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संस्थागत संरचना

म.प्र. जन अभियान परिषद् उच्च स्तरीय निकाय द्वारा संचालित संस्था है। संस्था के अंतर्गत एक शासी निकाय तथा एक कार्यकारिणी सभा का गठन किया गया है। इसके अध्यक्ष म.प्र. शासन के मुख्यमंत्री हैं तथा योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री व किसी एक प्रतिष्टित स्वैच्छिक संस्था से अशासकीय सदस्य इस प्रकार इसके दो उपाध्यक्ष हैं | शासी निकाय में विभिन्न विभागों के मंत्री और स्यवंसेवी संस्थाओं के १५ नामांकित प्रतिनिधि सदस्य है। जिनमें कम से कम 3 महिलाएँ एवं 3 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधि शामिल है। संस्था में नामांकित सदस्यों की सदस्यता अवधि दो वर्ष है। ऐसे सदस्य पुनः नामांकन के भी पात्र हैं। शासी निकाय द्वारा नीति निर्देश तैयार करने संचालन के मापदंड निर्धारित करने तथा संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु कार्यकारिणी सभा को निर्देश दिया जाता है। शासी निकाय की बैठक वर्ष में एक बार होती है। 

शासी निकाय द्वारा निर्धारित नियम, विनियम तथा आदेशों के अंतर्गत संस्था के प्रशासकीय कार्य कार्यकारिणी सभा द्वारा संचालित होते हैं। म.प्र. जन अभियान परिषद् के संचालन हेतु गठित कार्यकारिणी सभा के सभापति मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव हैं। विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव एवं पांच नामांकित स्वंयसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि इसके सदस्य हैं। शासन द्वारा नियुक्त पूर्णकालीन कार्यपालक निदेशक इन दोनों समितियों के सदस्य सचिव हैं। कार्यकारिणी सभा की बैठक वर्ष में चार बार होती है। कार्यकारिणी सभा जन अभियान परिषद् के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु संस्था के नियमों के तहत् कार्यो का निर्वहन करती ह।

संस्था के कार्यों एवं प्रगति की समीक्षा तथा आवश्यकतानुसार दिशा-निर्देश राज्य शासन द्वारा दिये जाते हैं। म.प्र. जन अभियान परिषद् का राज्य कार्यालय भोपाल में स्थित है। परिषद् की गतिविधियों के संचालन हेतु प्रशासन शाखा, वित्त शाखा, क्रियान्वयन शाखा, प्रकाशन शाखा के अतिरिक्त क्षमता वृद्धि, परियोजना, स्वयंसेवी संस्था तथा अनुश्रवण मूल्यांकन प्रकोष्ठ है।

प्रदेश के प्रत्येक संभाग, जिला व विकास खण्ड में म.प्र. जन अभियान परिषद् के कार्यालय स्थित है। मैदानी कार्यों के क्रियान्वयन व सम्पादन के लिए संभाग, जिला व विकासखण्ड स्तर पर समन्वयक पदस्त हैं।

शासी निकाय -

म.प्र. जन अभियान परिषद् उच्च स्तरीय शासी निकाय द्वारा संचालित संस्था है। शासी निकाय में पदेन अध्यक्ष म.प्र. शासन के मुख्यमंत्री माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान हैं।

शासी निकाय के सदस्यों में शामिल है -

  • स्कूल शिक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग, ग्रामोद्योग विभाग, वित्त विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्थानीय शासन, नगरीय कल्याण विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, जनशक्ति नियोजन विभाग, गृह विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग के मंत्रीगण, सभापति कार्यकारिणी सभा।

  • शासन द्वारा मनोनित प्रत्येक संभाग से प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्थाओं के 15 प्रतिनिधि, जिनमें कम से कम 3 महिलाएँ, 3 अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अल्पसंख्यक वर्ग के प्रतिनिधि शामिल हैं। सचिव ग्रामीण क्षेत्र एवं रोजगार मंत्रालय भारत शासन या उनके द्वारा मनोनीत एक प्रतिनिधि।

