इन्दौर जिले के विकासखण्ड सांवेर की ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति मण्डलावदा ने समग्र स्वच्छता अभियान के अंतर्गत ग्राम को १०० प्रतिशत शौचालय युक्त बनाया है। शौचालय निर्माण के लिए ग्राम में एक बैटक का आयोजन किया गया। जिसमें मुखय कार्यपालन अधिकारी सांवेर श्रीमती मधुलिका शुक्ला की उपस्थिति में समिति सदस्यों ने निर्मल ग्राम की बात रखी तथा निर्मल ग्राम के फायदे बताये गये। इस बात से प्रेरित होकर ग्रामीणों ने एक स्वर में विश्वास दिलाया कि हम जितना जल्दी हो सके अपने गांव को निर्मल गांव बनायेंगे। इसी बैठक में उपस्थित ग्राम के सरपंच ने भी घोषणा की जो परिवार शौचालय निर्माण करवायेगा। उसे शासन द्वारा प्राप्त अनुदान के अलावा प्रति परिवार २०० रु. पुरूस्कार स्वरूप प्रदाय किया जायेगा।
शत प्रतिशत् शौचालय युक्त ग्राम मण्डलावदा
बदलते समय के साथ प्लास्टिक का चलन आंरभ हुआ। हमने इसके दुष्प्रभावों को जाने बगैर इसे इतना आत्मसात किया कि हर जगह प्लास्टिक का संसार बस गया। यह प्लास्टिक अब विषाक्त प्रदूषण का कारण है। उपयोग के साथ दिनों दिन यह प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। प्लास्टिक स्वतः नष्ट नहीं होता। यदि इसे जलाया जाये तो कार्बन डाई ऑक्साइड सहित कई जहरीली गैसें निकलती हैं जो स्वास्थ्य के लिये हनिकारक हैं। विषैली गैसें हमारे तंत्रिका तंत्र और रोग प्रतिरोधी तंत्र को प्रभावित करती हैं। इसके अतिरिक्त प्लास्टिक की पतली पन्नियाँ जमीन के ऊपर एक परत बना लेती हैं जिससे जमीन के अंदर पानी पहुँचने में अवरोध आता है। पशुओं द्वारा पन्नियाँ खा लेने से उनकी मौत हो जाती है। इस तरह पॉलीथिन हमारे जीवन और पर्यावरण के लिए अभिशाप है। पॉलीथिन के उपयोग से वातावरण पर कुप्रभाव पड़ता है। इसके उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए वैसे तो प्रशासन और कई स्वयंसेवी संस्थाएँ कार्यरत हैं लेकिन लोगों की मानसिकता में भी भी यथायोग्य परिवर्तन नही आ रहा है। इसके लिये आवश्यकता है लोगों को जागरूक करने की।
शिवपुरी जिले के विकासखण्ड नरवर अंतर्गत आने वाले ग्राम चकरामपुर एवं शिवपुरी ब्लॉक के ग्राम सतनबाड़ा की ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति ने पॉलीथिन मुक्ति के लिये सघन अभियान चलाया। इनके प्रयास से ग्राम चकरामपुर एवं सतनबाड़ा आज १०० प्रतिशत पॉलीथिन मुक्त ग्राम बन गए हैं। इस सफलता के पीछे समिति सदस्यों की मेहनत और गाँव के लोगों का भरपूर सहयोग रहा। चकरामपुर की समिति द्वारा निर्णय लिया गया कि ग्राम को पॉलीथिन मुक्त ग्राम बनाया जाये और फिर बैठक कर संकल्प लिया कि गाँव को पॉलीथिन मुक्त करेंगे। इस निर्णय को ग्रामवासियों ने भी स्वीकार किया और इसमें अपना पूर्ण सहयोग करने का आह्णावासन दिया। सर्वप्रथम गाँव का भ्रमण एवं सम्पर्क कर समिति सदस्यों ने गाँव वालों को पॉलीथिन के कुप्रभाव के बारे में बताया, जागरूक किया और इसका उपयोग न करने का आह्वान किया। गाँव वालों ने भी पॉलीथिन से होने वाली हानियों को समझते हुए पूर्ण सहयोग दिया।इस कार्य को करने में समिति व ग्रामीणजनों ने एक दिन गाँव में भ्रमण कर पॉलीथिन को एकत्रित किया एवं गाँव से कुछ दूरी पर जाकर इस एकत्रित पॉलीथिन को जला दिया। सामान्यतः ग्रामवासी पॉलीथिन का उपयोग कर इधर उधर फैंक देते थे जिसे देखते हुए समिति ने गाँव में चार डिब्बे रख दिये तथा ग्रामीणजनों से निवेदन किया कि पॉलीथिन को इधरउधर न फैकते हुए इन डिब्बों में डालें ताकि गाँव में भी गंदगी न हो और पॉलीथिन को डिब्बों के माध्यम से एकत्रित कर गाँव के बाहर जलाया जा सके। ग्रामीणों ने इस कार्य में भी पना सहयोग प्रदान किया और वह पॉलीथिन को इधरउधर न फैंकते हुए इन डिब्बों में डालने लगे। इस प्रकार यह गाँव धीरेधीरे पॉलीथिन मुक्त हो गया।इसी प्रकार जिले के सतनबाड़ा गाँव में प्रस्फुटन समिति ने बैठक में ग्राम को स्वच्छ ग्राम बनाने का निर्णय लिया जिसके अंर्तगत लक्ष्य निर्धारित किया गया कि आगामी ५ माह में ग्राम को शत प्रतिशत कीचड़ मुक्त एवं पॉलीथिन मुक्त करेंगे।अपने संकल्प की दिशा में बढ़ते हुए समिति सदस्यों ने सर्वप्रथम ग्रामवासियों को पॉलीथिन से होने वाले नुकसान के बारे में बताया और फिर प्रतिदिन पॉलीथिन सफाई अभियान चलाया गया।
