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प्रशिक्षण कार्यक्रम

संभाग/जिला/ब्लॉक समन्वयकों हेतु जैविक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

भारत सरकार के कृषि मंत्रालय कृषि एवं सहकारिता विभाग के क्षेत्रीय जैविक खोती केन्द्र, जबलपुर द्वारा मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद, भोपाल के प्रशिक्षण हॉल में परिषद के अधिकारियों एवं समन्वयकों हेतु जैविक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 23 मार्च 2015 को हुआ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान मंच पर क्षेत्रीय जैविक खेती केंद्र, जबलपुर के केन्द्र प्रमुख श्री आर.पी.सिंह, मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद भोपाल के कार्यपालक निदेशक श्री उमेश शर्मा, प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रशिक्षण समन्वयक श्री एस के बखशी एवं परिषद के कार्यक्रम समन्वय के रूप में श्री अरूण त्रिपाठी मंचासीन थे।
प्रशिक्षण का शुभारंभ मंचासीन अधिकारियों द्वारा मॉ सरस्वती एवं भारत माता के आव्हान से किया गया ।
सर्वप्रथम अपने शुभारंभ वक्तव्य में श्री आर पी सिंह द्वारा वर्तमान कृषि के परिपेक्षय की जानकारी देते हुये कहा कि जैविक खेती ही एक ऐसा उपाय है जिसके माध्यम से कृषि की रोगमुक्त उपज के साथ मृदा की उर्वरा शक्ति भी बढेगी। श्री सिंह द्वारा जैविक उत्पादन के प्रमाणीकरण पर भी प्रकाश डाला गया और उपस्थित सभी 20 प्रशिक्षणार्थियों को पूरी तन्मयता से इस प्रशिक्षण में बताई जाने वाली बातों को ग्रहण करने का आग्रह किया । श्री उमेश शर्मा द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को विस्तार से बताया कि लगातार अंधाधुंध तरीकों से रासायनिक उर्वरकों, रासायनिक कीटनाशकों, रसायनिक फफूंदनाशकों के इस्तेमाल (उपयोग) से हमारा वातावरण, हमारी मृदा एवं हमारा प्रतिदिन उपयोग करने वाला भोजन प्रदूषित हो रहा है। श्री शर्मा द्वारा सभी उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को कहा कि इस दो दिवसीय महत्वपूर्ण प्रशिक्षण में जैविक खेती एवं प्रमाणीकरण का पूर्ण ज्ञान प्राप्त करें एवं अपने-अपने क्षेत्रों में जैविक खेती पर उत्कृष्ठ कार्य करें।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रशिक्षण समन्वयक श्री एस के बखशी द्वारा बताया गया कि जैविक खेती एवं प्रमाणीकरण पर विभिन्न वक्ताओं द्वारा वक्तव्य दिये जायेंगे। सभी प्रशिक्षणार्थियों को पी. जी. एस. (Participatory Guarantee System) (प्रतिभूति सहभागिता प्रणाली) के माध्यम से कराये जाने वाली जैविक प्रमाणीकरण पद्धती को विस्तार से समझाया जायेगा । यह दो दिवसीय प्रशिक्षण 24 मार्च 2015 को समाप्त होगा एवं सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किये जायेंगे।
परिषद के कार्यक्रम समन्वयक श्री अरूण त्रिपाठी द्वारा बताया गया कि परिषद मैं जैविक खेती पर दो-दो दिन के दो प्रशिक्षण आयोजित होंगे। पहला प्रशिक्षण 23 मार्च से 24 मार्च 2015 तक होगा एवं दूसरा प्रशिक्षण 25 मार्च से 26 मार्च 2015 तक आयोजित होगा । उपरोक्त प्रशिक्षण क्षेत्रीय जैविक खेती केन्द्र जबलपुर द्वारा दिया जायेगा। श्री त्रिपाठी द्वारा बताया गया कि परिषद के अंतर्गत कार्यरत संभाग/जिला/ब्लॉक समन्वयकों के दो बैच तैयार किये गये है। जिन्हें दो चरणों में उपरोक्त तारिखों को प्रशिक्षित किया जायेगा। दो दिवसीय प्रशिक्षण 24 मार्च 2015 को समाप्त हुआ एवं सभी प्रशिक्षणार्थियों को परिषद के उपाध्य क्ष माननीय श्री प्रदीप पाण्डेय जी द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किये गये।