  • महानिदेशक, कपार्ट या उनके द्वारा मनोनीत एक प्रतिनिधि।

  • सदस्य सचिव, राज्य शासन द्वारा नियुक्त अधिकारी, जो संस्था के कार्यपालक निदेशक भी हैं।

कार्य अवधि -

संस्था में नामांकित सदस्यों की सदस्यता अवधि 2 वर्ष है, ऐसे सदस्य पुनः नामांकन कर सकते हैं।

सदस्यता की समाप्ति व त्यागपत्र -

किसी भी सदस्य की सदस्यता उसके द्वारा त्यागपत्र देने, पागल होने या दीवालिया होने अथवा किसी चरित्रहीनता के अपराध में दंडित किये जाने पर समाप्त हो सकती है। यदि कोई सदस्य संस्था की सदस्यता से त्यागपत्र देना चाहता है, तो वह संस्था के कार्यपालक निदेशक को संबोधित कर लिखित में दे सकता है।

शासी निकाय के कार्य -
  • नीति निर्देश तैयार करना, संचालनके मापदण्ड निर्धारित करना तथा मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु कार्यकारिणी सभा को निर्देश देना।

  • कार्यकारिणी सभा द्वारा तैयार वार्षिक बजट प्रस्ताव पर विचार व उपयुक्त संशोधन समय-समय पर पारित करना।

  • राज्य शासन से विचार-विमर्ष कर संस्था के संचालन हेतु कार्य करने के नियम बनाना, उन्हें संशोधित या निरस्त करना।

  • कार्यकारिणी सभा द्वारा तैयार वार्षिक प्रतिवेदन पर विचार करना।

  • संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु केन्द्र एवं राज्य शासन के विभिन्न विभागों एवं स्वयंशासी अभिकरणों की सहभागिता से प्रशासकीय ढांचा तैयार करना।

  • कार्यकारिणी सभा या किसी भी अधिकारी या पदाधिकारी को कार्य सौंपना।

  • संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु आवश्यक कार्यों को आरंभ करना।

     

कार्य प्रणाली -
  • संस्था के अध्यक्ष द्वारा निर्धारित किये गये स्थान, समय एवं दिनांक पर शासी निकाय की बैठक सम्पन्न की जाती हैं। वित्तीय वर्ष में एक वार्षिक सामान्य बैठक करना अनिवार्य है।

  • शासी निकाय की बैठक बुलाने के लिये कम से कम 10 दिन पूर्व से सूचना दी जाती है संस्था के अध्यक्ष या तो स्वयं या संस्था के कार्यपालक निदेशक को लिखित में सूचित कर शासी निकाय की बैठक करते हैं।

  • बैठक की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष करते हैं। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में संस्था के एक उपाध्यक्ष द्वारा अध्यक्षता की जा सकती है। यदि दोनों अनुपस्थित हो तो बैठक की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष द्वारा नामांकित सदस्य द्वारा की जाती है।

  • शासी निकाय की बैठक में न्यूनतम कोरम कुल सदस्य संख्या के एक तिहाई सदस्य का होना अनिवार्य है। यदि कोरम पूरा न हो तो सदस्य सचिव द्वारा बैठक स्थगित कर तुरंत पुनः बैठक की जा सकती है। बैठक में कोरम की आवश्यकता नहीं होती।

  • शासी निकाय के प्रत्येक सदस्य को एक वोट देने का अधिकार है। यदि सदस्यों के वोटों के मध्य समानता हो तो विषय के निर्णय के लिये अध्यक्ष या उस बैठक की अध्यक्षता कर रहे व्यक्ति को निर्णायक वोट देने का अधिकार होगा।

  • बैठक में सदस्य सचिव अध्यक्ष की ओर से विषय से संबद्ध किसी शासकीय विभाग या अशासकीय संस्था के प्रतिनिधि या व्यक्ति विशेष को आमंत्रित कर सकते हैं।

