इन्वर्टर और ३० सी.एफ.एल. खरीदे और फिर कनेक्शन लाईन बिछायी गयी। अब गाँव में बिजली हो अथवा नही गाँव दूधिया रोशनी से जगमगाता है।



अपने गाँव को रोशन कर समिति सदस्यों ने इस और ध्यान दिया कि हर घर में एक गाय जरूर हो। गाँव का सर्वे किया गया। सर्वे में पाया गया कि गाँव के २० घरों में गाय नहीं हैं। प्रस्फुटन समिति के सदस्यों ने लगभग तीन माह तक लगातार प्रयास किया और गाँव के शेष २० घरों में गाय खरीदने की व्यवस्था करवायी और गाँव को १०० प्रतिशत गौ ग्राम बना दिया। इसी के साथ गाँव में स्थित गौ शाला का संचालन भी शुरू कर दिया गया। इस गौ शाला में जैविक खाद का निर्माण किया जाता है तथा हर घर में भी भू नाडेप बनाकर जैविक खाद तैयार किया जा रहा है।
प्रस्फुटन समिति अध्यक्ष भगत सिंह ने बताया कि गाँव में पौधरोपण के बाद उनका संरक्षण हम में से ही पौधे के पालकों द्वारा किया जाता है। गाँव जल्दी ही शराब मुक्त गाँव हो जायेगा। संभाग, जिला व विकासखण्ड तीनों समन्वयकों ने अपने प्रवास के दौरान हर घर में गाय का होना, भू नाडेप के माध्यम से कचरे का निपटान कर जैविक खाद का निर्माण, संस्कार शिक्षा का बच्चों के व्यवहार पर सर, जन सूचना केन्द्र का संचालन, अपनी और गाँव की साफसफाई का खुद ध्यान रखना ये सब अपनी आँखों से देखा।
शाम होते ही दूधिया रोशनी से गाँव जगमगा उठा, घर, आंगन, गलीगली में सी.एफ.एल. जगमगा रहे थे। तभी बिजली चली गयी लेकिन महसूस नहीं हुआ स्ट्रीट लाई यथावत जल रही थी। गाँव का पना इनवर्टर चलित लाईट सिस्टम काम कर रहा था। बाहर चौपाल पर गाँव के बच्चे स्ट्रीट लाइट तले मजे से पढ़ रहे थे। गाँव का भविष्य अपने कार्य में लगा था और वर्तमान संतुष्ट था। तभी भगत सिंह ने आगे बढ़कर कहा अब हमारा गाँव बिजली बचत में सबसे आगे है। वाकई ग्राम भुलाय ने बिजली बचत का आदर्श मॉडल खड़ा कर दिया था। शायद यही है ऊर्जा सरंक्षण का वह मॉडल जिसे सरकार ने खड़ा करने की कल्पना की है।


रंजना चितले

पूर्ण सी.एफ.एल. गाँव लक्ष्मणपुर

ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है। इसे चरितार्थ किया है रीवा जिले की ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति लक्ष्मणपुर ने। समिति ने ग्राम वासियों के सहयोग से लक्ष्मणपुर गाँव को पूर्ण सी.एफ.एल. किया है। गाँव को पूर्ण सी.एफ.एल. करने के प्रारंभिक चरण में सर्वे किया गया। सर्वे में पाया गया कि गाँव में सिर्फ २० प्रतिशत घरों में ही सी.एफ.एल. लगे हुए हैं।
चूँकि गाँव को पूर्ण सी.एफ.एल. करने का लक्ष्य था। इसके लिए समिति सदस्यों ने वाट मीटर द्वारा प्रदर्शन भी किया। लोगों को प्रस्फुटन समिति द्वारा साधारण बल्ब की जगह सी.एफ.एल. का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। इस अभियान में समस्या तब खड़ी हुई जब गाँव के निर्धन परिवारों ने अपनी आर्थिक स्थिति के कारण सी.एफ.एल. खरीदने में समर्थता जताई, तब समिति ने ८५ निर्धन परिवारों की सूची बनाकर जिला प्रशासन को भेजी। जिला प्रशासन द्वारा इन परिवारों के लिए सी.एफ.एल. की व्यवस्था कराकर ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है'' विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल के प्रतिनिधि श्री राजेश पाण्डेय ने ८५ गरीब निर्धन परिवारों को निःशुल्क सी.एफ.एल. बल्ब वितरित कर ग्राम को पूर्ण सी.एफ.एल. युक्त घोषित किया।
इस अवसर पर श्री पाण्डेय ने कहा कि ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति की सक्रियता ने आज ग्राम को पूर्ण सी.एफ.एल. युक्त बनाकर सिद्घ कर दिया कि कोई भी कार्य यदि पूर्ण लगन के साथ किया जाए तो हर संभव कार्य भी संभव हो सकता है। कार्यक्रम में शामिल अतिथियों द्वारा प्रस्फुटन समिति द्वारा किये गये कार्य की प्रशंसा की गयी। विशिष्ट अतिथियों में जनपद पंचायत रीवा की अध्यक्षा श्रीमती निशा साकेत, मण्डल ध्यक्ष श्री रणवीर सिंह, जनपद सदस्य श्री पारस नाथ कुशवाहा, जनपद पंचायत रीवा के समग्र स्वच्छता के नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश मिश्रा एवं विद्युत मण्डल के कार्यपालन यंत्री श्री आर.पी. कान्यकुब्ज आदि उपस्थित थे।



अध्यक्ष, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति लक्ष्मणपुर जिला रीवा

पाँच सौ बोरियों का बोरी बंधान बनाया

हम प्राकृतिक स्त्रोतों एवं संसाधनों का दोहन जीवन की शुरूआत से ही कर रहे हैं, सदियों से भूमिगत जल का उपयोग कर रहे हैं, पर हमने जल संरक्षण और संवर्धन के लिये कोई उपाय नही किये। परिणाम स्वरूप भूमिगत जल का स्तर काफी नीचे चला गया है और बहते पानी को रोका नही जा रहा है। अब जरूरत है, जल को वापस भूमि में पहुँचाने की ताकि यह चक्र निरन्तर चलता रहे, आवश्यकता है जल की खेती करने की। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए रीवा जिले की ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति खौर में प्रथम चरण में बिछिया नदी पर बोरी बंधान का लक्ष्य रखा गया। जिसमें ग्राम खौर, लक्ष्मणपुर, कनौजा की प्रस्फुटन समितियों द्वारा क्रमशः २००, १००, १०० बोरियों व खौर ग्राम सरपंच के १०० बोरियों के सहयोग से कुल ५०० बोरियों को एकत्रित कर बिछिया नदी पर बोरी बंधान किया गया। सर्वप्रथम १०३ लोगों द्वारा नदी के जट्‌ठा घाट की साफ सफाई की गई और फिर दो दिन १८ घण्टे तक निःशुल्क श्रमदान कर बोरीबंधान का कार्य पूर्ण किया। अब यहाँ बोरीबंधान के कारण पर्याप्त मात्रा में पानी एकत्रित हो गया है, जिसका उपयोग आज ग्रामवासियों द्वारा पीने व खेती में किया जा रहा है। इससे स्थानीय हैडपंप, कुँओं का जल स्तर बढ़ गया है। जल संरचना को लेकर समिति के प्रयास को देख गाँव वालों का भी जल संरक्षण व संवर्धन की ओर रुझान बढ़ रहा है।


