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विशेष
जुगाड़ से बनाया पुल

From :- Patrika,August , 2013


हरदा जिले की नवांकुर संस्था कुकरावद ने बगैर किसी आर्थिक सहायता से ग्राम की मटकुल नदी पर जुगाड़ से पुल का निर्माण किया है। यह पुल आवागमन के लिए वरदान साबित हुआ है। इस पुल निर्माण के लिए ग्राम के 25 युवाओं ने मिलकर सामूहिक श्रमदान किया। इस कार्य में लगभग 20 दिनों तक लगातार समिति सदस्यों -द्वारा श्रमदान किया गया। पूर्व में शासन -द्वारा नदी पर निचले रपटे का निर्माण किया गया है। परन्तु हमेशा रपटे पर वर्षा का पानी आ जाने के कारण आवागमन बाधित होता था। अतः करीब 130 फीट ऊँचे तथा चार फीट चौड़े पुल के निर्माण कार्य को पूर्ण करने हेतु एक दिन में एक युवा -द्वारा पाँच घण्टे तक श्रमदान किया गया। इस तरह एक युवा ने पुल निर्माण में 125 घण्टे तक श्रमदान किया। इससे पहले ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति कुकरावद के सदस्यों ने सर्वप्रथम टूटे हुए खम्भों का पता किया कि कहाँ पर खम्भे गिरे पड़े हैं, जो अनुपयोगी हैं। तत्पश्चात ग्राम के प्रत्येक घर से एक लकड़ी का पटिया तथा 3040 बांस की बल्ली ली गई। पुल निर्माण योजना बनाकर समिति सदस्यों ने रस्सी से नदी की चौड़ाई को मापकर तथा गहराई देखकर आंकलन किया और पुल का निर्माण प्रारंभ किया। इस पुल निर्माण कार्य में ग्रामीणों ने भी सहयोग दिया। ग्रामीण युवाओं -द्वारा किए गए पुल निर्माण कार्य की संयुक्त कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी हरदा ने स्वयं जाँच की। साथ ही जिला होमगार्ड अधिकारी -द्वारा पुल की मजबूती देखी गई। समिति ने अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन भी दिया। अनुविभागीय अधिकारी ने कहा कि पुराने पुल को परिवर्तित कर जल्द ही नये पुल निर्माण का कार्य प्रारंभ किया जायेगा।

रतनलाल चरपोटा जिला समन्वयक हरदा, म.प्र. जन अभियान परिषद्
पशु समाधि : एक पहल पर्यावरण संरक्षण की

From :- Patrika,August , 2013


जिला बुरहानपुर के विकासखण्ड बुरहानपुर का ग्राम मैथाखारी बंजारा बाहुल्य ग्राम है। इस ग्राम के प्रस्फुटन समिति सदस्यों ने प्रदूषण मुक्ति के लिये ग्रामीणों को पशु समाधि खाद बनाने के लिये प्रेरित करते हुए इसके महत्व को बताया। समिति सदस्यों ने लोगों को कहा कि सड़क किनारे पड़े रहने वाले मृत शव मानवीय जीवन को खतरा पहुँचाते हुए पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं यदि ग्राम में पशु समाधि स्थल निर्मित हो गया तो मृत पशु से जो वातावरण प्रदूषित होता है उससे ग्रामवासियों को निजात मिलेगी। पशु की समाधि से 11 माह में समाधि खाद भी प्राप्त कर सकते हैं जो कि जैविक खेती को बढ़ावा देता है। साथ ही समाधि खाद भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाता है। जिससे अच्छी फसल का उत्पादन लिया जा सकता है। एक पशु समाधि से हम लगभग एक ट्राली खाद प्राप्त कर सकते हैं। प्रस्फुटन समिति की प्रेरणा से ग्रामीणों ने पशु समाधि बनाने पर सहमति दी। इसी के अंतर्गत गाँव में तीन एकड़ जमीन पशु समाधि के लिए चिंहित की गयी। वर्तमान में गाँव में पशु समाधि खाद तैयार की जा रही है। इस तरह समिति की पहल से गाँव में नई परम्परा प्रारंभ हुई है। पशु समाधि निर्माण विधि भूमि में एक 6 फीट चौड़ा एवं 6 फीट गहरा गड्ढा तैयार करें। गड्ढे में आधा नमक आधा चूना डालें। मृत पशु को गड्ढे में डालें। चूना एवं नमक पुनः गड्ढे में डालें 6 इंच मिट्टी की परत बनाते हुए गड्ढे को बंद करें। गड्ढे पर गोबर की परत बना दें। मिट्टी से गड्ढे को पूर्ण भर दें। गड्ढे में 510 दिन पश्चात 500 लीटर पानी डालकर मिट्‌टी को नम करें। ग्यारह माह बाद उस गड्ढे में से मिट्टी सहित उस खाद को बाहर निकालें। मृत पशुओं के हड्डियों के अवशेष का उपयोग भूमि उर्वरता के लिये किया जाये। महत्व पशुओं की हड्डियों में प्राकृतिक कैल्शियम होता है इसलिए पशु समाधि खाद का उपयोग यूरिया पोटाश एवं डी.ए.पी. के स्थान पर कर सकते हैं।