राज्य कार्यालय म.प्र. जन अभियान परिषद्


स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमतावृद्घि हेतु जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला

प्रदेश के विकास में स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयंसेवी संस्थाओं के क्षमता वर्धन की घोषणा की थी। तदानुसार राज्य योजना आयोग तथा म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों की कौशल वृद्घि करने एवं संस्थाओं के आंतरिक प्रबंधन में उत्कृष्टता लाने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में से २५२५ स्वैच्छिक संगठनों के २२ प्रतिनिधियों को विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण, समुदाय आधारित मूल्यांकन एवं अंनुश्रवण, सामाजिक अंकेक्षण एवं समंक विश्लेषण के सन्दर्भ में प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य राज्य स्तर पर बड़ी मात्रा में इन विषयों से संबंधित विषय विशेषज्ञ तैयार करना था। प्रशिक्षण के अंतिम दिवस प्रशिक्षणार्थियों को क्षेत्र भ्रमण करवाकर कार्य के व्यवहारिक पक्ष व स्थानीय समस्याओं से अवगत कराया गया। प्रस्तुत है संभागवार फोटो फीचर्स :-

विकास के लिए साध्य, साधन तथा संसाधन का तालमेल आवश्यक :- श्री दवे

द्रभारत में विकेन्द्रीकृत सामाजिक व्यवस्था अति पुरातन है। पहले यहाँ कृषि विकसित थी, व्यापार, उद्योगधंधे समृद्घ थे, शिक्षा का स्तर ऊँचा था, लोग सुखी थे क्योंकि कार्य की, व्यवहार की मूल वधारणा भारतीय चिंतन था। हमें इस पक्ष पर विचार करना होगा। विकास के लिए साध्य, साधन तथा संसाधन तीनों में तालमेल होना आवश्यक है।

                       

भारत में विकेन्द्रीकृत सामाजिक व्यवस्था अति पुरातन है। पहले यहाँ कृषि विकसित थी, व्यापार, उद्योगधंधे समृद्घ थे, शिक्षा का स्तर ऊँचा था, लोग सुखी थे क्योंकि कार्य की, व्यवहार की मूल अवधारणा में भारतीय चिंतन था। हमें इस पक्ष पर विचार करना होगा। विकास के लिए साध्य, साधन तथा संसाधन तीनों में तालमेल होना आवश्यक है।'' यह बात राज्य सभा सांसद श्री अनिल माधव दवे ने मध्यप्रदेश जन भियान परिषद्‌ तथा राज्य योजना आयोग के तत्वावधान में प्रदेश की स्वयंसेवी संस्थाओ के क्षमता वर्धन के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर कही। 
३० सितम्बर २०१० से २ अक्टूबर २०१० तक प्रशासन अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में श्री दवे ने कहा कि जन अभियान परिषद्‌ स्वयंसेवी संगठनों के मूल चिंतन के लिए प्रतिबद्घ है। प्रशिक्षणार्थियों से अपेक्षा है कि वे विचारों को निर्णय में परिवर्तित करें। विकेन्द्रीकृत नियोजन को लेकर श्री दवे ने कहा कि विकेन्द्रीकरण एक ऐसी कुंजी है जिसके माध्यम से सारा काम किया जा सकता है। इसमें योजना ठीक से बने, क्रियान्वयन बेहतर हो तभी परिणाम सामने आ सकते हैं। समाज की भूमिका को लेकर श्री दवे ने कहा कि विकास में समाज की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। स्वयंसेवी संस्थाओ के माध्यम से उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जाये। हमारी संकल्पना, सोच, समझ भारतीय हो तभी कार्य को सही दिशा मिलेगी। 
कार्यक्रम के अध्यक्ष राज्य योजना आयोग के सलाहकार श्री मंगेश त्यागी ने कहा कि राज्य योजना आयोग ने गत वर्ष खरगोन, राजगढ़, छतरपुर, सतना और मण्डला जिलों में विकेन्द्रीकृत नियोजन का कार्य किया है जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं। आज कार्य का स्वरूप तैयार है, इस प्रयोग के आधार पर विकेन्द्रीकृत योजना प्रणाली को इस वर्ष से संपूर्ण प्रदेश में लागू किया जायेगा। विकेन्द्रीकृत नियोजन के बारे में जानकारी देते हुए श्री त्यागी ने कहा कि इसमें स्वयंसेवी संगठनों की महती भूमिका हो सकती है। चूंकि जन अभियान परिषद्‌ स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि के रूप में है, अतः जन अभियान का मैदानी अमला विकास दूत का कार्य कर सकता है। उन्होंने विकेन्द्रीकृत नियोजन को विस्तार में बताया तथा ग्राम योजना और वार्ड योजना की जानकारी देते हुए कहा कि योजना, ग्राम से जनपद और जनपद से जिले में आयेगी, इस तरह विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण में गाँव के लोग अपनी आवश्यकता के अनुरूप ग्राम विकास की योजना में भागीदार होंगे। शहरी क्षेत्र में वार्ड स्तर पर स्थानीय लोगों की आवश्यकता के आधार पर योजना बनेगी। वार्ड से नगरीय निकाय और फिर जिले में जिला योजना समिति के पास पहुँचेगी। 
इससे पूर्व जन अभियान परिषद्‌ के कार्यपालक निदेशक श्री धीरेन्द्र चतुर्वेदी ने कार्यशाला के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री आवास पर १२ अक्टूबर २००९ को हुई पंचायत में मुख्यमंत्री जी द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं के क्षमता वर्धन की घोषणा की गई थी, जिसके परिपालन में प्रत्येक जिल से २५२५ स्वयंसेवी संस्थाओं का चयन किया जाकर पूरे प्रदेश के १२५० स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमतावृद्घि की जाएगी। इस तारतम्य में यह तीसरी बार कार्यशाला आयोजित की जा रही है, जिसमें स्वयंसेवी संस्थाओं से विकेन्द्रीकृत नियोजन, सामाजिक अंकेक्षण, समुदाय आधारित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण एवं समंक विश्लेषण विषयों पर प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षकों को तैयार किया जाना हैं ताकि क्षमता सम्पन्न स्त्रोत व्यक्तियों की जिला स्तर पर उपलब्धता सुनिश्चित हो जाए। इस प्रशिक्षण के बाद इस प्रकार की कार्यशालाएँ जिला स्तर पर आयोजित की जाएँगी।