अध्यक्ष, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति खौर जिला रीवा


तीन सौ अस्सी बोरियों का बोरी बंधान

मण्डला जिले के बिछिया विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाले प्रस्फुटन ग्राम लफरा में प्रस्फुटन समिति ग्रामीणों के सहयोग से जल संरक्षण पर कार्य कर रही है। हाल ही में गाँव के पास सुरपन नदी के ऊपर ३८० बोरियों का बोरी बंधान बनाया गया। इस बांध की लंबाई ४५ मी. तथा चौड़ाई १.५ मी. है। जिससे लफरा गाँव सहित आसपास के चार गाँव भी लांभावित हो रहे हैं और ५० एकड़ भूमि की सिंचाई की जा रही है। जल समस्या से निपटने के लिए प्रस्फुटन समिति एवं ग्रामीणों ने एक सराहनीय प्रयास किया है।


अध्यक्ष, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति लफरा जिला मण्डला



दो हजार बोरियों से बना बोरीबंधान

मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद्‌ की अनुकरणीय पहल पर जबलपुर संभाग में कटनी जिले के विकासखण्ड विजयराघवगढ़ की ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति बंजारी के सदस्यों ने २००० बोरियों का बोरीबंधान बनाया। समिति के सदस्यों ने गाँव के पास झपावन नदी में तीन स्थानों का चयन कर ग्राम सभा के सामने बोरीबंधान करने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद ग्राम पंचायत बंजारी की सरपंच श्रीमती सफीना बी के सहयोग से तीन स्थानों में लगभग २ हजार बोरियों से बोरी बंधान कर नदी के जल को रोका गया है। बोरी बंधान बनने से गाँव के किसान प्रसन्न हैं। यहाँ पशुओं को पीने का पानी उपलब्ध हो गया है। इस कार्य में ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के सदस्यों के लावा बंजारी ग्राम के लोग तथा स्पंदन ग्रामों के सदस्यों ने भी श्रमदान किया।


अध्यक्ष, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति बंजारी, जिला कटनी

परिश्रम से नहर का प्रस्फुटन


पिछले कई वर्षों से कम वर्षा के कारण म.प्र. में लगातार जल संकट बढ़ा है। पानी की उपलब्धता कम हुई है। पानी की इसी विकट समस्या से प्रदेश के बालाघाट जिले का बैहर विकासखण्ड भी जूझ रहा था। भीषण गर्मी और पानी के भाव से नदी, तालाब सूखने लगे। पशु, पक्षी मरने लगे। जल संकट से परेशान इस क्षेत्र में जन अभियान परिषद्‌ के विकासखण्ड समन्वयक भरत महरोलिया जब क्षेत्र भ्रमण के लिए गया तो मन बैचेन हो उठा उसे लगा इस समस्या के लिए मैं करू तो क्या करूं?
इसी उलझन में दिन बीत रहे थे तभी अपने प्रवास क्रम में एक दिन भरत महरोलिया विकासखण्ड बैहर से ४५ किलोमीटर दक्षिण में बसे पस्फुटन ग्राम हर्रानाला में भ्रमण के लिए गया। रात्रि विश्राम के दौरान गाँव के लोगों से समस्या पूछी तो एक स्वर में पानी की माँग उठी। तभी ८० बर्ष के बुजुर्ग कक्का ने जोर से झल्लाकर कहा रे भइया हमार लिये कछु करनो ई हे तो पानी ला के दो।' भरत ने कुछ रुककर ग्राम विकास को लेकर आगे बात शुरू की। बुजुर्ग कक्का फिर झल्लाये याँ बिना पानी के हमारे जनावर मर रिये हे.... काल हम भी मरी जावंगा... या बात थारे समझई मे नी आरी हे.... तू फिर बिकासबिकास करें जा रियो हे मोड़ा..।' कहकर कक्का की आंखे पनीली हो गई। आगे कुछ कहने सुनने का साहस नहीं किया भरत ने। चौपाल समाप्त हुई, गाँव वाले चले गए। उस रात भरत का रात्रि विश्राम उसी गाँव में था। उसने सारी रात खुली आंख काटी। आंखों के सामने उस बुजुर्ग का बेबस चेहरा घूमता रहा। भरत सोचने लगा पानी की समस्या को कैसे दूर किया जाये? आखिर प्रकृति के प्रकोप के आगे सभी बेबस हैं, लाचार हैं, इसी उधेड़बुन में सुबह हो गई सुबह भरत ने जन भियान परिषद द्वारा बनाई गई हर्रानाला की ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के सदस्यों से पूछा यहाँ कही कोई पानी का स्त्रोत है क्या?' काफी सोच विचार कर प्रस्फुटन समिति के ध्यक्ष श्री रामलाल उईके ने बताया कि यहाँ से २ कि.मी. की दूरी पर ५०० फीट ऊँची पहाड़ी है जो १.५ कि.मी . तक फैली है। वहाँ एक झरना बहता है। भरत को आशा की किरण दिखी...।
उसने सब कुछ छोड़ वहाँ जाने का कार्यक्रम बनाया। प्रस्फुटन समिति सदस्यों के साथ वह पहाड़ी पर पहुँचा। वाकई पहाड़ी से पानी की धारा इतनी तेजी से गिर रही थी मानो पाँच हार्स पावर की मोटर से पानी पम्प किया जा रहा हो। यह पानी यूँ ही व्यर्थ बह रहा था। इस बहते पानी को देख भरत विचार करने लगा कि इसे संचित कैसे किया जाये? उसी क्षण समाधान जन्मा..., क्यों न यहाँ से गाँव तक नहर खोद पानी गाँव ले जाया जाये। भरत ने प्रस्फुटन समिति के साथियों की तरफ देखा। वे समझ गये कि हमारे विकासखण्ड समन्वयक ने जरूर कोई योजना बना ली है। सचिव श्री रेवालाल उईके ने पूछा भरत जी कहिये क्या करें, इस पानी का? भरत ने नहर बनाने का प्रस्ताव रखा...। उन परिश्रमी नायकों की आखें उत्साह से चमक उठी सबने एक साथ स्वीकृति दी। सभी युवाओ को निरन्तर प्रेरणा देने का कार्य ग्रामीण श्री मंगरू सिंह ने किया।
पानी की समस्या के समाधान के लिए पुनः गाँव में बैठक हुई। इस बैठक में प्रस्फुटन गाँव हर्रानाला के साथ दो स्पदंन गाँव बम्हनी और सारद के आदिवासी किसान भी शामिल हुए। नहर खोदने को लेकर विचार किया गया। दूरी और आकार भी तय हुआ। सबने ४कि.मी. लम्बी, १.२ फीट चौड़ी और २ फीट गहरी नहर खोदने का संकल्प लिया। भरत हर्रानाला के लोगों के उत्साह को देख विस्मित था। इन विपन्न आदिवासियों ने न सरकार की तरफ देखा न अनुदान की मांग की। सब एक साथ उठ खड़े हुए अपनी समस्या का समाधान करने। यही तो है वास्तविक भारत का मानस। ४० लोगों ने ३० दिनों तक कड़ा परिश्रम किया और भरत की कल्पना को आकार दे दिया। ४कि.मी. लम्बी, १.२फीट चौड़ी और २फीट गहरी नहर बन गई।जिसमें पानी की तेज धार बह रही थी...। भरत ने उस दिन ग्रामीणों के चेहरे पर संतुष्टी के भाव देखे... कहीं कोई विलाप नहीं था...। कक्का भी मुस्करा रहे थे। उनके चेहरे की हर लकीर पर मुस्कुराहट थी। अब भरत ग्रामीणों के लिए मात्र विकासखण्ड समन्वयक न रहकर उनका अपना पानी वाला भईया बन गया था। मानवीय संबंध का इससे बड़ा हसास और क्या हो सकता है? पानी का उपयोग शुरू हुआ। किसानों ने खेतों को पानी पिलाया और अपने मवेशियों को भी पिलाया। गली बैठक में उत्साह दूना था। प्रस्फुटन समिति सदस्यों ने प्रस्ताव रखा कि यदि पाइप लाइन बिछ जाये तो इस पानी का पीने में उपयोग किया जा सकता है। प्रस्ताव अच्छा था लेकिन इस कार्य को करने में अधिक राशि की जरूरत थी। ग्रामीणों से यह राशि एकत्र करना संभव नहीं था। आपसी सलाहमशवरे के बाद प्रस्फुटन समिति सदस्यों ने यह मांग शासन व जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखी।
सामूहिक श्रमदान से नहर निर्माण और आगे पेयजल की व्यवस्था के प्रस्ताव को तत्कालीन जिला कलेक्टर श्री गुलशन बामरा ने सराहा और प्रस्फुटन समिति की मांग को तुरंत स्वीकार कर लिया गया।
कुछ दिनों बाद जिला प्रशासन के निर्णय पर इसे नलजल योजना में शामिल किया गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा पाइप लाइन बिछा दी गई और प्रस्फुटन गाँव हर्रानाला, स्पंदन ग्राम बम्हनी एवं सारद में दोदो पीने के पानी की टंकिया भी रखवा दी गई। देखते-देखते पहाड़ का पानी नहर से होकर गाँव में और फिर घरघर जा पहुँचा। पानी के भाव से हाहाकार करते इस गाँव के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। प्रस्फुटन समितियों के इस कार्य को आसपास के रहवासी, गाँव के लोगों ने सराहा, प्रशासन ने सराहा। और क्षेत्र के विधायक श्री भगत नेताम ने सराहा।