  • यदि किसी विषय पर तुरंत निर्णय लेना आवश्यक हो तो सदस्यों के बीच वह विषय लिखित में अनुमोदन हेतु भेजा जाता है तथा सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर उपरान्त यह निर्णय निकाय की बैठक में पारित प्रस्ताव की तरह प्रभावशील होता है।

  • अध्यक्ष, उपाध्यक्षगण, कार्यपालक निदेशक तथा अन्य निदेशक या अन्य सदस्य जिन्हें कार्यकारिणी सभा द्वारा पदांकित किया गया है, संस्था के अधिकारी हैं।

संस्था के पदाधिकारी -
  • कार्यकारिणी सभा।

  • सामान्य सभा व कार्यकारिणी सभा या गठित ऐसे कोई भी अन्य पदाधिकारी।

  • कार्यकारिणी सभा

  • शासी निकाय द्वारा निर्धारित नियम, विनियम तथा आदेशों के अन्तर्गत संस्था के प्रशासकीय कार्य, कार्यकारिणी सभा द्वारा किये जाते हैं।

कार्यकारिणी सभा की संरचना -
  • सभापति मुख्य सचिव म.प्र. शासन

  • उपसभापति शासन द्वारा नामांकित अशासकीय सदस्य।

कार्यकारिणी सभा के सदस्य -
  • स्कूल शिक्षा, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण, ग्रामोद्योग, वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्थानीय शासन, नगरीय कल्याण, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, जनशक्ति नियोजन, गृह विभाग, आदिम जाति कल्याण आदि विभागों के प्रमुख सचिव।

  • प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्थाओं के 5 प्रतिनिधि। यह प्रतिनिधि शासी निकाय द्वारा नामांकित 15 प्रतिनिधियों में से होंगे।

  • सदस्य सचिव, राज्य शासन द्वारा नियुक्त अधिकारी, जो संस्था के कार्यपालक निदेशक हैं।

कार्यकाल एवं त्यागपत्र -

कार्यकारिणी सभा में नामांकित सदस्य का कार्यकाल 2 वर्ष का होता है। ऐसे सदस्य पुनः नामांकन के लिये पात्र हैं। पागल होने, दिवालिया होने या किसी चरित्रहीनता के अपराध में दंडित किये जाने पर सदस्यता समाप्त हो जाएगी। जब भी कोई सदस्य सदस्यता छोडने के लिये त्यागपत्र देना चाहता है, तो त्यागपत्र संस्था के कार्यपालक निदेशक को संबोधित कर लिखित में दे सकता है।

कार्यकारिणी सभा की कार्यवाही -

कार्यकारिणी सभा के सभापति द्वारा निर्धारित स्थान समय एवं दिनांक पर प्रत्येक तीन माह में एक बैठक की जाती है। बैठक की अध्यक्षता सभापति करते हैं। सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति तथा दोनों की अनुपस्थिति में सभापति द्वारा पदांकित कार्यकारिणी सदस्य द्वारा की जा सकती है बैठक के लिए न्यूनतम कोरम सदस्य संख्या के एक तिहाई आवश्यक है। कोरम पूरा न होने की स्थिति में सदस्य सचिव बैठक स्थागित कर पुनः बैठक कर सकते हैं। सभा के प्रत्येक सदस्य को निर्णय लेने के विषय पर वोट देने का अधिकार है। कार्यकारिणी सभा के सभापति शासकीय विभाग या अशासकीय संस्था के प्रतिनिधि या व्यक्ति विशेष को उनसे संबंद्ध प्रस्ताव पर विचार के समय आमंत्रित कर सकते हैं।

कार्यकारिणी सभा के अधिकार एवं कार्य -
  • शासी निकाय द्वारा दिये गये आदेश, सभी कर्तव्य, शक्तियाँ कार्य एवं अधिकारों का उपयोग संस्था के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कार्यकारिणी सभा द्वारा किये जाते है।