              

प्रथम सत्र :

कार्यशाला में यूनीसेफ के श्री ऋषिराज ने विकेन्द्रीकृत नियोजन की आवश्यकता और अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि विकेन्द्रीकृत नियोजन में लोगों की सहभागिता आवश्यक है। आरम्भिक प्रयास में यूनिसेफ, यू.एन.डी.पी. के सहयोग से जिला कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा एकीकृत जिला योजना म.प्र. के पाँच जिलों खरगोन, राजगढ़, सतना, छतरपुर तथा मण्डला में अपनाई गई। विकेन्द्रीकृत नियोजन का मतलब लोगों की आवाज है। इसकी आवश्यकता इसलिए है ताकि स्थानीय लोग योजना बनाने में भागीदारी कर सके और बेहतर ढंग से समझ सके। प्लान केवल प्लान तक सीमित न रहे इसका ठीक से क्रियान्वयन हो तथा उसका मूल्यांकन एवं अनुश्रवण भी ठीक से हो। उन्होंने जिला स्तर तक की संस्थाओं का संरचनात्मक ढांचा भी प्रस्तुत किया। जिसके लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र पर आधारित विकेन्द्रीकृत नियोजन के लिए एक मेकेनिज़म बनाया है जिसे टेक्नीकल सपोर्ट ग्रुप कहते हैं।