-रंजना चितले

पैतीस बोरी बंधान कर रचा इतिहास

जन अभियान परिषद्‌ की प्रस्फुटन समितियों द्वारा जन भागीदारी से अच्छा प्रयास किया जा रहा है। घंसौर विकासखण्ड में तेरह ग्रामों को सी.एफ.एल. बनाना और जल संरक्षण के लिए बोरी बंधान निर्माण करने का जो कार्य किया गया है वह प्रशंसनीय है, आगे भी ऐसे ही प्रयासों की आवश्यकता है।'


-श्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री


जन अभियान परिषद्‌ की प्रस्फुटन समितियों द्वारा जन भागीदारी से अच्छा प्रयास किया जा रहा है। घंसौर विकासखण्ड में १३ ग्रामों को सी.एफ.एल. बनाना और जल संरक्षण के लिए बोरी बंधान का निर्माण करने का जो कार्य किया गया है वह प्रशंसनीय है, आगे भी ऐसे ही प्रयासों की आवश्यकता है। यह बात मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने वनवासी यात्रा के दौरान कही। क्षेत्र प्रवास के समय मुख्यमंत्री को जिला कलेक्टर श्री मनोहर दुबे ने घंसौर विकासखण्ड में प्रस्फुटन समितियों द्वारा ३५ बोरी बंधानों के निर्माण की जानकारी दी थी। इन कार्यों की मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रशंसा करते हुए लगातार यह प्रयास जारी रखने का आह्वान किया।
उल्लेखनीय है कि म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा गठित ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों द्वारा प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सिवनी जिले के घंसौर विकासखण्ड के अंतर्गत ११ प्रस्फुटन समितियों ने एक साथ ३५ बोरी बंधान बनाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सुदूर वनवासी अंचल घंसौर में पानी की समस्या को देखते हुए बोरी बंधान निर्माण के लिए सर्वप्रथम सभी गाँवों में जल के स्त्रोतों का वर्गीकरण व स्थानों का चिंहाकन किया गया। इसके पश्चात बोरियों को इकट्ठा कर लोगों से श्रमदान करने की पील की गई। लोगों की सहमति के बाद पहला बोरीबंधान सर्रा गाँव में बनाया गया।
जहाँ लगभग ५० मीटर चौड़े क्षेत्र को बांधा गया। इस कार्य का निरीक्षण करने के लिए स्थानीय जन प्रतिनिधि, जिला कलेक्टर श्री मनोहर दुबे व अन्य शासकीय अधिकारी भी आए। घंसौर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एन.के. साहू ने ९ बोरीबंधानों का निरीक्षण किया व कार्यों की सराहना की। स्थानीय विधायक श्रीमती शशि ठाकुर ने गोकलथाना गाँव में किए गए बोरी बंधान का अवलोकन किया। यह पहली बार हुआ है जब एक विकासखण्ड में ३५ बोरी बंधान बनाए गए हों। सीमित साधनों से बनाए गए इन बोरी बंधानों से लोगों की न केवल पीने के पानी की समस्या हल हुई है बल्कि खेतों के लिए भी पानी उपलब्ध हुआ है।वर्तमान में ६६० किसान इन बंधानों से सिंचाई कर रहे हैं। इन बोरी बंधानों को देख आसपास के अन्य गाँव प्रेरित हो रहे हैं। इन समितियों ने श्रमदान व सामूहिक भागीदारी का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।


महेश पटले विकासखण्ड समन्वयक घंसौर, सिवनी, म.प्र. ज.अ.प.

जल संरक्षण का अनुकरणीय कार्य
दो बांध बनाकर पानी उपलब्ध कराया


डिण्डौरी जिले में विकासखण्ड डिण्डौरी बजाग के अंतर्गत ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति गीधा में जल संरक्षण के अंतर्गत दो अस्थायी कच्चे नालों पर बंधान कार्य किया गया जिसमें समिति के १० सदस्य एवं समुदाय के ५ लोगों ने श्रमदान किया। पहले बांध की लम्बाई २० मीटर, चौड़ाई ४ मीटर एवं ऊँचाई १ मीटर तथा दूसरे बांध की लम्बाई २० मीटर, चौड़ाई ५ मीटर है। इस नाले के बांधने से गाँव को पूरे समय पानी उपलब्ध होगा!

मंडला जिले का प्रथम सी.एफ.एल. गाँव सर्री


मंडला जिले के विकासखण्ड नैनपुर में ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति सर्री विगत तीन वर्षों से गाँव के विकास के लिए कार्य कर रही है। इस गाँव में प्रस्फुटन समिति के मार्गदर्शन में ऊर्जा बचत को लेकर गहन अभियान चलाया गया और देखते-देखते सर्री गाँव जिले का प्रथम सी.एफ.एल. ग्राम बन गया।
सर्री गाँव में ४५० परिवार रहते हैं। आपसी सहमति से ऊर्जा संरक्षण के लिये सर्री में १०० प्रतिशत सी.एफ.एल. बल्ब लगाने की पहल की गई। ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति सर्री एवं ग्रामवासियों ने ग्राम के प्रत्येक घर में १०० प्रतिशत सी.एफ.एल. बल्ब लगाने का संकल्प लिया। ग्रामीण जन क्षेत्र में विद्युत संकट को देखते हुए विद्युत बचत करने के लिए कृत संकल्पित हुए। इस कार्य की शुरू अंत में लोगों में जन जागरुकता लाने के उद्देश्य से ग्राम के प्रत्येक वार्ड में लग लग बैठकें आयोजित की गई। बैठक में वार्ड के सदस्य, सरपंच, जनपद सदस्य, समिति के सदस्य एवं वार्ड की जनता उपस्थित हुई। जिसमें ग्राम विकास से जुड़ी समस्याएँ तथा समाधान के लिए ऊर्जा संरक्षण के संबंध में लोगों को बताया गया और फिर समिति सदस्यों ने प्रत्येक घर जाकर बल्बों का सर्वे किया। सर्वे में ४५० परिवारों में १०० वॉट एवं ६० वॉट के कुल ५३३ पीले बल्ब एवं १३४ सी.एफ.एल. बल्ब पाए गए। जिससे गाँव में प्रत्येक दिन बिजली खपत ५३३०० वॉट हो रही थी। इस सर्वे के आधार पर गाँव में ५०२ सी.एफ.एल. बल्बों की आवश्यकता हुई। जिन्हें समितियों द्वारा लगवाया गया। इनमें ४०७ बल्ब १४ वॉट के एवं ९५ बल्ब ८ वॉट के लगाए गए। इस कार्य में मंडला कलेक्टर श्री के.के. खरे एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रबल सिपाहा का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।


