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रिपोर्ट- जिला स्तरीय
अनुकरणीय कार्यो का अध्ययन भ्रमण

From :-DC Betul


हिवरेबाजार, रालेगनसिद्धि एवं जिला धुले के सिरपुर में जल संरक्षण, बायोगैस, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण तथा नशामुक्ति आदि विषयों पर किये गए अनुकरणीय कार्यो का अवलोकन किया।
हिवरेबाजार :- प्रथम ग्राम हिवरेबाजार में के सरपंच श्री पोपटराव पवांर ने आदर्श ग्राम की संकल्पना को बताते हुए कहा कि इस गांव को आदर्श ग्राम बनाने के लिए 09-अगस्त-1989 से शुरूआत हुई। इसके पूर्व ग्राम की स्थिति खराब थी। रोजगार के अभाव में लोग पलायन कर रहें थे। सन्‌ 1972 से 1989 तक बार-बार सुखे के चपेट में गांव आ जाता था तथा पर्याप्त वर्षा के अभाव में फसलें बरबाद हो रही थी। लगभग 168 परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहें थे। ग्राम में कमाई का कोई साधन नही था, न शिक्षा थी न चिकित्सा की कोई व्यवस्था थी।
हिवरेबाजार ग्राम में घुमते हुए देखा उसमें- 1- ग्राम की अधोसंरचना में स्कूल, आंगनवाड़ी, पंचायतभवन, लाईब्रेरी, संवादमंच, आरोग्य केन्द्र, ग्राम का ड्रेनेज़ सिस्टम अच्छा लगा। 2- प्रत्येक परिवार में महिलाओं को सम्मान देने हेतु मुखिया के रूप में महिलाओं का नाम प्रत्येक घर के आगे लिखा होना। 3- पिछले 25 वर्षो से सरपंच एवं अन्य पदों पर र्निविरोध निर्वाचन होना। 4- प्रत्येक परिवार द्वारा डेयरी उद्योगों को अपनाना व 5 हजार लीटर दूध का उत्पादन ग्राम में दो चिलिंग प्लांट होना। 5- जल संरक्षण हेतु सामुहिकता एवं शासन के सहयोग से ग्राम की पूरी पढ़त भूमि में वाटरशेट की विभिन्न संरचनाऐं जिसमें स्टॉप डेम, कांक्रिट डेम, कंटूर ट्रेन्च आदि कराकर, सघन वृक्षारोपण करना। 6- ग्राम के सभी किसानों द्वारा मिश्रित खेती को अपनाना। 7- ग्राम में 168 परिवारों मे से 54 परिवार करोड़पती होना।
रालेगनसिद्धि :- अहमदनगर जिले का यह दूसरा ग्राम था जहां हमारी टीम ने जाकर भ्रमण किया। पूरे देश को भ्रस्टाचार से बचाने के लिए जन क्रान्ति लाने वाले अन्ना हजारे जी का यह 2500 जनसंखया वाला यह गांव देश के एक आदर्श गांव में गिना जाता है।
रालेगनसिद्धि मे हमें जो खास बात देखने को मिली उसमें अन्ना हजारे जी के जीवन के पांच सूत्र - 1- चारित्रिक शुद्धता 2- ईमानदारी 3- करनी और कथनी का एक होना 4- दृण इच्छा शक्ति 5- जमीन में गड़ने का बीज बनना, पिसने का नही, इसका अर्थ है कि एक बीज से ही वृक्ष बनता है और सबको फल एवं छाया देता है। तथा जो पिसने से तात्पर्य है। बिना कुछ परिश्रम किए ही जीना और बगैर कुछ किऐ ही इस संसार से विदा हो जाना। इन पांच सूत्रों पर ही रालेगन सिद्धि में कार्य हो रहें है, और देखने को मिलते है। यहां पर भी इन्होने