द्वितीय सत्र

गरीबी उन्मूलन और नीति सहायता इकाई राज्य योजना आयोग के श्री योगेश माहोर ने विकेन्द्रीकृत नियोजन प्रणाली, विकेन्द्रीकृत नियोजन के लिए विभिन्न स्तरों पर गठित समितियों, उप समितियों की संरचना एवं कार्य की जानकारी देते हुए बताया कि नेतृत्व बजट सीलिंग, मूल्यांकन एवं अनुश्रवण, ग्रामीण नियोजन, बजट का आंकलन, संसाधनों का आंकलन, जनपद को मार्गदर्शन, विभागों द्वारा क्रियान्वयन तथा समेकन की जिम्मेदारी जिला नियोजन समिति की होगी। टेक्नीकल सपोर्ट ग्रुप का मुख्य कार्य ६ क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करना तथा योजना निर्माण में तकनीकी सहयोग देना है। ग्राम पंचायत द्वारा आवश्यक वातावरण निर्माण करना एवं सूचना देना, प्रस्तावों को ग्राम पंचायत में भेजना, समाहित कराना, ग्राम सभा में अनुमोदित कार्य का समेकन एवं अनुमोदित करना। ग्राम विकास समिति के मुख्य कार्य अधिकतम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना, विचार विमर्श करना, उपेक्षित वर्ग को समाहित करना एवं प्रस्तुतिकरण करना है।


तृतीय सत्र :

वरिष्ठ सलाहकार श्री श्याम बोहरे ने स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमतावृद्घि करने वाले प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण का अर्थ, भूमिका व कार्य पद्घति के बारे में विस्तार से बताया।

             

कार्यशाला का दूसरा दिन
प्रथम सत्र :

प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन विषय विशेषज्ञों ने गहन प्रशिक्षण दिया। 
विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण में स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी बढ़ाने और उनके क्षमतावर्धन के लिये प्रशिक्षकों को दिये जाने वाले प्रशिक्षण में यू.एन.डी.पी. के शैलेष नायक ने योजना निर्माण को लेकर विस्तार से बताते हुए कहा कि यदि हम तर्कपूर्ण कार्य करेंगे तो परिणाम सही आयेंगे। श्री नायक ने योजना निर्माण की आवधारणा, जिले की समस्याएँ, आवश्यकताएँ, कमजोरी और चुनौतियों के विश्लेषण की प्रक्रिया को स्पष्ट किया। 
द्वितीय सत्र 
वरिष्ठ सलाहकार श्री श्याम बोहरे ने कहा कि प्रशिक्षण का आधार वह उद्देश्य है, जिसके लिए प्रशिक्षण दिया जाना है। अतः उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए क्योंकि उद्देश्य को हासिल करने के लिये ही विषय वस्तु का चयन किया जाता है। विषय वस्तु सरल से कठिन, ज्ञात से ज्ञात, मूर्त से मूर्त हो। उन्होंने विषय वस्तु के प्रस्तुतीकरण की बारीकियों को बताते हुए कहा कि प्रस्तुतिकरण साफ, स्पष्ट और सरल हो। श्री बोहरे ने व्याख्यान और समूह चर्चा में प्रशिक्षक की भूमिका भी स्पष्ट की। 
इसी सत्र में समर्थन के श्री चंचल मोदी ने विकेन्द्रीकृत जिला नियोजन प्रणाली में नगरीय योजना निर्माण की प्रक्रिया और विभिन्न चरणों की जानकारी दी। उन्होंने नगर की समस्या के आधार पर नियोजन की प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया को समझाया तथा योजना निर्माण में जन भागीदारी प्रोत्साहित करने के उपाय बताये। श्री विशाल नायक ने ग्रामीण योजना निर्माण से संबंधित ग्राम की नियोजन प्रक्रिया के निम्न प्रमुख चरणों पर चर्चा की :


  • यदि जरूरत हो तो ग्राम नियोजन समिति का गठन।
  • ग्रामसभा में दृष्टिकोण पर जानकारी एवं मुददों की पहचान।
  • चिन्हित समूहों की पहचान।
  • पृथकपृथक समूहों में ग्राम की समस्याओं का प्राथमिकीकरण एवं न्य कार्यक्रमों में उनके संभावित समाधानों की पहचान।
  • समूहों से निकली प्राथमिकता के आधार पर कार्यक्रमों को जोड़कर योजना निर्माण।
  • ग्राम सभा में सुझावों का समावेश एवं ग्राम सभा का अनुमोदन प्राप्त करना।
  • ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सभाओं के नियोजनों का समेकन एवं औपचारिक दस्तावेजों को जनपद पंचायत में प्रस्तुत करना।
  • ग्राम पंचायतों की कार्ययोजनाओं का जनपद/जिला पंचायत स्तर पर समेकन। श्री नायक ने नियोजन प्रक्रिया में बेहतर भागीदारी को प्रोत्साहित करने के निम्न उपाय सुझाए :
  • समय रहते बैठक की तारीखें निर्धारित करना।
  • सूचनाओं का मुद्रण और व्यापक प्रसार व वितरण
  • बेहतर उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए, पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधियों को प्रोत्साहित करना,
  • विशेष हितधारक समूहों जैसे स्वयं सहायता समूह, पालक शिक्षक संघ आदि को शामिल करना।
  • स्वयं सेवकों द्वारा घरों के दौरे।
  • विचारविमर्श इत्यादि के लिए ग्राम सभा को छोटे समूहों (वार्ड सभा) में विभक्त करना।
  • नागरिकों को उनकी दिक्कतें बांटने का अवसर मुहैया कराना, चाहे वे ग्रामसभा की बैठकों में उपस्थित रहते हो या नहीं।