  • प्रशासकीय एवं वित्तीय अधिकारों का उपयोग तथा विभिन्न स्तर के पदों का निर्माण करना।

  • संस्था के वित्तीय एवं अन्य सभी कार्यकलापों का प्रबंधन एवं नियंत्रण।

  • संस्था की गतिविधियाँ एवं कार्यकलाप संचालन के लिए राज्य शासन से विचार विमर्श कर नियम बनाने, संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सार्वजनिक या व्यक्तिगत संस्थाओं एवं व्यक्तियों से अनुबंध करने का अधिकार है।

  • चल एवं अचल संपत्ति क्रय करना, किराये पर लेना, भवनों का संधारण, परिवर्तन या निर्माण करने का कार्य करेगी।

  • शासन द्वारा प्राप्त अनुदान से निर्मित परिसंपत्तियों का विक्रय शासन की पूर्व अनुमति बिना नहीं किया जा सकता, न ही गिरवी रखा जा सकता और न उस उद्देश्य के अलावा अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग कर सकते हैं, जिसके लिए अनुदान स्वीकृत किया गया था।

  • विभिन्न गतिविधियों के संचालन हेतु स्थायी समितियों एवं टास्क फोर्स का गठन तथा इनकी गतिविधियों, सदस्य संख्या, अधिकार तथा कार्यों का निर्धारण करना।

  • उचित समझने पर सभापति, उपसभापति, कार्यपालक निदेशक या किसी अन्य सदस्य या समिति व दल या संस्था के किसी अन्य अधिकारी को प्रशासनिक, वित्तीय तथा शैक्षणिक अधिकार कर्तव्यों के क्रियान्वयन तथा निर्वहन हेतु सीमाएं निर्धारित करना।

  • कार्यकारिणी सभा को यह अधिकार है कि वह कार्यक्षेत्र पर ऐसे उपनियम पारित करे जो कार्यकारिणी सभा को दी गई शक्तियों, अन्य प्राधिकारियों या संस्था के उद्देश्यों के विपरीत न हो।

कार्यपालक निदेशक के कार्य -

राज्य शासन द्वारा संस्था के लिये एक कार्यपालक निदेशक नियुक्त है। कार्यपालक निदेशक का यह दायित्व है कि वह कार्यकारिणी सभा के निर्देश एवं मार्गदर्शन में संस्था के प्रशासनिक एवं वित्तीय मामलों का सही-सही प्रबंधन करे तथा विभिन्न गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करवाये।

परिषद् का कोष -

भारत शासन से प्राप्त आवर्ति एवं अनावर्ति अनुदान तथा राज्य शासन या अन्य अभिकरण से संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु प्राप्त अनुदान।

अन्य स्त्रोतो से प्राप्त आय -

संस्था के बैंकों का निर्धारण कार्यकारिणी सभा करती है। संस्था को प्राप्त सभी राशियाँ इसी बैंक खाते में जमा होती है तथा कार्यपालक निदेशक व संस्था द्वारा अधिकृत अन्य अधिकारी के हस्ताक्षरों से जारी चैकों द्वारा ही राशि का आहरण किया जाता है।

लेखा एवं राशि -
  • परिषद के पंजीकृत कार्यालय में सभी स्त्रोतों से प्राप्त राशियाँ एवं स्त्रोतों के नाम तथा संस्था द्वारा व्यय की गई राशियों का विवरण, व्यय का उद्देश्य, देनदारियों का विवरण दर्ज है।

  • परिसम्पत्तियाँ तथा कार्यकारिणी सभा द्वारा नियुक्त चार्टड एकाउन्टेंट द्वारा संस्था के लेखों का आडिट किया जाता है। मध्यप्रदेश सोसायटीज रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 के नियमों के तहत राज्य शासन के अनुमोदन से संस्था के आडिट के लिये कार्यकारिणी सभा द्वारा उप नियम तैयार किये गये हैं, जिसमें आडिट की प्रवृति, लेखों के प्रारूप तथा उन्हें भरने के विस्तृत निर्देश, आडिट हेतु लेखों का प्रस्तुतिकरण आदि की विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित की है।