रतनलाल चरपोटा जिला समन्वयक हरदा, म.प्र. जन अभियान परिषद्

एक सौ पचास किसान कर रहे मधुमक्खी पालन

खेती के साथ आर्थिक स्वावलम्बन के अन्य स्त्रोत को विकसित करने के उद्देश्य से प्रस्फुटन समिति सदस्यों ने उद्योग विभाग द्वारा दिये जाने वाले विकासखण्ड स्तरीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण के माध्यम से मधुमक्खी पालन कर शहद निर्माण को लेकर दक्षता हासिल की गयी। शहद निर्माण कार्य को व्यापक रूप देने के लिये शिवपुरी जिले के विकासखण्ड पोहरी की ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति सरजापुर की प्रेरणा से मधुमक्खी पालन कर शहद का व्यवसाय किया जा रहा है। इसके लिए प्रस्फुटन समिति सदस्यों ने किसानों को विकासखण्ड स्तर पर प्रशिक्षण दिया। 
मधुमक्खी पालन का कार्य सीखने के बाद ग्रामीणों ने कार्य शुरू किया। वर्तमान में सरजापुर गाँव के अलावा प्रस्फुटन गाँव गुड़ा व आसपास के स्पन्दन गाँवों के १५० किसान इस व्यवसाय में लगे हुए हैं। इस कार्य के लिए इन किसानों ने खेतों पर मधुमक्खियों के ३० छत्ते (प्लांट) लगाए हैं। उल्लेखनीय है कि यह कम लागत पर ज्यादा लाभ का व्यवसाय है। इस व्यवसाय से अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।
मधुमक्खी के प्रकार : मधुमक्खी विभिन्न प्रकार की होती हैं १. सादा मधुमक्खी २. भौर विशाल बड़ी मक्खी ३. छोटेछोटे पंख वाली मधुमक्खी ४. राजा, रानी मधुमक्खी इत्यादि।
पालतू मधुमक्खी : ऐसी मधुमक्खी जिनका पालन पोषण किया जाता है पालतू मधुमक्खिया कहलाती हैं। पालतू मधुमक्खी से शहद या मधु प्राप्त किया जाता है।
मधुमक्खी पालन : मधुमक्खी का पालन पोषण करने के लिए छोटेछोटे आकार के डिब्बे या पेटियां बनाई जाती हैं। इन पेटियों में मधुमक्खी अपना जीवन जीने के लिए एक गोल धनुष आकार का छत्ता बनाती हैं। उसमें गोल आकार के छिद्र होते हैं जिसमें वह पना जीवन काल बिताती है। मधुमक्खियाँ लगभग २० से २५ दिन में छत्ता बना लेती हैं एवं ३० से ४५ दिन तक अण्डे देना शुरू कर देती हैं। लगभग १८ से २० दिनों तक ण्डों से बच्चे प्राप्त करती हैं। जैसे जैसे उनकी संख्या बढ़ती जाती है वे कई प्रकार के फलों एवं फूलों से शहद बनाती हैं। इन पेटियों को खाली जगह जहां फूलों एवं फलों की सुगंध हो ऐसे खेतों, बागो, बगीचों, फूलों वाली फसलों के पास रखा जाता है। पालतू मधुमक्खियों को संकेत जैसे सीटी या आवाज के माध्यम से उन पेटियों में उड़ाया व बैठाया जाता है। मधुमक्खियों में कुछ मक्खियां राजा होती हैं व कुछ रानियां होती हैं। यह राजा व रानी मधुमक्खियाँ अन्य को इधरउधर घुमाने का कार्य करती हैं। एक मक्खी ५० से १२५ मक्खियों का उड़ाने, घुमाने एवं स्थान पर लाने का कार्य करती हैं। पालतू मधुमक्खियाँ फूलों का रस तथा नमीदार जगह पर बैठकर डिब्बों में रस एकत्र करती हैं। पेटियों के छत्तों में भरी हुई शहद को हर शाम मधुमक्खी पालने वाले व्यक्तियों द्वारा निकाला जाता है और इस शहद को लग लग बर्तनों में भरा जाता है। 
पालतू मधुमक्खियों के स्थान को एक या दो दिन में परिवर्तित करते रहते हैं ताकि मधु पर्याप्त मात्रा में प्राप्त होती रहे। मधुमक्खी पालन के बाक्स उस जगह पर धिक रखते हैं जिसमें अधिक फूलने वाली फसलें हो जैसे अजवाइन, आम, सरसों, मटर, चना आदि। जिन किसानों की जगह में यह बाक्स रखा जाता है उन किसानों को किराया दिया जाता है। 
इस प्रकार प्रस्फुटन समिति की प्ररेणा से ग्रामीण जन शहद व्यवस्था करने लगे हैं। आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण व खाने में गुणकारी होने के कारण शहद की मांग अधिक है। प्रस्फुटन समिति के प्रयास से मधुमक्खी पालन से आर्थिक स्वावलम्बन की ओर किया जाने वाला यह अपनी तरह का उल्लेखनीय प्रयास है।
धर्मेन्द्र सिंह सिसौदिया
जिला समन्वयक
शिवपुरी, म.प्र. ज. अ .प.