उन्होंने विषय को स्पष्ट करते हुए बताया कि विकेन्द्रीकृत नियोजन की सरलता है कि लोगों द्वारा बनी योजना अपनी योजना कहलाएगी जिससे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। ग्रामवासियों की आवाज को गतिविधियों में लायें, पात्र हितग्राही को लाभ मिले ऐसे प्रयास हों। इसी सत्र में समर्थन के ही श्री विशाल नायक ने ग्रामीण योजना निर्माण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की जानकारी दी तथा ग्राम की समस्या के आधार पर नियोजन की प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया को समझाया। साथ ही नियोजन प्रक्रिया में जन भागीदारी प्रोत्साहित करने के उपाय बताये।


चतुर्थ सत्र :स्वास्थ्य विभाग के डॉ. अजय खरे ने समुदाय आधारित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण का अर्थ, आवश्यकता एवं विभिन्न चरणों की जानकारी दी तथा समुदाय आधारित अनुश्रवण की विधियों को समझाया।

कार्यशाला का तीसरा दिन
प्रथम सत्र :यू.एन.डी.पी. के श्री विशाल नायक ने ग्रामीण एवं नगरीय योजना समेकन के लिए संबंधित प्रपत्रों पर चर्चा की एवं प्रपत्रों से संबंधित प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने नगरीय एवं ग्रामीण योजना बनाने के व्यवहारिक पक्ष को स्पष्ट करने के लिए प्रशिक्षणार्थियों की सात टीम वनवाई तथा प्रत्येक टीम को एक वार्ड एवं एक ग्राम की केस स्ट्‌डी दी। जिसका अध्ययन करके टीमों ने क्षेत्रवार समस्याएं निकाली, समस्याओं का प्राथमिकीकरण कर समाधान निकाले तथा प्रस्तुतिकरण दिया। 
द्वितीय सत्र : समर्थन के श्री अविनाश झाड़े ने सामाजिक अंकेक्षण विषय को बहुत ही सहज और सरल तरीके से प्रतिभागियों के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने सामाजिक अंकेक्षण का अर्थ, उद्देश्य, आवश्यकता एवं प्रक्रिया पर प्रकाश डाला एवं उदाहरणों द्वारा स्पष्ट किया कि सामाजिक अंकेक्षण के द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पोषण, आजीविका, अधोसंरचना प्रबंधन, ऊर्जा, ईंधन तथा वैकल्पिक ऊर्जा, नागरिक अधिकार संरक्षण इत्यादि क्षेत्रों के बेहतर परिणाम सामने आएंगे। 
तृतीय सत्र :योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के आयुक्त डॉ. एस.पी. शर्मा ने सामाजिक फायदे एवं कीमत विश्लेषण पर चर्चा की जिसमें उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट पर प्रत्यक्ष एवं प्रत्यक्ष प्रभाव होते हैं तथा प्रोजेक्ट की मांग हमेशा आय, व्यवसाय एवं शिक्षा के आधार पर उत्पन्न होती है। जहां भिन्नताएं अधिक होती हैं वहां सैम्पल साईज बड़ा लेना चाहिए और जहां कम होती है वहां सेम्पल साईज छोटा लेना चाहिए। 
वन विभाग के वन संरक्षक श्री चितरंजन त्यागी ने प्रशिक्षणार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए बताया कि सर्वप्रथम लक्ष्य स्पष्ट हो, प्रशिक्षकों की भूभ्मिका स्पष्ट हो तथा प्राथमिकता निर्धारित हो कि किस प्रकार दक्षता निर्मित करनी है, तभी हम चुनौतियों का सामना कर पाएंगे। उन्होंने विकेन्द्रीकृत नियोजन में स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि स्वयंसेवी संस्थाओं की पैठ जमीनी स्तर तक होती है। वे समुदाय को प्रोत्साहित कर सही दिशा दिखाने में सक्षम होते हैं।