अध्यक्ष ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति सर्री, विकासखण्ड नैनपुर, जिला मंडला


पानी की खेती : जल प्रबंधन का बेहतर विकल्प

कहने में जरूर अटपटा लगता है लेकिन सत्य है कि पानी की खेती होती है। यह एक ऐसी विधा है जिसे जल संरक्षण के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है। जल स्तर बढ़ाने का यह अभिनव प्रयोग है।


भोपाल संभाग के राजगढ़ विकासखण्ड के ग्राम रामपुरिया में इन दिनों पौधरोपण एवं जल संरक्षण के लिए पानी की खेती का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है। इससे ग्रामीण किसान अपने खेतों में भरपूर सिंचाई कर सकेंगे तथा गांव में पीने के पानी की समस्या भी हल हो सकेगी।
प्रदेश में पानी की खेती के अपनी तरह के इस अनूठे प्रयोग का बीड़ा उठाया है, राजगढ़ जिले में गठित ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के सदस्यों ने। सुरक्षित भविष्य को देखते हुए इस प्रयास में संपूर्ण गाँव अपने अपने स्तर पर सहयोग कर रहा है।
आयोजन किया गया। इस शिविर में जिला कलेक्टर ने कृषि विभाग, जिले एवं विकासखण्ड स्तरीय सभी अधिकारियों के साथ लगभग ३ घंटों तक पानी की खेती का अवलोकन किया। जिला कलेक्टर ने ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के सहयोग से २० बीघा जमीन पर पानी की खेती के रूप में विकसित अभिवन प्रयोग को घंटो निहारा। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग की समस्या समाधान, भूजल स्तर में सुधार, गाँव की पेयजल समस्या का निपटारा, वृहद स्तर पर पौधारोपण, सिंचाई के उचित माध्यम के लिए इस प्रोजेक्ट की सराहना की। उन्होंने जिले की अन्य ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के माध्यम से इस कार्य को विस्तारित करने को कहा।


शिवशंकर शर्मा विकासखण्ड समन्वयक, राजगढ़, म.प्र. ज.अ.प.

लगाए ४ हजार पौधे


पानी को संग्रहित करने की दिशा में ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति ने ५ से १० फीट के वर्गाकार क्षेत्र में करीब ४ हजार पौधों को रोपित भी किया है, जिसमें बांस, नीम, गुलमोहर, जामुन, शीशम सहित फलदार और छायादार वृक्षों के पौधे शामिल है। इस तरह प्रत्येक वर्ग के चारों और पौधों के द्वारा जल को भी सरंक्षित किया जा रहा है।


दूधिया रोशनी से जगमगा रहे हैं तीन प्रस्फुटन गाँव


म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा ग्राम विकास की परिकल्पना को साकार करने के लिए ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों द्वारा विकास के कई आयामों पर कार्य किए जा रहे हैं। जिसमें ऊर्जा बचत की दिशा में विदिशा जिले में प्रस्फुटन समितियों ने विकासखण्ड विदिशा के बल्लाखेड़ी, लटेरी के उलाखेड़ी, बसोदा के बगरौदा गाँव में अनोखी पहल की। अपने ग्रामों को १०० प्रतिशत सी.एफ.एल. ग्राम बनाने के लिए मात्र १५ दिनों में ग्राम सर्वे कर प्रत्येक ग्रामवासी को सी.एफ.एल. की उपयोगिता और उसके लाभ के बारे में जानकारी दी। पीले बल्ब हटाकर सी.एफ.एल. बल्ब लगाने का आह्वान किया। प्रत्येक ग्रामवासी ने सी.एफ.एल. ग्राम बनाने की इस मुहिम में सहयोग देकर अपने ग्राम को १०० प्रतिशत सी.एफ.एल. ग्राम बनाया।
जहाँ पूर्व में प्रति गाँव १०,००० वॉट बिजली की खपत प्रतिमाह होती थी। अब वहाँ लगभग १४०० वॉट बिजली ही जल रही है, औसतन प्रति सी.एफ.एल. गाँव ८६०० वॉट बिजली की बचत कर रहा है। १०० प्रतिशत सी.एफ.एल. हुए गाँवों में ब्लॉक स्तर के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण भी किया जा चुका है। प्रस्फुटन समिति सदस्यों द्वारा १०० प्रतिशत सी.एफ.एल. ग्राम बनाने के बाद गली योजना में प्रत्येक घर में मीटर लगवाकर ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है।
जैविक कृषि आधुनिक समय में कृषकों द्वारा लाभ के लिए फसलों पर रासायनिक कीटनाशकों और दवाईयों का छिड़काव किया जाता है। जिससे मिट्टी की उर्वरकता तो कम होती है साथ ही स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है। इन्हीं दुष्प्रभावों से बचने के लिए जब ग्राम सभा में जैविक खाद के महत्व को बताया तो प्रत्येक प्रस्फुटन ग्राम में किसानों ने जैविक कृषि के लिए सराहनीय कदम आगे बढ़ाया। प्रयासों के चलते ब्लॉक विदिशा, ब्लॉक लटेरी, ब्लॉक ग्यारसपुर के प्रस्फुटन गाँवों में जैविक कृषि की जा रही है। इन ग्रामों में शीघ्र ही जैविक ग्राम बनाने का लक्ष्य पूर्ण करने का प्रयत्न जारी है।

वीरेन्द्र सिंह ठाकुर, जिला समन्वयक, विदिशा, म.प्र. ज.अ.प.

स्वयं सेवी संस्थाओं से होगा नियमित संवाद

शासन और शासकीय संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय एवं शासन की जन कल्याणकारी योजनाओं में शासकीय संस्थाओं की सकारात्मक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य शासन द्वारा मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद्‌ के अंतर्गत प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय जन अभियान समिति का गठन किया गया है।
इस जिला स्तरीय जन अभियान समिति में अध्यक्ष होंगे जिले के प्रभारी मंत्री, उपाध्यक्ष जिले के प्रभारी मंत्री द्वारा नियुक्त व्यक्ति, सहसचिव जिला कलेक्टर, सदस्य महासचिव मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत व सदस्य उप संचालक कृषि, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग, वन संरक्षक/वन मण्डलाधिकारी वन विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला स्तरीय बैंकर्स समन्वय समिति के लीड बैंक मैनेजर, जिले के समस्त अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और जिला समन्वयक जन अभियान परिषद्‌ होंगे।
जिला कलेक्टर की अनुशंसा एवं प्रभारी मंत्री की सहमति से एकएक स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता की नियुक्ति की जावेगी। स्वयंसेवी संस्थाओं से नियमित संवाद की कड़ी में स्वैच्छिक संस्थाओं एवं शासकीय विभागों के बीच प्रभावी रूप से समन्वय बनाने एवं समस्याओं के निराकरण के लिए जिला स्तर पर नियमित रूप से सम्मेलन आयोजित किये जायेंगे तथा जिला स्तरीय जन अभियान समिति की बैठक प्रत्येक माह में एक बार निवार्यतः एवं आवश्यकतानुसार कम अंतराल में भी होगी। इस बैठक की अध्यक्षता जिला प्रभारी मंत्री द्वारा की जायेगी।