जन संकल्प - 2008

वर्ष 2008 में शासन ने विभिन्न विभागों के लिए कुछ संकल्प तय किए थे जिन्हें जन संकल्प 2008 कहा गया था। यह संकल्प निम्नानुसार थे :- 
१. प्रदेश में सेवाधर्मी सामाजिक संगठनों के विकास में सहयोग प्रदान किया जावेगा। उक्त संकल्प के क्रियान्वयन की स्थिति - 
१. प्रस्फुटन योजना का क्रियान्वयन

    • प्रदेश के 9390 ग्रामों में ग्राम स्तरीय स्वैच्छिक संगठनों- प्रस्फुटन समितियों का गठन।
    • इन समितियों के माध्यम से लोक कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कार्य किया जा रहा है

    २. शासकीय लोक कल्याणकारी योजनाओं में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की प्रभावी भूमिका बनाई जायेगी।

    १ नवांकुर योजना का संचालन -

    • प्रदेश में निम्नानुसार स्वैच्छिक संगठनों का चयन एवं वित्त पोषण
    • क्र.
      स्तर
      प्रति संभाग/जिला /वि.खण्ड
      कुल
      1
      विकासखण्ड स्तर
      2
      626
      2
      जिलास्तर पर
      2
      100
      3
      संभाग स्तर
      6
      18
      4
      बड़े शहरों- इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर
      10
      30
      5
      राज्य की राजधानी भोपाल
      20
      20
      कुल योग
      794