स्वयंसेवी संगठनों की क्षमता वृद्घि के संबंध में विकासखण्ड समन्वयकों का संभाग स्तरीय प्रशिक्षण

म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ अन्तर्गत स्वयंसेवी संगठनों की क्षमता वृद्घि के संबंध में १४ अगस्त २०१० को उज्जैन संभाग के विकासखण्ड समन्वयकों की संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला उज्जैन में सम्पन्न हुई। कार्यशाला का शुभारंभ श्री एस.सी. गुप्ता, संयुक्त संचालक, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, श्री प्रदीप पाण्डे, शासकीय सदस्य म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा किया गया। संभागीय समन्वयक द्वारा कार्यशाला के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। जिसके अन्तर्गत प्रशिक्षणार्थियों से कार्यशाला के उद्देश्य तथा विकासखण्ड समन्वयकों से परियोजना के संदर्भ में अपेक्षा तथा प्राप्त किये जाने वाले परिणामों से अवगत कराया गया। इसके पश्चात्‌ संयुक्त संचालक, श्री एस.सी. गुप्ता ने जिलों में योजना निर्माण तथा ग्रामों में विकेन्द्रीकृत नियोजन की महत्ता से समस्त प्रतिभागियों को अवगत कराया। साथ ही सम्पूर्ण परियोजना में जन अभियान परिषद्‌ की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। 
कार्यशाला में उपस्थित म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के शासकीय सदस्य श्री प्रदीप पाण्डे द्वारा अपने उद्‌बोधन में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के कार्यकर्ताओं द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए प्रस्फुटन समितियों की ग्राम विकास में भूमिका तथा ग्रामों की विकेन्द्रीकृत योजना में स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमता वृद्घि हेतु परियोजना का परिचय तथा क्रियान्वयन एवं रणनीति पर उज्जैन जिला समन्वयक श्री मांगीलाल आर्य द्वारा विस्तार से बताया गया। श्री आर्य द्वारा मुख्यमंत्री जी की घोषणा के परिपालन में प्रदेश में १२५० स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमता वृद्घि के लिए म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ एवं पी.एम.पी.एस.यू. राज्य योजना आयोग द्वारा संचालित परियोजना से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी समस्त प्रतिभागियों को दी गई। विकेन्द्रीकृत नियोजन के विषय में श्री बुदा सोलंकी, जिला समन्वयक रतलाम ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ग्रामों में विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण के समस्त चरणों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। 
उन्होंने विकेन्द्रीकृत नियोजन की अवधारणा तथा क्रियान्वयन एवं चुनौतियों के संदर्भ में विस्तार से जानकारी दी तथा विकेन्द्रीकृत नियोजन की आवश्यकता तथा ग्राम विकास में सम्पूर्ण परियोजना की महत्ता पर प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया। विकेन्द्रीकृत नियोजन में स्वयंसेवी संस्थाओं के चयन एवं रणनीति पर सुश्री पूजा बंधैया जिला समन्वयक, शाजापुर द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें प्रत्येक जिले में ५० स्वयंसेवी संस्थाओं के चयन हेतु बनाई गई रणनीति तथा संस्थाओं के चयन हेतु निर्धारित जिला स्तरीय समिति के स्वरूप एवं संस्थाओं के चयन के लिए अंक निर्धारण प्रक्रिया से प्रतिभागियों को अवगत कराया। 
स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमता वृद्घि में संभाग/जिला/विकासखण्ड समन्वयकों की भूमिका का विस्तृत विवरण श्रीमती तृप्ती बैरागी, जिला समन्वयक मंदसौर द्वारा प्रस्तुत किया गया। जिसके अन्तर्गत स्वयंसेवी संस्थाओं के चयन के लिए प्राप्त आवेदन पत्र एवं सत्यापन प्रपत्रों के परिक्षण के संदर्भ में समस्त प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया। सत्रों का संचालन श्री चेतन अत्रे, जिला समन्वयक नीमच द्वारा किया गया। कार्यशाला के अंत में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ के उपनिदेशक श्री गिरीश जोशी ने समुदाय सशक्तिकरण विषय पर प्रशिक्षण दिया। आभार प्रदर्शन संभाग समन्वयक उज्जैन ने किया।



वरूण आचार्य संभाग समन्वयक, उज्जैन, म.प्र. ज. .प.