  • कन्ट्रोलर एवं आडिटर जनरल (ड्यूटीज, पावर एवं कन्डीशन ऑफ सर्विस), 1971 के नियमों के तहत भी संस्था के लेखों का आडिट होता है।

 

वार्षिक प्रतिवेदन -

कार्यकारिणी सभा द्वारा राज्य शासन तथा संस्था के सदस्यों को सूचित करने के लिए संस्था की गतिविधियों तथा वित्तीय वर्ष में संपादित किये गये कार्यों, विवरणों का वार्षिक प्रतिवेदन, लेखा एवं आडिट रिपोर्ट संस्था की वार्षिक साधारण सभा में प्रस्तुत की जाती है।

संस्था की संपत्ति -

संस्था से संबंधित सभी परिसम्पत्तियाँ संस्था की सम्पति हैं।

कार्यवाही -

यदि कोई सदस्य संस्था के किसी कार्य या संपत्ति को नुकसान पहुँचाये तो संस्था द्वारा उस सदस्य पर कार्यवाही की जा सकती हैं।

राज्य शासन के अधिकार -

राज्य शासन एक या एक से अधिक व्यक्तियों को संस्था के कार्यों एवं प्रगति की समीक्षा करने हेतु नियुक्त कर सकता है। शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संस्था की जाँच की जा सकती है। आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर सकता है। संस्था का यह दायित्व है कि वह इन दिशा निर्देशों का तत्परता से पालन करें।

कार्यालयीन संरचना -

म.प्र. जन अभियान परिषद् का मुख्यालय प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित है। कार्यालय प्रमुख, कार्यपालक निदेशक हैं। जन अभियान परिषद् की समस्त गतिविधियों के संचालक हेतु शाखा व प्रकोष्ठ बनाए गये हैं।

1. प्रशासन शाखा -

इस शाखा के प्रभारी निदेशक प्रशासन हैं। सहयोग हेतु उप-निदेशक, लेखा अधिकारी, सहायक अधिकारी, कर्मचारी, कम्प्यूटर प्रभाग आदि शामिल हैं। इस शाखा द्वारा राज्य कार्यालय का संपूर्ण प्रबंधन : राज्य, संभाग, जिले व ब्लाक के अधिकारी कर्मचारियों की भर्ती से संबंधित समस्त कार्य, व्यक्तिगत फाइलों का संधारण, अवकाश, वार्षिक मूल्यांकन विधानसभा, लोक सूचना एवं न्यायालय से सबंधित संकलन व संपादन, शासकीय अधिकारियों, विभागों एवं मंत्रालय से संफ, शासी निकाय, कार्यकारिणी सभा व अन्य समस्त राज्य स्तरीय बैठकें, कार्यालयीन टेंडरों का निर्माण, भंडार, संधारण एवं क्रय संबंधित समस्त प्रक्रियाओं का निर्धारण। वेब डिजाइनिंग, वेब साइट का संधारण, ई-डायरेक्ट्री का संधारण एवं समस्त डाटा संग्रह आदि कार्य संचालित किये जाते है।

 
2. वित्त शाखा -

इस शाखा में लेखाधिकारी, लेखापाल, सहायक, लिपिक, कम्प्यूटर ऑपरेटर आदि कार्यरत हैं। इस शाखा द्वारा जन अभियान परिषद् का बजट बनाना, शासी निकाय व कार्यकारिणी सभा की बैठकों में वित्त से संबंधित समस्त कार्यवाही, परिषद् के राज्य कार्यालय का बजट एवं समस्त वित्तीय प्रबंधन का प्रत्यक्ष में संपादन, संभाग, जिला, ब्लाक स्तर के समस्त कार्यालयों के बजट आवंटन व लेखा संबंधी जानकारियों का आदान-प्रदान, समस्त कार्यालयों में देय वार्षिक बजट का लेखा-जोखा, परिषद् के खातों, कैशबुक व लेजर का संधारण, वार्षिक लेखा प्रतिवेदन तैयार करना, कार्यालय का ऑडिट कराना आदि कार्य संचालित किये जाते हैं।