    उक्त मद में पूर्व में 1250 संस्थाओं को चिन्हित कर उन्हें भी विकेन्द्रिकृत नियोजना की ट्रेनिंग दी गई।

    ३. संवाद योजना का संचालन -

    • प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय जन अभियान समिति का गठन,
    • जिला स्तर पर शासकीय अधिकारियों/जन प्रतिनिधियों/ समाजसेवियों एवं स्वैच्छिक संगठनों के बीच नियमित संवाद -३२ संवाद, कार्यशालायें आयोजित।
    • शासकीय अधिकारियों/जन प्रतिनिधियों/समाजसेवियों एवं स्वैच्छिक संगठनों के बीच नियमित संवाद संभाग स्तर पर ७ कार्यशालायें आयोजित।
    • दिनांक 18 नवम्बर 2011 को पूरे प्रदेश के करीब 5 हजार एन.जी.ओ. एवं 9390 प्रस्फुटन समितियों एवं 18000 स्पंदन ग्रामों के प्रतिनिधियों का सम्मिलित कार्यशाला जिसका लक्ष्य प्रतिभागियों को स्वैच्छिक संगठनों के क्षेत्र की चुनौतियॉ, उनकी भूमिका एवं उनके संभावित/अपेक्षित योगदान के संबंध में सार्थक चर्चा एवं शासकीय कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं जानकारी हेतु समस्त योजनाओं के एक किट का वितरण ताकि प्रतिभागियों का Value Addition हों सके।
    • 4. अन्य कार्य -
    • स्वैच्छिक संगठनों हेतु प्रादेशित नीति का प्रारूप जारी।
    • प्रदेश के लगभग 18000 ग्रामों में शासकीय लोक कल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार।
    • लोक कल्याणकारी योजनाओं में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए प्रदेश के 18000 ग्रामों में ग्राम विकास यात्रा का आयोजन,

    २.  संकल्प क्रमांक -

    क्र.
    विषय
    वस्तुस्थिति
    समय सीमा पूरा करने हेतु
    स्थिति पूर्ण/अपूर्ण/सतत
    अन्य विभाग जिनसे समन्वय किया जाना है।
    I Year
    II Year
    III Year
    V Year
    1 शासकीय लोक कल्याणकारी योजनाओं में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की प्रभावी भूमिका बनाई जायेगी। १. ग्राम स्तरीय प्रस्फुटन समितियों का गठन
    3130
    6260
    9390
    15650
    प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष में लगभग 98 प्रतिशत पूर्ण
     
        २. प्रत्येक तिमाही में स्वयंसेवी संगठनों के साथ जिला कलेक्टरों की बैठकें
    200
    200
    -
    200 गत्‌ वर्ष 70 प्रतिशत एवं वर्तमान वर्ष में लगभग 85 प्रतिशत संभाग एवं जिलों में बैठकों सम्पन्न।  
        ३. स्वयंसेवी संस्थाओं की पहचान व प्रशिक्षण
    1250
    1250
    -
    -
    विगत वर्ष 1250 स्वयंसेवी संस्थाओं के लगभग 2500 प्रतिनिधियों को विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण, समुदाय आधारित मूल्यांकन व अनुश्रवण, सामाजिक अंकेक्षण एवं समंक विश्लेषण विषयों के संबंध में प्रशिक्षित किया गया।  

    उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वैच्छिक

    संगठनों को राज्य सरकार करेगी पुरूस्कृत

    राज्य सरकार प्रदेश में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वैच्छिक संगठनों को पुरूस्कृत करेगी। पुरूस्कार के लिये राज्य एवं जिला स्तरीय स्वैच्छिक संगठन पात्र होंगे। इस योजना के क्रियान्वयन का कार्य म.प्र. जन अभियान परिषद्‌ द्वारा किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि १२ क्टूबर २००९ को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित स्वैच्छिक संगठनों की पंचायत में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्वयंसेवी संगठनों को पुरूस्कृत करने की घोषणा की थी।