स्वयंसेवी संगठनों की क्षमता वृद्घि के संबंध में समन्वयकों का प्रशिक्षण

विगत १२ अक्टूबर २००९ को मुख्यमंत्री निवास पर स्वैच्छिक संगठनों की पंचायत का आयोजन किया गया था। इस पंचायत में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि स्वयंसेवी संगठनों की क्षमता वृद्घि की जावेगी। इसके क्रियान्वयन के तहत राज्य योजना आयोग के सहयोग से जन अभियान परिषद्‌ द्वारा ७ से ९ जून २०१० को राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया था। जिसमें राष्ट्रीय स्तर की ४२ स्वयंसेवी संस्थाओं ने भाग लिया व सुझाव रखे। स्वयंसेवी संगठनों की क्षमता वृद्घि आयोजना के संदर्भ में जन अभियान परिषद्‌ के संभाग व जिला समन्वयकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन दिनांक १ अगस्त २०१० को भोपाल में किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा विकेन्द्रीकृत नियोजन, सामजिक अंकेक्षण, समुदाय आधारित मूल्यांकन एवं अनुश्रवण व समंक विश्लेषण विषयों पर क्षमता सम्पन्न स्त्रोत व्यक्तियों की जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

स्वयंसेवी संस्थाएँ निश्चित उद्देश्य लेकर काम करती हैं तो उनके परिणाम भी अच्छे होते हैं। इस हेतु उनकी क्षमतावृद्घि आवश्यक है ताकि वह विकास के मुद्‌दों पर शासन के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके यह बात श्री के. सुरेश, प्रमुख सचिव, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, म.प्र. शासन, ने कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कही। उन्होंने कहा कि सबसे पहले शासकीय विभागों के लोगों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। जमीनी स्तर पर लोगों में विश्वास पैदा किया जाए और गाँव के विकास कार्य में हम अपनी भूमिका को पहचानें। 
सत्र के आरंभ में जन अभियान परिषद्‌ के उपनिदेशक श्री गिरीश जोशी ने कार्यशाला के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह कार्य म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ तथा राज्य योजना आयोग अर्थात योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के दोनों विभागों को मिलकर करना है। जन अभियान परिषद्‌ का मुख्य कार्य स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमता वृद्घि करना है इसी संदर्भ में प्रत्येक जिले से २५२५ संस्थाओं का तथा प्रदेश स्तर पर ८७,७७० में से १२५० स्वयंसेवी संस्थाओं का चयन कर उनको प्रशिक्षण दिया जायेगा, इस हेतु विकेन्द्रीकृत नियोजन मुख्य मुद्दा है क्योंकि सभी मुद्दे इसी से निकलकर आये हैं। सभी संभाग मिलकर यह कार्य करेंगे जिससे इस प्रक्रिया के द्वारा बेहतर स्वयंसेवी संगठनों को सामने ला पायें। 
इस प्रशिक्षण के बाद समन्वयकों से यह अपेक्षा है कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ जिला स्तर पर आयोजित की जाएँ। जिला समन्वयक, संभाग समन्वयक के साथ मिलकर चयन प्रक्रिया, आवेदनों की छटनी, ग्रेडिंग, प्रशिक्षण की कार्य योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभायें तथा विकासखण्ड समन्वयकों का उन्मुखीकरण करें जिससे उनकी परियोजना के संबंध में बेहतर प्रारंभिक समझ बन सके।

            

प्रथम सत्र के आरंभ में कार्यक्रम के विशेष अतिथि गरीबी उन्मूलन व नीति सहायता इकाई के डॉ. एस.पी. बत्रा ने कहा कि यदि आपकी पहचान बनेगी तो आपको सभी स्वीकार करेंगे तथा हमने जो योजना मिलकर बनाई है उसका क्रियान्वयन आप लोगों के द्वारा ही किया ज&