जल संरक्षण के ऊपर से नीचे तक नाले पर अनेक अपनी संरचना बनाई है। जिससे जल संधारण होता है। सभी संरचनाओं में शासकीय विभागों का सहयोग प्राप्त हुआ है। युवाओं को लगु उद्योगो से जोड़ा गया है जैसे- डेयरी, छोटे-छोटे सब्जी फार्म आदि। ग्राम मे स्वच्छता संबंधी अभियान समय-समय पर चलाये जाते है। खुले में शौच जाने पर प्रतिबंध। सभी कार्य मनोयोग पूर्वक सेवा का व्रत लेकर करते हैं। 30 वर्ष पहले 20 प्रतिशत लोग एक समय खाना खाते थे। तथा 55 से 60 प्रतिशत लोग बाहर से अनाज लेकर आते थे और जब फसल आ जाती थी तब उत्पादन होने पर डबल चुकाते थे। कर्ज में पढ़ा हुआ ये गांव की स्थिति को मैरे देखा, और स्वामी विवेकानंद जी से प्रेरणा लेकर आत्महत्या करने की सोच रखने वाला यह अन्ना पूरी तरह ग्राम के विकास में लग गया और सबसे पहला काम वर्षा जल की एक-एक बूंद को रोककर जगह-जगह बांध बनाकर किया गया। रालेगनसिद्धि में प्रमुख रूप से आज काम हो रहे हैं उसमें- 1- अन्ना हजारेडेयरी उद्योग अपनाना। 2- जैविक खेती के माध्यम से खाद तैयार करना। 3- मिट्‌टी की उर्वरकता बचाना। 4- कचरा प्रबंधन। 5- ग्राम का ड्रेनेज सिस्टम ठीक होना आदि।
सिरपुर :- महाराष्ट्र के धुले जिले का यह छोटा सा गांव सिरपुर जहां हमारी टीम भ्रमण करने गई वहा श्री सुरेश खानापुरकर जी से मुलाकात हुई। अगर आधुनिक युग के भागीरत कहा जाए तो कम ना होगा। श्री सुरेश खानापुरकर भू-गर्भ वैज्ञानिक है तथा इनके द्वारा बनाई गई जल संरक्षण की संरचनाएं सिरपुर पैटर्न के नाम से ही प्रसिद्ध है। बगैर किसी डी.पी.आर., बगैर किसी टेक्निकल सपोर्ट के, खुद का अपना मैनेजमेंट कर श्री सुरेश जी ने जो अद्‌भूद कार्य किया है वह देखते ही बनता है। हमने जो सिरपुर पैटर्न की जल संधारण संरचना देखी उसमें -
1. नागेश्वर बांध लंबाई - 4 किमी बनाए गए डेम - 4 लाभांवित ग्राम - 3 डेम की माप - चौ. 20 मी. ग ग. 6 मी. संधारित पानी की मात्रा- 41 करोड़ लीटर
2. गोंडी नाला लंबाई - 1.5 किमी बनाए गए डेम - 4 लाभांवित ग्राम - 1 डेम की माप - चौ. 15 मी. ग ग. 10 मी. संधारित पानी की मात्रा- 22.5 करोड़ लीटर
3. सेवरनाला लंबाई - 1.5 किमी बनाए गए डेम - 4 लाभांवित ग्राम - 1 डेम की माप - चौ. 13 मी. ग ग. 6 मी. संधारित पानी की मात्रा- 45 करोड़ लीटर
4. दहीबड़नाला लंबाई - 5.5 किमी बनाए गए डेम - 5 लाभांवित ग्राम - 4 डेम की माप - चौ. 18 मी. ग ग. 6 मी. संधारित पानी की मात्रा- 66 करोड़ लीटर
इस तरह सिरपुर पैटर्न पर श्री सुरेश जी द्वारा 66 ग्राम में 120 डेम बनाए गए हैं। जो कि पुरी तरह मशीनों द्वारा खुदाई करके बनाये जा रहे हैं। अगर मध्यप्रदेश सरकार भी छोटी-छोटी नदियों को पुर्नजीवित करने के लिए सिरपुर पैटर्न को अपनाती है, तभी वास्तव में हमारी नदियां जीवित हो सकेगी।

