म.प्र. जन अभियान परिषद् की शासी निकाय की बैठक माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान की अध्यक्षता में दिनांक 29.03.2011 को सम्पन्न । • • • प्रदेश के स्वैच्छिक संगठनों की क्षमता वर्धन हेतु प्रत्येक जिले में से 25-25 स्वयंसेवी संगठनों का चयन किया जाकर प्रशिक्षण कार्यशालाएँ सम्पन्न |
 
माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह चौहान के साथ म.प्र. जन अभियान परिषद् के अधिकारियों एवं स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक दिनांक 25 अप्रैल 2011 को समन्वय भवन, टी.टी नगर, भोपाल में आयोजन ।

म.प्र.जन अभियान परिषद् के भोपाल एवं ग्वालियर संभाग के विकासखण्ड समन्वयकों की आधारभूत प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दिनांक 19.04.2011 से 23.04.2011 तक एवं जबलपुर, रीवा, एवं सागर संभाग का आयोजन दिनांक 26.04.2011 से 30.04.2011 एन.आई.टी.टी.टी.आर भोपाल में आयोजन ।

म.प्र. जन अभियान परिषद् की शासी निकाय की बैठक माननीय मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान की अध्यक्षता में दिनांक 29.03.2011 को सम्पन्न ।

सात संभागो भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, रीवा और जबलपुर में प्रस्फुटन समितियों के साथ संभाग स्तरीय सम्मलेन का आयोजन |

डॉ. अजय शंकर मेहता जी और श्री प्रदीप पांडे जी ने संभाला जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष का दायित्व |

 

 
सबके लिए शिक्षा

हर घर में फैले शिक्षा का उजियारा

शिक्षा को हमारे संविधान में मौलिक अधिकारों के रूप में शामिल किया है। शिक्षा के अधिकार का कानून भी बनाया गया है। लेकिन प्रारंभिक शिक्षा को लेकर आंकड़े काफी गंभीर हैं। भारत में २२ करोड़ बच्चे ६१४ वर्ष की उम्र के हैं।


शिक्षा के बिना हम विकास की कल्पना नहीं कर सकते हैं। इसीलिए शिक्षा को हमारे संविधान में मौलिक अधिकारों के रूप में शामिल किया है। शिक्षा के अधिकार का कानून भी बनाया गया है। लेकिन प्रारंभिक शिक्षा को लेकर आंकड़े काफी गंभीर हैं। भारत में २२ करोड़ बच्चे ६१४ वर्ष की उम्र के हैं। मानव संसाधन मंत्रालय के तहत एजुकेशन कंसल्टेंट्‌स इंडिया लि. के सर्वेक्षण अनुसार देश में ६ से १४ वर्ष के बीच के ८१ लाख से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं जो स्कूलों के बाहर हैं। इनमें से ७४ फीसदी से अधिक ऐसे हैं जो कभी स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुँचे, २५ प्रतिशत पढ़ाई बीच में छोड़ देने वालों की कतार में हैं।
१ अप्रैल २०१० से सारे देश में शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया गया है। यह कानून ६ से १४ वर्ष के बच्चों को निवार्य शिक्षा देने के लिए है। यह बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है। बेशक आजादी के बाद शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। आंकड़े बताते हैं


क्रं.संभाग के नामबच्चों का शाला में प्रवेश
1.सागर संभाग17538
2.रीवा संभाग8423
3.ग्वालियर संभाग10649
4.उज्जैन संभाग4621
5.जबलपुर संभाग4741
6.भोपाल संभाग8359
7.इन्दौर संभाग13381
महायोग67712


प्रस्फुटन समितियों द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किये गये कार्य कि ९८ फीसदी से ज्यादा इलाकों में एक किलो मीटर के भीतर एक प्राथमिक स्कूल है और ९२ फीसदी इलाकों में तीन किलो मीटर के भीतर एक माध्यमिक स्कूल है। इसके बावजूद भी बच्चों का एक बड़ा वर्ग शिक्षा से वंचित है। यह वंचितपन लोगों की जागरूकता की कमी के कारण है। संसाधन हैं, अधिकार है, सरकार अभियानों के तहत प्रचारप्रसार द्वारा जागरूक भी कर रही है पर आज भी देश का शिक्षित वर्ग इसके प्रति उदासीन है। हमें इस अशिक्षित वर्ग को जागरूक कर आने वाली पीढ़ी को मजबूत करना है।
म.प्र. सरकार हर वर्ष बड़े स्तर पर स्कूल चलें हम'' अभियान का संचालन करती है। प्रदेश के हर कोने में इस भियान के माध्यम से बच्चों को शालाओं में प्रवेश करवाया जाता है। बालिकाओं की शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। इन प्रयासों के चलते शिक्षा के प्रतिशत में सुधार की अपेक्षा है।
शिक्षा के क्षेत्र में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा गठित प्रस्फुटन समितियाँ विशेष योगदान दे रही हैं। गाँव गाँव में शिक्षा का प्रसार प्रचार कर रही हैं। शिक्षा के महत्व और उपयोगिता पर मार्गदर्शति कर रही हैं। परिषद्‌ की प्रस्फुटन समितियों ने स्कूल चलें हम अभियान के तहत ६७७१२ बच्चों को शाला में प्रवेशित करवाया।
यह प्रयास आगे सतत चलते रहेंगे। ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति सदस्य अपनी मेहनत और लगन से लोगों को मार्गदर्शित कर रहे हैं। इन प्रस्फुटन समितियों ने संस्कार केन्द्र खोले हैं। साक्षरता के लिये न सिर्फ मानस बनाया बल्कि उसके गहन प्रयास भी किये जा रहे हैं। गाँव में बच्चों को निःशुल्क कोचिंग व्यवस्था व कम्प्यूटर प्रशिक्षण से जोड़ने के सरहनीय प्रयास किये जा रहे हैं।