    मुख्यमंत्री राज्य स्तरीय उत्कृष्ट स्वैच्छिक संगठन पुरूस्कार तथा मुख्यमंत्री जिला स्तरीय उत्कृष्ट स्वैच्छिक संगठन पुरूस्कार'' के नाम से दिए जाने वाले इन पुरूस्कारों में स्वैच्छिक संगठनों को प्रदेश स्तर पर क्रमशः प्रथम पुरूस्कार ५ लाख, द्वितीय पुरूस्कार ३ लाख और तृतीय पुरूस्कार १ लाख रुपये की राशि दी जाएगी। जिला स्तर पर एक लाख रुपये का सम्मान प्रति वर्ष दिया जाएगा। यह सम्मान राज्य स्तर पर तीन तथा जिला स्तर पर एकएक संगठन को प्रतिवर्ष दिया जाएगा। यह एकल सम्मान होगा।

    यह सम्मान समाज में विकास के सभी क्षेत्रों में स्वैच्छिकता, सामाजिक सदभाव, समरसता, जागरूकता लाने तथा श्रेष्ठतम उपलब्धियों व योगदान के लिए सम्मानित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। सम्मान के लिए प्रदेश के सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठनों से सम्मान हेतु अनुशंसा अथवा नामांकन की प्रविष्टियां आंमत्रित की जाएंगी। यह सम्मान ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, नशामुक्ति, भूमि, जल संरक्षण एवं संवर्धन, वृक्षारोपण एवं पर्यावरण तथा ऊर्जा संरक्षण के लिए समाज में हुए श्रेष्ठतम कार्यों व योगदान करने वाले संगठनों को दिया जाएगा। पुरूस्कार के लिए प्रतिवर्ष उच्च स्तरीय निर्णायक मण्डल का गठन म.प्र. शासन द्वारा किया जाएगा। निर्णायक मण्डल में राज्य स्तरीय पुरूस्कार हेतु एक समिति गठित की जाएगी जिसमें अध्यक्ष को राज्य शासन द्वारा नियुक्त किया जाएगा। इसके तिरिक्त समिति में ५ स्वैच्छिक संगठन के प्रतिनिधि एवं ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, ऊर्जा विकास तथा योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभागों के प्रमुख सचिव होंगे। म.प्र. जन भियान परिषद्‌ के कार्यपालक निदेशक समिति के सदस्य सचिव होंगे। जिला स्तरीय पुरूस्कारों के लिए समिति में संबंधित जिले के कलेक्टर ध्यक्ष, स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं उक्त विभागों के जिला प्रमुख रहेंगे। निर्णायक मण्डल की अनुशंसा पर शासन की स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात ही यह सम्मान घोषित किया जाएगा। यह सम्मान प्रतिवर्ष म.प्र.जनभियानपरिषद्‌द्वारावितरितकियाजाऐगा।

    स्वैच्छिक संगठनों से जुड़े विषयों के शोध पर स्कालरशिप

    राज्य सरकार विश्वविद्यालयों में स्वैच्छिक संगठनों से जुड़े विषयों पर शोध करने पर स्कालरशिप देगी। सरकार द्वारा यह निर्णय विगत १२ अक्टूबर २००९ को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित स्वैच्छिक संगठनों की पंचायत में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के क्रियान्वयन के तहत लिया गया है। प्रदेश में पहली बार क्रियान्वित इस योजना के तहत म.प्र. जन भियान परिषद्‌ द्वारा प्रतिवर्ष पाँच शोधार्थियों को स्कालशिप दी जाएगी। शोध राशि वर्ष में दो बार चारचार हजार रुपये चयनित शोधार्थियों को दी जाएगी।