विकास में जनता की भागीदारी जरूरी :- मुख्यमंत्री

प्रदेश के चहुँमुखी विकास में जनता की भागीदारी आवश्यक है। जब तक जनता अपना खुद का विकास नही करेगी तब तक प्रदेश का विकास संभव है। अकेले सरकार के भरोसे समाज का विकास नहीं हो सकता। हमें जनता की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। यह बात मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने आओ बनाएं अपना म.प्र. के अंतर्गत रीवा जिले के देव तालाब गाँव में लोगों को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि हमें ७ विषयों शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, नशामुक्ति, ऊर्जा संरक्षण, स्वच्छता और जल संरक्षण को लेकर कार्य करना है।
यह कार्य जन अभियान परिषद्‌ के माध्यम से बेहतर हो रहा है। श्री चौहान ने कहा कि इन क्षेत्रों में बेहतर परिणाम लाने के लिए जनता की सहभागिता आवश्यक है। गाँव का विकास गाँव के लोगों के माध्यम से बेहतर हो सकता है। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री ने ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों द्वारा किये जा रहे प्रयासों को सराहनीय बताते हुए समितियों के माध्यम से रीवा जिले के १०० ग्रामों को पूर्ण सी.एफ.एल. ग्राम बनाने का संकल्प दिलाया, साथ ही ३ ग्रामों को पूर्ण सी.एफ.एल. ग्राम भी घोषित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति रामपुर एवं रतनगवाँ के कुछ हितग्राहियों को सी.एफ.एल. वितरित किये।
इसके पूर्व क्षेत्रीय विधायक श्री गिरीश गौतम के नेतृत्व में १० दिनों तक आओ बनायें अपना म.प्र. कार्यक्रम के अन्तर्गत संचालित साईकिल यात्रा के दौरान कई प्रस्फुटन ग्रामों में गरीब हितग्राहियों को सी.एफ.एल. बल्बों का भी वितरण कराया गया। अपने अपने ग्रामों को पूर्ण ऊर्जा स्वावलंबी व ऊर्जा मित्र ग्राम बनाने का संकल्प भी दिलाया गया। कार्यक्रम में जन अभियान परिषद्‌ द्वारा रीवा जिले के पाँच विकासखण्डों की ५३ समितियों ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई।
समितियों ने कार्यक्रम में उनके द्वारा ग्रामों में किये जा रहे विविध सामाजिक व सामुदायिक प्रयासों के फोटो एवं बैनरों का भी प्रदर्शन किया। कुछ समितियों ने मुख्यमंत्री को अपने कार्यों का प्रतिवेदन भी सौंपा। कार्यक्रम में निर्वाचित जन प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों के अतिरिक्त जन अभियान परिषद्‌ का क्षेत्रीय अमला भी उपस्थित था।

प्रवीण पाठक संभाग समन्वयक रीवा, म.प्र.ज.अ.प.

जन भागीदारी से सिलपरा बना पूर्ण सी.एफ.एल. ग्राम

जहाँ प्रदेश में सरकार द्वारा ऊर्जा व बिजली बचाने के लिए नित नये प्रयास किये जा रहे हैं वहीं रीवा विकासखण्ड के ग्राम सिलपरा में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के नेतृत्व में ग्राम वासियों ने पूर्णतः सामुदायिक सहभागिता से अपने ग्राम को पूर्ण सी.एफ.एल. ग्राम बनाया है। ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ला ने सिलपरा ग्राम में ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के विकासखण्ड स्तरीय सम्मेलन में १०० प्रतिशत सी.एफ.एल. ग्राम की घोषणा की। सम्मेलन में श्री शुक्ला ने कहा कि प्रदेश सरकार माननीय मुख्यमंत्री के स्वर्णिम म.प्र. बनाने के सपने को साकार करने के लिए विविध क्षेत्रों में कार्य कर रही है। आज प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन से ज्यादा ऊर्जा बचाने की आवश्यकता है। ऐसे में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों द्वारा किए जा रहे प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि जन अभियान परिषद्‌ को लोक सेवा गारंटी धिनियम के बेहतर प्रचारप्रसार के लिए अपनी भूमिका सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है। जन अभियान परिषद्‌ के क्षेत्रीय कार्यकर्ता एवं अधिकारियों द्वारा जिस समर्पण एवं लगन के साथ कार्य किये जा रहे हैं उसके परिणाम प्रस्फुटन समितियों के कार्यों में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने जिले के अन्य विकासखण्डों में ऊर्जा संरक्षण व समग्र ग्राम विकास के अन्य आयामों पर किए गये कार्यों को देखते हुए १३ ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के पदाधिकारियों को शाल और श्रीफल से सम्मानित किया।


विष्णु प्रसाद नागर, जिला समन्वयक रीवा,म.प्र.ज.अ.प.

मुख्यमंत्री ने किया प्रस्फुटन समिति सदस्यों का सम्मान


खरगोन जिले के भगवानपुरा विकासखण्ड के ग्राम धुलकोट में आयोजित कृषक सम्मेलन में वनवासी सम्मान यात्रा के अन्तर्गत आए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने म.प्र. जन भियान परिषद्‌ द्वारा गठित माँ भगवती ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति, झगड़ी के सदस्यों को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए पुष्पहार पहनाकर सम्मानित किया माँ भगवती ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति द्वारा मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह व धनुषबाण भेंट किया गया। ज्ञात हो कि परिषद्‌ द्वारा गठित धुलकोट महाराष्ट्र की सीमा से सटा हुआ वनवासी अंचल में बसा ग्राम है। समिति के सदस्यों ने वर्षा के जल को सहजने के लिए पूर्णतः जनभागीदारी से ग्राम में ५८० बोरियों व पत्थरों से इन्द्रावती नदी पर बोरीबंधान कर ४.५ कि.मी. लम्बी नहर का निर्माण किया है। इससे १०५ एकड़ जमीन को सिंचित किया जा रहा है। इस नहर से ३९ किसान लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी द्वारा समिति द्वारा किए गए इस कार्य को सराहा गया।

रत्नेश विजयवर्गीय जिला समन्वयक खरगोन, म.प्र. ज.अ.प.

मुख्यमंत्री ने ग्राम हरदा को पूर्णतः नशामुक्त घोषित किया

बुरहानपुर जिले के ग्राम हरदा में प्रस्फुटन समिति सदस्यों ने गाँव में शराब, गुटका व पाऊच विक्रय को प्रतिबंधित कर जनभागीदारी से नशामुक्ति के लिए सराहनीय प्रयास किया है। ग्राम में स्वच्छता, रोजगार सृजन, महिलाओं का सशक्तिकरण एवं विधवा महिलाओं के सम्मान के लिए प्रशंसनीय कार्य किए गए हैं। पिछले दिनों प्रदेश के मुख्मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान वनवासी सम्मान यात्रा के अवसर पर हरदा आए। श्री चौहान ने इस अवसर पर हरदा गाँव को पूर्णतः नशामुक्त गाँव घोषित किया। इस मौके पर ग्राम पंचायत हरदा सरपंच श्री सौभान सिंह चौहान को नशामुक्ति के उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। वनवासी बाहुल्य क्षेत्र का हरदा गाँव आज नशामुक्ति भियान का अनुकरणीय उदाहरण है। यहां सरपंच एवं ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति की मदद से ग्रामीणों ने गुटका, शराब व अन्य नशा करना छोड़ दिया है। अब उन्होंने अन्य गाँवों को भी इन बुराईयों से बचाने का अभियान छेड़ा है। गंभीरपुरा, ईटारिया, बसाली व डोजर गाँव भी शराब, गुटका की बुराईयों से परिवारों को बचाने में जुटे हुए हैं। जिला प्रशासन ने इस गाँव की पहल को आइकॉन के रूप में लेकर पूरे जिले में लागू करने की योजना है। स्वच्छता जागरूकता सप्ताह से पहले गाँव में पॉलीथिन हटा दी गई है। जिला कलेक्टर श्रीमती रेणु पंत व जिला पंचायत सी.ई.ओ . श्री रमेश भंडारी ने अवलोकन के दौरान गाँव के इन अनूठे अभियानों की प्रशंसा की है साथ ही वे अन्य गाँवों में हरदा का प्रेरक उदाहरण भी देते हैं।

राजकुमार मालाकार, वि.ख. समन्वयक, जिलाबुरहानपुर, म.प्र. ज.अ.प.