''जो अपने लिए जीता है वह सदा के लिए मर जाता है। लेकिन जो दूसरों के लिए, समाज के लिए जीता है वह सदा-सदा के लिए अमर हो जाता है'' -श्री अन्ना हजारे
श्रीमती प्रिया चौधरी, जिला समन्वयक बैतूल
कपिल धारा से अब सिंचित खेती कर सकेगा मजिद का परिवार

From :- Media Officer


पहले सिंचाई का साधन नही था। अब इस वर्ष कपिलधारा कूप बन रहा है। जिससे मुझे खेती से लाभ होगा और मेरी आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी। यह कहना है गराम पंचायत बनिया टोला जनपद मझौली के माजिद का। माजिद बताते हैं कि उनकी ढाई एकड खेती की भूमि परिवार के अन्य लोगों के पास भी सिंचाई का कोई साधन नही था। कपिलधारा कूप मिल जाने से मेरे तथा मेरे परिवार की खेती योग्य लगीाग १४ एकड़ जमीन इससे सिंचित हो जायेगी। कूप को पूरे परिवार के लोगों ने ही मजदूरी करके तैयार किया है। घर के लोगों ने इस काम में रोजगार के अवसर पायें हैं। उपयंत्री श्री सूरज सिंह किरार ने बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी स्कीम -म.प्र. अंतर्गत यह कपिलधारा कूप २ लाख ४० हजार की लागत से बनाया जा रहा है।
जिसमें अभी तक ९०० मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध हो चुका है। अभी कूप निर्माण का कार्य चल रहा है। कुएँ में पर्याप्त मात्रा में पानी है। इसका उपयोग करते हुए उन्होंन सब्जियाँ भी पैदा करना प्रारंभ कर दिया है। सिंचाई का साधन मिल जाने से अब वह अपनी तथा अपने परिवार की खेती को सिंचित कर सकेगा। माजिद ने बताया कि उन्होंने अपने खेत में पहली बार सब्जी लगाई है। इसमें आलू, गोभी, टमाटर, लहसून मिर्ची तथा लाल भाजी शामिल है। माजिद तथा उसका पूरा परिवार कपिलधारा कूप पाकर खुश है। अब वह अपनी खेती को सींचकर लाभ की खेती कर सकेगा।

श्री शिवप्रसाद सोनी, मीडिया अधिकारी जिला पंचायत सीधी
तीन सौ अस्सी बोरियों का बोरी बंधान

From :- Samiti


मण्डला जिले के बिछिया विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाले प्रस्फुटन ग्राम लफरा में प्रस्फुटन समिति ग्रामीणों के सहयोग से जल संरक्षण पर कार्य कर रही है। हाल ही में गाँव के पास सुरपन नदी के ऊपर ३८० बोरियों का बोरी बंधान बनाया गया। इस बांध की लंबाई ४५ मी. तथा चौड़ाई १.५ मी. है। जिससे लफरा गाँव सहित आसपास के चार गाँव भी लांभावित हो रहे हैं और ५० एकड़ भूमि की सिंचाई की जा रही है। जल समस्या से निपटने के लिए प्रस्फुटन समिति एवं ग्रामीणों ने एक सराहनीय प्रयास किया है।

पर्यावरण संरक्षण के लिये बदलने होंगें नीति और नियम-श्री देवेन्दर शर्मा ।
अध्यक्ष, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति लफरा जिला मण्डला
जन भागीदारी से सिलपरा बना पूर्ण सी.एफ.एल. ग्राम

From :- Samiti


जहाँ प्रदेश में सरकार द्वारा ऊर्जा व बिजली बचाने के लिए नित नये प्रयास किये जा रहे हैं वहीं रीवा विकासखण्ड के ग्राम सिलपरा में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के नेतृत्व में ग्राम वासियों ने पूर्णतः सामुदायिक सहभागिता से अपने ग्राम को पूर्ण सी.एफ.एल. ग्राम बनाया है। ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ला ने सिलपरा ग्राम में ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के विकासखण्ड स्तरीय सम्मेलन में १०० प्रतिशत सी.एफ.एल. ग्राम की घोषणा की। सम्मेलन में श्री शुक्ला ने कहा कि प्रदेश सरकार माननीय मुख्यमंत्री के स्वर्णिम म.प्र. बनाने के सपने को साकार करने के लिए विविध क्षेत्रों में कार्य कर रही है। आज प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन से ज्यादा ऊर्जा बचाने की आवश्यकता है। ऐसे में म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों द्वारा किए जा रहे प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि जन अभियान परिषद्‌ को लोक सेवा गारंटी धिनियम के बेहतर प्रचारप्रसार के लिए अपनी भूमिका सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है। जन अभियान परिषद्‌ के क्षेत्रीय कार्यकर्ता एवं अधिकारियों द्वारा जिस समर्पण एवं लगन के साथ कार्य किये जा रहे हैं उसके परिणाम प्रस्फुटन समितियों के कार्यों में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने जिले के अन्य विकासखण्डों में ऊर्जा संरक्षण व समग्र ग्राम विकास के अन्य आयामों पर किए गये कार्यों को देखते हुए १३ ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के पदाधिकारियों को शाल और श्रीफल से सम्मानित किया।