3. परियोजना शाखा -

इस शाखा में चार प्रकोष्ठ क्रमशः- परियोजना, क्षमता विकास, मूल्यांकन, स्वयंसेवी संस्था शामिल है। प्रत्येक प्रकोष्ठ में एक निदेशक व उनके सहयोग हेतु तीन-तीन कार्य प्रबंधकों की टीम प्रस्तावित है। प्रत्येक शाखा अपनी विशेषज्ञता के अनुसार कार्यरत हैं।

(1) परियोजना प्रकोष्ठ : यह प्रकोष्ठ विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों हेतु परियोजनाओं का निर्माण व क्रियान्वयन, विभिन्न शासकीय, अशासकीय विभागों हेतु परियोजना प्रस्ताव का निर्माण कर आवंटन के लिए प्रस्तावित करता है।

(2) स्वयंसेवी संस्था प्रकोष्ठ : इस प्रकोष्ठ द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं को संस्था निर्माण की जानकारी, शासकीय योजनाओं एवं विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी देना, म.प्र. जन अभियान परिषद् के नवांकुर, प्रस्फुटन व दृष्टि योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाता है।

(3) क्षमता विकास प्रकोष्ठ : इस प्रकोष्ठ में स्वयंसेवी संस्थाओं हेतु राज्य, संभाग, जिला एवं ब्लाक स्तर पर आवश्यकता अनुरूप विविध प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना। राज्य संभाग, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों को समय-समय पर व्यक्तित्व विकास अथवा अन्य आवश्यक प्रशिक्षण उपल्ब्ध कराना। परिषद् की भावी योजनाओं नवांकुर, प्रस्फुटन, सृजन, दृष्टि के अंतर्गत शामिल प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन। राज्य स्तर पर आवश्यकतानुसार विभिन्न ट्रेनिंग माड्यूल व संदर्भ सामग्री तैयार करना शामिल है।

(4) मूल्यांकन प्रकोष्ठ : प्रकोष्ठ द्वारा विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर आधारित मूल्यांकन रिपोर्ट निर्माण। विविध परियोजनाओं की स्टडी रिपोर्ट निर्माण। शासकीय एवं अशासकीय योजनाओं की मांग अनुरूप परियोजनाओं का मूल्यांकन कर रिपोर्ट निर्माण। राज्य, संभाग, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर सम्पन्न कार्यक्रमों की राज्य स्तरीय रिपोर्ट निर्माण एवं उनका मूल्यांकन किया जाता है।

4. प्रकाशन शाखा -

इस शाखा में शाखा प्रमुख के अतिरिक्त डिजाइनर, कंपोजिंग युनिट कार्यरत है। शाखा द्वारा विभागीय मासिक पत्रिका के प्रकाशन के अतिरिक्त वेबसाइट संदर्भ व सभी प्रकार का लेखन, मुद्रण व प्रचार वार्षिक प्रतिवेदन, विज्ञप्ति जारी करना तथा पुस्तकालय का संचालन किया जाता है।

5. क्रियान्वयन शाखा -

इस शाखा अंतर्गत मैदानी गतिविधियों का पर्यवेक्षण दो क्षेत्रीय निदेशकों द्वारा किया जाता है जो राज्य कार्यालय में पदस्थ हैं। इस शाखा में क्षेत्रीय निदेशक संभाग, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर मैदानी गतिविधियों को संभाग, जिला एवं ब्लॉक समन्वयकों के माध्यम से संचालित करते हैं। शाखा द्वारा राज्य कार्यालय में तैयार की गई विभिन्न परियोजनाओं का संभाग, जिला व ब्लॉक स्तर पर क्रियान्वयन, निरिक्षण व संचालन किया जाता है।


 
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