    स्कालरशिप स्वैच्छिक संगठनों द्वारा ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों में विकास, स्वास्थ्य तथा शिक्षा आदि क्षेत्रों में किए गए कार्यों की प्रभावशीलता को लेकर किये गये अध्ययन के लिए दी जाएगी। इसके साथ ही स्वयंसेवी संगठनों द्वारा किए गए नवाचारी कार्यक्रमों के अध्ययन एवं विभिन्न स्वयंसेवी क्षेत्रों में क्रियात्मक अनुसंधान के लिए विह्णाविद्यालय मान्य अध्ययन केन्द्रों में शोध कार्य के लिए राशि दी जाएगी। स्कॉलरशिप हेतु चयन आयुक्त उच्च शिक्षा की अध्यक्षता में गठित एक राज्य स्तरीय समिति करेगी। जिसमें राज्य सरकार द्वारा नामांकित दो प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि तथा राज्य शासन द्वारा नामांकित सामाजिक विज्ञान संकाय के तीन विशेषज्ञ शामिल होंगे। चयन के लिए विभिन्न शोधार्थियों द्वारा शोध केन्द्रों से अग्रेषित किए गए आवेदनों पर समिति विचार कर निर्णय लेगी। स्कॉलरशिप ऐसे उम्मीदवारों को दी जाएगी जो म.प्र. के मूल निवासी हो। इसके लावा जिन्होंने पी.एच.डी. के लिए शोध कार्य हेतु विह्णाविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मान्य म.प्र. के किसी भी शोध संस्थान में शोध उपाधि समिति में साक्षात्कार के उपरांत पंजीयन किया हो। स्कालरशिप के लिये वही उम्मीदवार पात्र होंगे जिनका विह्णाविद्यालय में १ नम्बर २००९ के बाद पंजीयन हुआ हो,साथहीस्नातकोत्तरमेंविह्णाविद्यालयध्यादेशकेनुसारनिर्धारितन्यूनतमअंकप्राप्तकिएहो।

    विषय संभाग जिला विकासखण्ड गाँव कार्य विवरण
    ऊर्जा संरक्षण इन्दौर संभाग में बड़वानी निवाली भुलगाँव १००% C.F.L. ग्राम
      ४४ ग्राम १००ऽ     सिदड़ी १००% C.F.L. ग्राम
      C.F.L., ७५१     जोगवाड़ा १००% C.F.L. ग्राम
      बायोगैस व ७२१     तलाव १००% C.F.L. ग्राम
      उन्नत चूल्हें निर्मित   राजपुर रूई १००% C.F.L. ग्राम
          ठीकरी मोहीपुरा १००% C.F.L. ग्राम
        बुरहानपुर खकनार शकरपुरा/बलवाड़ा १००% C.F.L. ग्राम
        धार धरमपुरी दुगुनी १००% C.F.L. ग्राम
          निसरपुर कोठड़ा/पुरा १००% C.F.L. ग्राम
          बाग मुहाजा १००% C.F.L. ग्राम
          तिरला अम्बापुरा १००% उन्नत चूल्हा ग्राम
          बदनावर मुंगेला १००% C.F.L. व उन्नत
              चूल्हाग्राम
          बदनावर बामनसुता १००% C.F.L. ग्राम
          बदनावर भीमपुरा १००% C.F.L. ग्राम
          उमरबन धनोरा १००% C.F.L. ग्राम
        इन्दौर देपालपुर तामलपुर १००% C.F.L. ग्राम
          महू मालीपुरा १००% C.F.L. ग्राम
        झाबुआ उदयगढ़ जाम्बुखेड़ा, १००% C.F.L. ग्राम
            तलावद, आम्बी, १००% C.F.L. ग्राम
            बावड़ीखुर्द, १००% C.F.L. ग्राम
            बिडबड़ी १००% C.F.L. ग्राम
          सोण्डवा थरवाटा, चिखली, १००% C.F.L. ग्राम
            अठावा, फरवाता १००% C.F.L. ग्राम
          पेटलावद सुठवाड़िया १००% C.F.L. ग्राम
          कठ्ठीवाड़ा करेली मवड़ी, १००% C.F.L. ग्राम
            सायड़ा, हवेलीखेड़ा, १००% C.F.L. ग्राम
            बड़ीसर्दी, आमखूट, १००% C.F.L. ग्राम