विष्णु प्रसाद नागर, जिला समन्वयक रीवा,म.प्र.ज.अ.प
पाँच सौ बोरियों का बोरी बंधान बनाया

From :- Prashphutan Samiti


हम प्राकृतिक स्त्रोतों एवं संसाधनों का दोहन जीवन की शुरूआत से ही कर रहे हैं, सदियों से भूमिगत जल का उपयोग कर रहे हैं, पर हमने जल संरक्षण और संवर्धन के लिये कोई उपाय नही किये। परिणाम स्वरूप भूमिगत जल का स्तर काफी नीचे चला गया है और बहते पानी को रोका नही जा रहा है। अब जरूरत है, जल को वापस भूमि में पहुँचाने की ताकि यह चक्र निरन्तर चलता रहे, आवश्यकता है जल की खेती करने की। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए रीवा जिले की ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति खौर में प्रथम चरण में बिछिया नदी पर बोरी बंधान का लक्ष्य रखा गया।
जिसमें ग्राम खौर, लक्ष्मणपुर, कनौजा की प्रस्फुटन समितियों द्वारा क्रमशः २००, १००, १०० बोरियों व खौर ग्राम सरपंच के १०० बोरियों के सहयोग से कुल ५०० बोरियों को एकत्रित कर बिछिया नदी पर बोरी बंधान किया गया। सर्वप्रथम १०३ लोगों द्वारा नदी के जट्‌ठा घाट की साफ सफाई की गई और फिर दो दिन १८ घण्टे तक निःशुल्क श्रमदान कर बोरीबंधान का कार्य पूर्ण किया। अब यहाँ बोरीबंधान के कारण पर्याप्त मात्रा में पानी एकत्रित हो गया है, जिसका उपयोग आज ग्रामवासियों द्वारा पीने व खेती में किया जा रहा है। इससे स्थानीय हैडपंप, कुँओं का जल स्तर बढ़ गया है। जल संरचना को लेकर समिति के प्रयास को देख गाँव वालों का भी जल संरक्षण व संवर्धन की ओर रुझान बढ़ रहा है।

अध्यक्ष, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति खौर जिला रीवा
मुख्यमंत्री ने ग्राम हरदा को पूर्णतः नशामुक्त घोषित किया
बुरहानपुर जिले के ग्राम हरदा में प्रस्फुटन समिति सदस्यों ने गाँव में शराब, गुटका व पाऊच विक्रय को प्रतिबंधित कर जनभागीदारी से नशामुक्ति के लिए सराहनीय प्रयास किया है। ग्राम में स्वच्छता, रोजगार सृजन, महिलाओं का सशक्तिकरण एवं विधवा महिलाओं के सम्मान के लिए प्रशंसनीय कार्य किए गए हैं। पिछले दिनों प्रदेश के मुख्मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान वनवासी सम्मान यात्रा के अवसर पर हरदा आए। श्री चौहान ने इस अवसर पर हरदा गाँव को पूर्णतः नशामुक्त गाँव घोषित किया। इस मौके पर ग्राम पंचायत हरदा सरपंच श्री सौभान सिंह चौहान को नशामुक्ति के उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। वनवासी बाहुल्य क्षेत्र का हरदा गाँव आज नशामुक्ति भियान का अनुकरणीय उदाहरण है। यहां सरपंच एवं ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति की मदद से ग्रामीणों ने गुटका, शराब व अन्य नशा करना छोड़ दिया है। अब उन्होंने अन्य गाँवों को भी इन बुराईयों से बचाने का अभियान छेड़ा है। गंभीरपुरा, ईटारिया, बसाली व डोजर गाँव भी शराब, गुटका की बुराईयों से परिवारों को बचाने में जुटे हुए हैं। जिला प्रशासन ने इस गाँव की पहल को आइकॉन के रूप में लेकर पूरे जिले में लागू करने की योजना है। स्वच्छता जागरूकता सप्ताह से पहले गाँव में पॉलीथिन हटा दी गई है। जिला कलेक्टर श्रीमती रेणु पंत व जिला पंचायत सी.ई.ओ . श्री रमेश भंडारी ने अवलोकन के दौरान गाँव के इन अनूठे अभियानों की प्रशंसा की है साथ ही वे अन्य गाँवों में हरदा का प्रेरक उदाहरण भी देते हैं।
राजकुमार मालाकार, वि.ख. समन्वयक, जिलाबुरहानपुर, म.प्र. ज.अ.प

 
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