प्रस्फुटन ग्रामों में ३४,८३४ शौचालयों तथा १५,३५३ सोख्ता गड्ढों का निर्माण
तन मन की स्वच्छता के साथ ही हमारे आसपास की स्वच्छता जीवन को स्वस्थ बनाती है। स्वच्छता हमारे घर आंगन से प्रारंभ होकर सार्वजनिक स्थलों तक पहुँचती है। हमारा पहला कर्त्तव्य होता है कि हम अपने घरों को स्वच्छ बनाएं उसके बाद आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाएं। स्वच्छता का सबसे बड़ा कारक प्रदूषण है। इसके लिए जागरूकता की आवश्यकता है चूकि स्वच्छ गाँव से ही स्वच्छ प्रदेश बनेगा लेकिन गाँव में जागरूकता का भाव है। गाँवों में सबसे बड़ी समस्या है खुले में शौच का प्रचलन। आज भी देश के ४० प्रतिशत लोग खुले में शौच करते हैं। हालांकि अब लोगों में इसके प्रति नजरिया बदलने लगा है।सरकारी योजनाओं के तहत कम लागत में पक्के शौचालयों का निर्माण होने लगा है। वहीं कई स्वयंसेवी संगठन भी देश में इस विषय पर कार्य कर रहे हैं। म.प्र. सरकार भी इस दिशा में सराहनीय पहल कर रही है। सरकारी अनुदान से शैचालयों का निर्माण किया जा रहा है। इसी वर्ष प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के कोनेकोने में समग्र स्वच्छता अभियान का अलख जगाकर लोगों को स्वच्छता की ओर अग्रसर किया।खुद मुख्यमंत्री ने गाँवो में झाडू लगाकर संदेश पहुँचाया कि स्वच्छ गाँवों से ही स्वच्छ मध्यप्रदेश का निर्माण हो सकता है।वे सप्ताह में एक दिन प्रदेश के किसी भी गाँव में गए और वहाँ समग्र स्वच्छता का संदेश दिया। म.प्र.जन अभियान परिषद् द्वारा गठित प्रस्फुटन समितियां गांव गांव में समग्र स्वच्छता अभियान पर कार्यरत हैं। घर, गली, मोहल्ला, सार्वजनिक स्थल से लेकर नालियों की साफसफाई का कार्य प्रस्फुटन समितियों ने अपने हाथ में लिया। शौचालयों का निर्माण करवा कर ग्रामीणों की खुले में शौच करने की व्यवस्था को कम किया है।इसी का नतीजा है कि इस वर्ष ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियो की प्रेरणा से ३४,८३४ शौचालयों का निर्माण हो चुका है। जिनमें कुछ सहयोग सरकार का है तो कुछ लोगों का है। समिति की प्रेरणा व विगत एक वर्ष के निरन्तर प्रयासों से प्रदेश के कई गाँव पूर्णतः स्वच्छ ग्राम व पूर्णतः शौचालय युक्त गाँव बन गये हैं। छतरपुर जिले के विकासखण्ड राजनगर के चयनित प्रस्फुटन ग्रामों में ग्राम टौरियाटेक में समग्र स्वच्छता अभियान के अंतर्गत प्रस्फुटन समिति एवं म.प्र. जन अभियान परिषद् के प्रयास से ग्राम में १४० शौचालयों का निर्माण कराया गया। वर्तमान में टौरियाटेक निर्मल ग्राम की श्रेणी में आ चुका है। स्वच्छता से संबंधित अन्य कार्यों में श्रमदान द्वारा सार्वजनिक स्थानों की सफाई की जाती है जिसमें लगभग ३०४० ग्रामीण प्रत्येक ग्राम में श्रमदान करते हैं।ग्राम जमुनया में तालाब के आसपास की सफाई में लगभग ४० ग्रामीणों ने भाग लिया। चयनित १० प्रस्फुटन ग्रामों में श्रमदान से सार्वजनिक स्थानों के आसपास की सफाई में लगभग २०२ ग्रामीणों ने भाग लिया। इसी तरह विकासखण्ड ईशानगर के १ ग्राम में समग्र स्वच्छता कार्यक्रम अंतर्गत १४१ शौचालयों का निर्माण कराया गया तथा ग्राम को निर्मल ग्राम बनाया। प्रस्फुटन समितियों के प्रयास से प्रदेश में १५,३५३ सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया गया। स्वच्छता को लेकर प्रस्फुटन समितियों के सराहनीय प्रयासों के सकारात्मक परिणाम इस बात का संकेत है कि अपने गाँव को स्वच्छ रखने के संस्कार विकसित हो रहे हैं। आज आवश्यकता इसी बात की है कि लोग खुद जनभागीदारी और जन सहयोग से अपने घर को, अपने गाँव को और अपने शहर को स्वच्छ बनाए और प्रदेश में एक स्वच्छ वातावरण बना स्वच्छ प्रदेश का निर्माण करें।
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