जिला स्तरीय रिपोर्ट
 

प्रस्फुटन योजना के अंतर्गत हो रही प्रगति की जानकारी

 

स्वयंसेवी संगठनों का संभाग स्तरीय सम्मेलन

म.प्र. जन अभियान परिषद् स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ कार्यशालाएँ व बैठके आयोजित कर सहयोग का समागम करती रही है । परिषद् द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ बैठकों के आयोजन का मूल उद्देश्य प्रशासन व स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है ताकि जनहित से जुडे कार्यों में स्वयंसेवी संस्थाओं की जमीनी समझ, क्षमताओं का उपयोग व भूमिका सुनिश्चित हो सके । इसी सिलसिले को आगे बढाते हुए रीवा संभाग के स्वयंसेवी संगठनों के साथ एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया । 24 अगस्त 2009 को पंडित शम्भुनाथ शुक्ल सभागार में आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता रीवा संभाग के कमिश्नर डॉ. रवीन्द्र पस्तौर ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में ए.पी.एस. विश्वविद्यालय रीवा के कुलपति डॉ. शिवनारायण यादव, म.प्र. जन अभियान परिषद् के अशासकीय सदस्य श्री योगेश ताम्रकार उपस्थित रहे । बैठक में 432 स्वयंसेवी संगठनों के लगभग 550 प्रतिनिधि शामिल हुए ।

बैठक में संभाग आयुक्त ने कहा कि आम आदमी तक शासकीय योजनाओं व सुविधाओं को पहुँचाने के लिए स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है । स्वयंसेवी संगठन संभाग की तकदीर तथा तस्वीर दोनों बदल सकते हैं । उन्होंने बताया कि “केवल शासकीय विभागों के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों का लाभ आम आदमी तक पहुँचना संभव नहीं होता क्योंकि शासकीय विभागों की अपनी सीमाएँ हैं । डॉ. पस्तौर ने कहा कि शासकीय योजनाओं में अशासकीय संस्थाओं की भागीदारी बढाई जाएगी तथा उन्हें सशक्त बनाया जाएगा । म.प्र. जन अभियान परिषद् शासन तथा स्वयंसेवी संगठनों के बीच एक सेतु के रूप में कार्यरत है । जन अभियान परिषद् के माध्यम से शासन तथा जनता के बीच एक बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है ।”

इंदौर संभाग में स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ जिला स्तरीय बैठक

म.प्र. जन अभियान परिषद् ने स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्य विस्तार के उद्देश्य से प्रदेश भर में जिला स्तर पर स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ बैठक का सिलसिला प्रारम्भ किया है । जिला स्तर पर स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ बैठकों के आयोजन का उद्देश्य प्रशासन व स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है ताकि जनहित से जुडे कार्यों में स्वयंसेवी संस्थाओं की जमीनी समझ व क्षमताओं का उपयोग सुनिश्चित हो सके।

इसी प्रक्रिया के तहत माह जुलाई २००९ में इंदौर संभाग के सभी जिलों में स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ बैठकों का आयोजन किया गया । बैठकों में कलेक्टर विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारी तथा ३०६ स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया । आयोजित बैठकों में जिला प्रशासन एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय एवं समझ विकसित करने पर चर्चा की गई ।

इंदौर में ९ जुलाई २००९ को जिला कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैठक कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई । बैठक में म.प्र. ज.अ.प. के संभाग समन्वयक अशोक पाटीदार व जिले के प्रमुख जिला अधिकारियों के अलावा ५५ स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे ।

सुझाव

  •  पौधरोपण कार्यक्रम, स्कूल चलें अभियान, धुआँ रहित गाँव, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण, स्वयं सेवी संस्थाओं की दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित करने के सुझाव दिये गये ।
  • पौधरोपण के लिये स्वयं रूचि रखने वाली संस्थाओं को पौधे उपलब्ध करवाना, शासन की योजनाओं में निविदा प्रक्रिया समाप्त करना, स्वसहायता समूह माइक्रो फायनेंस के नाम पर जो प्रायवेट कंपनियाँ काम कर रही है उन पर रोक लगाई जाए व स्वयंसेवी संस्थाओं की प्रतिमाह बैठक आयोजित की जाए ।

समाधान व मार्गदर्शन

  • कलेक्टर ने योजनाओं में प्रभावशाली क्रियान्वयन के लिए सभी स्वयंसेवी संस्थाओं की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया गया ।
  • जिले में स्वयंसेवी संस्था के उत्कृष्ट कार्यों का अवलोकन सभी संस्थाओं/अधिकारियों द्वारा भ्रमण करना निश्चित किया गया । शहर में कोई भूखा नहीं रहे इस हेतु क्षेत्रवार संस्थाओं की पहचान करने हेतु निर्देशित किया गया।

धार

धार जिले में ७ जुलाई ०९ को प्रभारी कलेक्टर श्री मालसिंह व मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत धार की अध्यक्षत में बैठक का अयोजन कलेक्ट्रेट सभागृह में किया गया । बैठक में धार जिले की ३२ स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। बैठक के अंत में म.प्र ज.अ.प. धार जिला समन्वयक श्री तेजसिंह केशवाल द्वारा उपस्थित सभी शासकीय अधिकारियों एवं स्वयंसेवी संगठनों की ओर से आए प्रतिनिधियों का आभार प्रकट किया गया। संभाग समन्वयक इंदौर समग्र ग्राम विकास में किए जा रहे कार्यों की संक्षेंप में जानकारी दी।

सुझाव

  • पौधरोपण कार्यक्रम, स्कूल चले अभियान, विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे कार्य, संस्थाओं और शासन के मध्य समन्वय तथा शासन की जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जिला प्रशासन को सहयोग आदि पर चर्चा की गई ।
  • वर्षा के पानी को बचाने, गंदे पानी की रिसाईक्लिंग व सेनेटरी नेपकिंन जैसे कार्यों को प्रोत्साहन दिया जाए रोजगार गारंटी योजना में मजदूरी का लाभ देकर पौधरोपण करवाया जा सकता है । मूर्तियाँ विसर्जन रोकने के लिए एक कलेक्शन सेंटर बनाया जाए जिसमें मूर्तियों को एकत्रित कर उनके विर्सजन की उचित व्यवस्था की जाए ।
  • स्वयंसेवी संस्थाओं व विभिन्न विभाग के अधिकारियों की बैठक जिला धार

समाधान व मार्गदर्शन

  • प्रभारी कलेक्टर र्श्री मालसिंह ने बैठक में सुझाव उपरान्त कहा कि शासन की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में स्वयंसेवी संगठनों के सुक्षाव को योजना के रूप में शामिल किया जा सकता है।
  • ए.सी.ई.आ.े श्री आर.के. गुप्ता जिला पंचायत धार ने बैठक में कहा कि जिम्मेदारी बांटने से ही सहयोग बढता है । अपना विकास अनुकरणीय होना चाहिए । त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को विस्तार से समझाते हुए कार्य दौरान आने वाली कठिनाईयों के निराकरण के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया गया ।

जिला झाबुआ

झाबुआ में २८ जुलाई २००९ को जिला कलेक्टर श्री जगदीश शर्मा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागृह में बैठक आयोजित की गई । बैठक में झाबुआ जिले की ४८ स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। बैठक का संचालन म.प्र. जन अभियान परिषद्, झाबुआ जिला समन्वयक श्री संजय अतारे द्वारा किया गया। बैठक में पौधरोपण के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका, स्वयंसेवी संस्थाओं और शासन के मध्य समन्वय तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका, समग्र ग्राम विकास के लिए गठित प्रस्फुटन समूहों द्वारा शासन की कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जिला प्रशासन को सहयोग, स्व सहायता समूहों के सशक्तिकरण हेतु प्रयास पर चर्चा की गई ।

सुझाव -

  •  रोजगार गारन्टी योजना में स्वयं सेवी संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित कि जाए। बाहर की संस्थाओं को करोडो रुपये के प्रोजेक्ट मिले हैं, जिससे स्थानीय संस्थाएं कार्य से वंचित रह जाती हैं, इस पर शासन रोक लगाए।
  • जितने भी तालाब बने हैं सभी का गहरीकरण किया जाए। ७० प्रतिशत से ७५ प्रतिशत लोग पलायन कर गये हैं इसके लिए कारगर प्रयास किये जाने की आवश्यकता है। वर्तमान में पोलीथिन का ज्यादा उपयोग हो रहा हैं उस पर प्रतिबंध लगाया जाए या कम उपयोग कर एक निश्चित जगह एकत्रित किया जाए। ग्लोबल वार्मिंग पर प्रशिक्षण आयोजित कर पॉलीथिन उपयोग को रोका जाए। कागज के विकल्प हेतु कागज के बनाने के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। गांव में प्रत्येक व्यक्ति को वृक्ष संरक्षण की जिम्मेदारी दी जाए। स्व सहायता समूह का फैडरेशन बनना चाहिए।

समस्या व मार्गदर्शन

  •  कलेक्टर जगदीश शर्मा ने कहा कि जो भी काम करना हैं स्वयं करना हैं तथा पूरी सार्थकता के साथ करना है, एक माह में समस्त विभागों से जानकारियाँ एकत्रित कर स्वयंसेवी संगठन को नियमित मार्गदर्शन देने का प्रस्ताव पारित किया गया ।
  •  स्वयंसेवी संगठन को कार्य आवंटन के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत झाबुआ की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाए जिसमें जिले के समस्त जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला समन्वयक मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद् झाबुआ तथा समाज सेवा क्षेत्र के तीन प्रतिनिधि सदस्य होंगे।

जिला खरगोन

३ जुलाई ०९ को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दीपक सिंह व जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संजय सर्राफ की उपस्थिति मे जिला पंचायत के सभागृह में बैठक आयोजित की गई । बैठक में खरगोन जिले की २४ स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि व जिले मे कार्यरत म.प्र. ज.अ.प. खरगोन के विकासखण्ड समन्वयक सम्मिलित हुए। बैठक में पौधरोपण के लिए स्वयं सेवी संस्थाओं की भूमिका, संस्थाओं और शासन के मध्य समन्वय तथा शासन की जन काल्याणकारी योजनाओं के कि्रयान्वयन में स्वयं सेवी सेस्थाओं की भूमिका, समग्र ग्राम विकास के लिए गठित प्रस्फुटन समुहों द्वारा शासन की जन कल्याणकारी योजनाओं के कि्रयान्वयन मे जिला प्रशासन को सहयोग करना आदि विषयों पर चर्चा की गई । बैठक के अन्त में म.प्र जन अभियान परिषद जिला खरगोन के जिला संमन्वयक श्री सुशील बरूआ ने शासकीय अधिकारियों एवं स्वयं सेवी संगठनो की ओर से आये प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया ।

मार्गदर्शन

जिला पचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दीपक सिंह ने शासन की जन कल्याणकारी योजनाओ की जानकारी देते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य समाज के कमजोर वर्ग को शासन की कल्याणकारी योजनाओ का अधिक से अधिक से लाभ दिलाना है।

 बैठक में निर्मल ग्राम स्वच्छता अभियान के तहत गांव में शौचालयों की व्यवस्था, पर्यावरण को समृद्ध बनाने के लिए पौधरोपण जिसमें विशेषकर नीम के पेड लगाने का सुझाव एवं नर्मदा किनारे बसे जिले के लगभग ४० ग्रामों में नर्मदा नदी के किनारे पौधरोपण ,स्वच्छता एवं जल संरक्षण पर विशेष जोर दिया ।

जिला खण्डवा

 २२.०७.०९ को कलेक्टर कार्यालय स्थित सभागार में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री. आलोक सिंह की अध्यक्षता में बैठक संपन्न हुई। बैठक में २० स्वयंसेवी संस्थाओं के अधिकारी/प्रतिनिधियों व जन अभियान परिषद् के विकासखण्ड समन्वयकों की उपस्थिति के साथ ५५ लोगों ने बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में श्री आलोक सिंह ने बताया कि स्वयंसेवी संस्थाएँ इन शासन की योजनाओं के प्रसारण में अहम भूमिका निभा सकती हैं।  

जिला बडवानी

म.प्र. जन अभियान परिषद् के तत्वावधान में ०३ अगस्त ०९ को कलेक्टर श्री एन.बी.एस. राजपूत की उपस्थिति में जिला पंचायत बडवानी के सभा गृह में बैठक आयोजित की गई । बैठक में ७२ स्वयंसेवी संस्थाओं के १०५ पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि सम्मिलित हुए साथ ही म.प्र. जन अभियान परिषद् बडवानी जिले के समस्त अधिकारी व कर्मचारी सम्मिलित हुए।

सुझाव -

  •  पौधरोपण अभियान को स्कूली विद्यार्थियों से जोडना चाहिए ताकि आने वाली पीढी भी पर्यावरण के प्रति जागरूक रहें।
  •  क्षेत्र में जो पहाडयाँ वीरान हैं, उन पहाडयो को प्रशासनिक रूप से अलग-अलग संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंप दी जाये तो पौधरोपण अधिक से अधिक हो सकता हैं, एवं उसका रख-रखाव भी अच्छी तरह हो सकता हैं।
  •  पौधरोपण के लिए शासन की और से पौधरोपण, टीगार्ड एवं वायर फेंसिंग की लागत का खर्च दिया जाना चाहिए।

जिला बुरहानपुर

म.प्र. जन अभियान परिषद् जिला बुरहानपुर और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा १६/०७/०९ को बुरहानपुर के कलेक्टर कार्यालय में मासिक बैठक का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता श्री आर.पी. भारती, अपर कलेक्टर, बुरहानपुर द्वारा की गई। बैठक में २५ स्वयंसेवी संस्थाओं ने भाग लिया ।

समस्याएँ एवं सुझाव

 स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा कई प्रकार की समस्याओं से अपर कलेक्टर महोदय को अवगत कराया गया । जिसमें प्रमुख रूप से स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं को कार्य न मिलना और बाहर से आकर कार्य करने वाली संस्थाओं प्रति शिकायत थी। साथ ही विभागों से मिलने वाले प्रोजेक्ट म.प्र. जन अभियान परिषद के माध्यम से मिलने की बात पर भी जोर दिया गया।

  • शिक्षा से संबंधित बालिका शिक्षा हेतु होस्टल की कमी और उनमें प्रवेश न मिलना।
  • मध्यान्ह भोजन और पुस्तकों आदि की सुविधाएं प्राइवेट स्कूलों को भी मिले। मदरसे में मध्यान्ह भोजन और लडकियों को साईकिल उपलब्ध कराई जावे।
  • पौधरोपण के संबंध में स्वयंसेवी संस्थाओं के अनुसार जिला पंचायत से पौधों हेतु स्वीकृति नहीं मिली और स्वयंसेवी संस्था द्वारा पौधरोपण में किये गये कार्य का मानदेय और हरियाली महोत्सव में प्रचार-प्रसार के शेष भुगतान की भी शिकायत की गई।
  • परिवार परामर्श केन्द्र, महिला हिंसा के मामलों को हल करने में स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जावे। स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं को विभागों की ओर से प्रोजेक्ट नहीं मिलने पर विभागों द्वारा अपेक्षित मार्गदर्शन की कमी भी बताई गई।

श्रमदान से किया पुल निर्माण

जबलपुर संभाग के बालाघाट जिले में मप्र जन अभियान परिषद् के प्रस्फुटन ग्राम धारमारा में श्रमदान से गांव की तस्वीर बदल रही है। दो वर्ष पूर्व ग्राम में स्थित पुलिया के बह जाने से बारिश में ग्रामवासियों को रात गांव के बाहर जंगल में ही बितानी पडती थी क्योंकि आवागमन का यह एक मात्र रास्ता था। नाले में पानी अधिक होने के कारण इनका ब्लॉक मुख्यालय से भी संपर्क टूट जाता था।

ऐसे समय में पलक प्रस्फुटन समूह के युवा सदस्यों ने दो दिवसीय श्रमदान शिविर का आयोजन किया। इस कार्य के लिए म.प्र. जन अभियान परिषद् के विकासखंड समन्वयक सुशील बर्मन ने ग्राम की प्रमुख समस्याओं का निराकरण करने के लिए समिति एवं ग्रामीणों में आपसी सामंजस्य स्थापित किया ।

अब सबसे बडी समस्या थी पानी में बह चुके भारी पोलों को व्यस्थित कैसे किया जाये। पुल निर्माण में ग्रामीण यंत्र कमजोर पड रहे थे किंतु समिति का संकल्प और ग्रामवासियों का विश्वास कमजोर नहीं हुआ। जब सभी लोग एक साथ ताकत लगाते तो पोल एक इंच अवश्य खिसकता। एक-एक इंच खिसकते-खिसकते पहला पोल सही जगह बैठा दिया और देखते ही देखते देर रात्रि तक एक-एक कर तीनों पोल सही जगह बैठा दिए गये । तीन पोल बैठाने का फायदा ये हुआ कि अब यदि एक पोल में कचरा फंस जाएगा तब दूसरे पोल से पानी निकलता रहेगा। चार किलोमीटर ऊँची पहाडी का पानी इन तीनों पोलों से बहता रहेगा । इस तरह से समूह एवं ग्रामवासियों के श्रमदान व आपसी सहयोग से पुल निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।

पुल निर्माण कार्य में प्रस्फुटन समिति के अध्यक्ष-चमरू टीकेश्वर, सचिव अनिल लाल खरे, सूरज बिसेन, नरसू पांच, सम्मेलाल बिसेन, अशोक टिकेश्वर, सूरजलाल, लालचंद कांवरे, संतुलाल बाहे, लालसिंह कांवरे, धर्मदान बिसेन, भोवेलाल बिसेन, म.प्र. जन अभियान परिषद् के जिला समन्वयक श्री कौशलेश तिवारी, विकासखण्ड समन्वयक श्री सुशील बर्मन, राकेश महोबिया तथा ग्राम के अन्य लोगों ने श्रमदान कर पुल का निर्माण किया ।

स्वैच्छिकता की भावना से बदला गांवों का स्वरूप

म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में प्रस्फुटन योजना अन्तर्गत ग्राम के समग्र विकास हेतु ग्रामवासियों को प्रेरित करने के लिए ग्राम स्तर पर प्रस्फुटन समूह का गठन किया गया है ।

सागर संभाग के पन्ना जिले में गठित प्रस्फुटन समूह द्वारा परिषद् व शासन की अवधारणा के अनुरूप ’’समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति का सर्वांगीण विकास‘‘ के लिए ग्राम स्तर पर गतिविधियाँ आयोजित की जा रही है । क्षेत्र भ्रमण के दौरान हमनें यह भी पाया कि सर्वांगीण विकास के लिए हमे न सिर्फ व्यक्ति में स्वैच्छिकता की भावना का विकास व शासकीय योजनाओं के प्रति जागरूकता की आवश्यकता है अपितु योजनाओं के सरल व सहज विक्रेन्दीकरण की भी आवश्यकता है।

इस क्रम की शुरूआत के तहत विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए जून माह में विभागीय अधिकारियों से समन्वय कर प्रस्फुटन ग्रामों में 05 स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्राथमिक उपचार शिविरों के माध्यम से 1063 ग्रामीण महिला/पुरुषों को उपचारित किया गया । 13 कृषि प्रशिक्षण एवं जागरूकता शिविरों के माध्यम से 660 कृषकों एवं एकीकृत बाल विकास परियोजना के कर्मचारियों की 2 ग्रामों में आयोजित बैठकों के माध्यम से 57 महिलाओं को विभागीय जानकारी प्रेषित की गई।

स्वास्थ्य शिविर एवं प्राथमिक उचार शिविर जुलाई माह में विकासखण्ड में चिकित्सा अधिकारियों एवं सहयोगी चिकित्सा दल के माध्यम से 05 शिविरों का आयोजन कर कुल 1065 ग्रामीण महिला/पुरुषों को उपचारित किया गया।

कृषि प्रशिक्षण एवं जागरूकता शिविर - कृषि विभाग अंतर्गत वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से जुलाई माह में 06 शिविरों में 268 कृषकों को कृषि योजनाओं एवं उन्नत कृषि की जानकारी दी साथ ही विकासखण्ड शाहनगर के ग्राम गिधौडा में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत शाहनगर की उपस्थिति में जन समस्या निवारण शिविर का आयोजन भी किया गया जिसमें कुल 119 ग्रामीणों ने विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित होने के लिए आवेदन दिये । आवेदन के 09 प्रकरणों का त्वरित निराकरण करते हुए शेष प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने का आश्वासन दिया गया ।

स्कूल चले हम अभियान - सर्व शिक्षा अभियान म०प्र० शासन द्वारा संचालित स्कूल चले हम अभियान 2009के अंतर्गत प्रस्फुटन ग्रामों में 1041 बच्चों की उपस्थिति में 17 रैलियों का आयोजन तथा 228 ग्रामीणों की उपस्थिति में 14 जागरूकता बैठकों का आयोजन किया गया।

पशु चिकित्सा टीकाकरण शिविर - अजयगढ विकासखण्ड के अंतर्गत प्रस्फुटन ग्रामों में पशु चिकित्सा विभाग द्वारा आयोजित 03 पशु चिकित्सा टीकाकरण शिविरों के माध्यम से कुल 179 पशुओं के टीकाकरण में सहयोग का कार्य किया गया।